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अवैध अपार्टमेंट को रोशन कर बने ‘करोड़पति’
Lucknow
Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
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लेसा की पहली तैनाती में 12 साल की मजबूत पारी खेली और जमकर अवैध कमाई की। जेई से एई पद पर प्रमोशन पाने के बाद अब एसडीओ बन चुके हैं। इस दौरान इनकी माली हैसियत 12 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वीआईपी क्षेत्र में चार फ्लैट, हजरतगंज व जनपथ में तीन दुकानें, सेल टैक्स दफ्तर के सामने स्थित कॉम्पलेक्स में दो दुकानें, चिनहट में पांच एकड़ का फार्म हाउस, पांच प्लॉट और चार बैंकों में नौ खाते खुद ब खुद हैसियत बयां करते हैं।
पांच साल में कमाए तीन करोड़
दिसंबर 2007 में पावर कॉर्पोरेशन की सेवा मेें जेई के रूप में आए। वीआईपी इलाके के उपकेंद्र पर तैनाती पाई और काली कमाई में जुट गए। अवैध अपार्टमेंट का विद्युत लोड स्वीकृत कराने, सरकारी सामान बेचने एवं बिजली चोरी कराने में महारत के चलते पांच साल में तीन करोड़ की संपत्ति के मालिक बन बैठे। गोखले मार्ग पर एक फ्लैट, सीतापुर रोड एक फार्म हाउस, दो प्लॉट हैं। कारनामों का खुलासा होने के बावजूद ऊपरी पहुंच के चलते दूसरे खंड में तैनाती पा गए।
असिस्टेंट इंजीनियर से ठेकेदार
एक दशक पहले लेसा में बतौर जेई तैनात हुए। आते ही बिल्डरों से साठगांठ कर लालबाग में अवैध अपार्टमेंट में बिजली चोरी कराने एवं एकल नक्शे पर ग्रुप हाउसिंग स्कीम का विद्युत लोड देने के गोरखधंधे में जुट गए। एसडीओ बनने के बावजूद काली कमाई से अलग नहीं हुए। हाईकोर्ट के आदेश पर सील हुए अपार्टमेंट को मोटी रकम लेकर गुपचुप तरीके से बिजली के कनेक्शन दे दिया। बिल्डर से ऐसे संबंध बने कि इंजीनियर महोदय अब खुद ठेकेदार बन चुके हैं।
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लखनऊ। इंजीनियरों की करतूतों से लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई अथॉरिटी (लेसा) को एक बार फिर शर्मसार होना पड़ रहा है। लेसा में ऐसे इंजीनियरों की संख्या 30 से अधिक है जो एक दशक के कार्यकाल में अकूत संपत्ति के मालिक बन गए। इंजीनियरों के इस सिंडीकेट में निदेशक स्तर तक के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। कुर्सी के दम पर अवैध बहुखंडीय इमारतों (कॉम्पलेक्स व अपार्टमेंट) का विद्युत लोड स्वीकृत कराने का गोरखधंधा कर रहे हैं। अवैध अपार्टमेंट को रोशन करते-करते ये इंजीनियर ‘करोड़पति’ बन चुके हैं। पहुंच इतनी है कि जब जिसे चाहते हैं हटवाकर कमाऊ कुर्सी हथिया लेते हैं।
‘अयोध्या पैलेस’ की तर्ज पर शहर में अनगिनत अवैध अपार्टमेंट को गैरकानूनी तरीके से बिजली कनेक्शन दे दिया गया। इनमें से ज्यादातर अपार्टमेंट अधिकतम तीन मंजिल के एकल नक्शे पर स्वीकृत हैं। जबकि पांच से छह मंजिल तक निर्माण हो हो चुका है। यहीं इन कॉम्पलेक्स व अपार्टमेंट की बिजली लाइन को बनाने के लिए खुद इंजीनियरों ने ठेका लिया और सरकारी केबल, ट्रांसफार्मर (ट्रांसफार्मर का ढांचा बदलकर) आदि सामान का इस्तेमाल किया। कई बहुमंजिला इमारतों में गलत तरीके से सरकारी सामान इस्तेमाल किए जाने साक्ष्य होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। डालीबाग क्षेत्र मेें विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में इसका खुलासा होने के बावजूद क्षेत्रीय इंजीनियरों ने मामला दबा दिया। यही नहीं पॉवर कॉर्पोरेशन के कुछ बड़े अफसर भी सरकारी सामान के इस्तेमाल की जांच होने नहीं देते। कारण काली कमाई का मोटा हिस्सा उनको भी पहुंचता है। अब तक 12 करोड़ की कमाई करने वाले एसडीओ की अकूत संपत्ति का ब्यौरा मुख्यमंत्री एवं आयकर आयुक्त को भेजी गई शिकायत में है। वहीं असिस्टेंट इंजीनियर से ठेकेदार बने इंजीनियर के कारनामों का चिट्टा मध्यांचल निगम मुख्यालय में मौजूद हैं। इस इंजीनियर ने हाईकोर्ट के आदेश पर सील अपार्टमेंट में कनेक्शन दे दिए, जिसकी पुष्टि विजिलेंस जांच में हो चुकी है। लेकिन जब निलंबित करने की तैयारी हुई तो संगठन के पदाधिकारियों एवं बड़े अफसरों के दखल से मामला अटक गया।
इन इलाकों में अवैध कनेक्शन
लालबाग, हुसैनगंज, डालीबाग, गोखले मार्ग, जॉपलिंग रोड, मीराबाई मार्ग, वजीर हसन रोड, पराग डेरी रोड, मुरलीनगर, शिवाजी मार्ग, लालकुआं, योजना भवन रोड, नाका, बास मंडी, गणेशगंज, अमीनाबाद, लाटूश रोड, चौक, नक्खास, बालागंज, ऐशबाग, रायबरेली रोड, महानगर, न्यू हैदराबाद, कल्याणपुर, चिनहट, स्माइलगंज, मटियारी, गोमतीनगर में ऐसे तमाम अपार्टमेंट लेसा इंजीनियरोें की घूसखोरी के चलते जगमगा रहे हैं।
ऐसे करते कमाई
यह इंजीनियर बिल्डर से कांपलेक्स व अपार्टमेंट का विद्युत लोड स्वीकृत कराने का ठेका ले लेते हैं। मोटी रकम के एवज में इंजीनियर दस्तावेजों की जांच किए बगैर ही कागज आके कर देते हैं। यही नहीं क्षेत्रीय इंजीनियर सरकारी सामान बेचने, अवैध रूप से विद्युत लोड स्वीकृत कराने एवं बैक डैट में पीडी (परमानेंट डिस्कनेक्शन) कराकर जेब भरते हैं।
मुझ से किसी इंजीनियर ने फ्लैट, प्लॉट, कार की खरीद करने के लिए परमिशन नहीं मांगी। हालांकि अब इंजीनियर सीधे पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (कार्मिक) से परमिशन मांगते हैं। परमीशन मिलने की सूचना लेसा को नहीं भेजी जाती है। ऐसे में यह बता पाना संभव नहीं कि किस-किस ने संपत्ति खरीदने के लिए परमिशन मांगी है।
- प्रदीप टंडन, कार्यकारी मुख्य अभियंता लेसा
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पांच साल में कमाए तीन करोड़
दिसंबर 2007 में पावर कॉर्पोरेशन की सेवा मेें जेई के रूप में आए। वीआईपी इलाके के उपकेंद्र पर तैनाती पाई और काली कमाई में जुट गए। अवैध अपार्टमेंट का विद्युत लोड स्वीकृत कराने, सरकारी सामान बेचने एवं बिजली चोरी कराने में महारत के चलते पांच साल में तीन करोड़ की संपत्ति के मालिक बन बैठे। गोखले मार्ग पर एक फ्लैट, सीतापुर रोड एक फार्म हाउस, दो प्लॉट हैं। कारनामों का खुलासा होने के बावजूद ऊपरी पहुंच के चलते दूसरे खंड में तैनाती पा गए।
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असिस्टेंट इंजीनियर से ठेकेदार
एक दशक पहले लेसा में बतौर जेई तैनात हुए। आते ही बिल्डरों से साठगांठ कर लालबाग में अवैध अपार्टमेंट में बिजली चोरी कराने एवं एकल नक्शे पर ग्रुप हाउसिंग स्कीम का विद्युत लोड देने के गोरखधंधे में जुट गए। एसडीओ बनने के बावजूद काली कमाई से अलग नहीं हुए। हाईकोर्ट के आदेश पर सील हुए अपार्टमेंट को मोटी रकम लेकर गुपचुप तरीके से बिजली के कनेक्शन दे दिया। बिल्डर से ऐसे संबंध बने कि इंजीनियर महोदय अब खुद ठेकेदार बन चुके हैं।
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लखनऊ। इंजीनियरों की करतूतों से लखनऊ इलेक्ट्रिक सप्लाई अथॉरिटी (लेसा) को एक बार फिर शर्मसार होना पड़ रहा है। लेसा में ऐसे इंजीनियरों की संख्या 30 से अधिक है जो एक दशक के कार्यकाल में अकूत संपत्ति के मालिक बन गए। इंजीनियरों के इस सिंडीकेट में निदेशक स्तर तक के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। कुर्सी के दम पर अवैध बहुखंडीय इमारतों (कॉम्पलेक्स व अपार्टमेंट) का विद्युत लोड स्वीकृत कराने का गोरखधंधा कर रहे हैं। अवैध अपार्टमेंट को रोशन करते-करते ये इंजीनियर ‘करोड़पति’ बन चुके हैं। पहुंच इतनी है कि जब जिसे चाहते हैं हटवाकर कमाऊ कुर्सी हथिया लेते हैं।
‘अयोध्या पैलेस’ की तर्ज पर शहर में अनगिनत अवैध अपार्टमेंट को गैरकानूनी तरीके से बिजली कनेक्शन दे दिया गया। इनमें से ज्यादातर अपार्टमेंट अधिकतम तीन मंजिल के एकल नक्शे पर स्वीकृत हैं। जबकि पांच से छह मंजिल तक निर्माण हो हो चुका है। यहीं इन कॉम्पलेक्स व अपार्टमेंट की बिजली लाइन को बनाने के लिए खुद इंजीनियरों ने ठेका लिया और सरकारी केबल, ट्रांसफार्मर (ट्रांसफार्मर का ढांचा बदलकर) आदि सामान का इस्तेमाल किया। कई बहुमंजिला इमारतों में गलत तरीके से सरकारी सामान इस्तेमाल किए जाने साक्ष्य होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। डालीबाग क्षेत्र मेें विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में इसका खुलासा होने के बावजूद क्षेत्रीय इंजीनियरों ने मामला दबा दिया। यही नहीं पॉवर कॉर्पोरेशन के कुछ बड़े अफसर भी सरकारी सामान के इस्तेमाल की जांच होने नहीं देते। कारण काली कमाई का मोटा हिस्सा उनको भी पहुंचता है। अब तक 12 करोड़ की कमाई करने वाले एसडीओ की अकूत संपत्ति का ब्यौरा मुख्यमंत्री एवं आयकर आयुक्त को भेजी गई शिकायत में है। वहीं असिस्टेंट इंजीनियर से ठेकेदार बने इंजीनियर के कारनामों का चिट्टा मध्यांचल निगम मुख्यालय में मौजूद हैं। इस इंजीनियर ने हाईकोर्ट के आदेश पर सील अपार्टमेंट में कनेक्शन दे दिए, जिसकी पुष्टि विजिलेंस जांच में हो चुकी है। लेकिन जब निलंबित करने की तैयारी हुई तो संगठन के पदाधिकारियों एवं बड़े अफसरों के दखल से मामला अटक गया।
इन इलाकों में अवैध कनेक्शन
लालबाग, हुसैनगंज, डालीबाग, गोखले मार्ग, जॉपलिंग रोड, मीराबाई मार्ग, वजीर हसन रोड, पराग डेरी रोड, मुरलीनगर, शिवाजी मार्ग, लालकुआं, योजना भवन रोड, नाका, बास मंडी, गणेशगंज, अमीनाबाद, लाटूश रोड, चौक, नक्खास, बालागंज, ऐशबाग, रायबरेली रोड, महानगर, न्यू हैदराबाद, कल्याणपुर, चिनहट, स्माइलगंज, मटियारी, गोमतीनगर में ऐसे तमाम अपार्टमेंट लेसा इंजीनियरोें की घूसखोरी के चलते जगमगा रहे हैं।
ऐसे करते कमाई
यह इंजीनियर बिल्डर से कांपलेक्स व अपार्टमेंट का विद्युत लोड स्वीकृत कराने का ठेका ले लेते हैं। मोटी रकम के एवज में इंजीनियर दस्तावेजों की जांच किए बगैर ही कागज आके कर देते हैं। यही नहीं क्षेत्रीय इंजीनियर सरकारी सामान बेचने, अवैध रूप से विद्युत लोड स्वीकृत कराने एवं बैक डैट में पीडी (परमानेंट डिस्कनेक्शन) कराकर जेब भरते हैं।
मुझ से किसी इंजीनियर ने फ्लैट, प्लॉट, कार की खरीद करने के लिए परमिशन नहीं मांगी। हालांकि अब इंजीनियर सीधे पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (कार्मिक) से परमिशन मांगते हैं। परमीशन मिलने की सूचना लेसा को नहीं भेजी जाती है। ऐसे में यह बता पाना संभव नहीं कि किस-किस ने संपत्ति खरीदने के लिए परमिशन मांगी है।
- प्रदीप टंडन, कार्यकारी मुख्य अभियंता लेसा