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Hindi News ›   Utility ›   How Much Ethanol Can Be Produced From 1 Ton Of Sugarcane

Ethanol Production: 1 टन गन्ने से कितने लीटर निकलता है इथेनॉल? जानिए क्या है इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया

Sat, 09 May 2026 07:40 PM IST
Sankalp Prakash Singh यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sankalp Prakash Singh Updated Sat, 09 May 2026 07:40 PM IST
सार

क्या आपको इस बारे में पता है एक टन गन्ने से कितना इथेनॉल बनता है। आज इस खबर में हम इसी बारे में जानेंगे।

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How Much Ethanol Can Be Produced From 1 Ton Of Sugarcane
Ethanol - फोटो : AI Generated

विस्तार

भारत में इथेनॉल को भविष्य के ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।  पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की सरकारी योजना के चलते इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इथेनॉल एक बायोफ्यूल होता है। इथेनॉल को कृषि आधारित फसलों और उनके उप-उत्पादों की मदद से तैयार किया जाता है। खासतौर पर गन्ना और उससे बनने वाला शीरा इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। इससे न केवल पेट्रोल पर निर्भरता को कम करने में मदद मिल रही है, बल्कि किसानों और चीनी उद्योग को भी आर्थिक मजबूती मिल रही है। इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखते हुए पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है। 
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गन्ने से इथेनॉल तैयार करने के लिए सबसे पहले उसका रस निकाला जाता है। इसके बाद चीनी मिल में इसको प्रोसेस किया जाता है और मोलासेस बनाया जाता है। इस मोलासेस में मौजूद शर्करा किण्वन और आसवन प्रक्रिया से गुजरता है। इसके बाद यह इथनॉल के रूप में तैयार होता है। कई आधुनिक प्लांट अब सीधे गन्ने के रस से भी इथेनॉल बना रहे हैं।
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सामान्य परिस्थितियों में अगर देखा जाए तो 1 टन गन्ने से करीब 70 से 85 लीटर तक इथेनॉल तैयार किया जा सकता है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि यह मात्रा हर बार एकसमान नहीं रहती। गन्ने की गुणवत्ता, उसमें मौजूद शर्करा की मात्रा, मौसम और मिल की तकनीक जैसे कई कारक उत्पादन को प्रभावित करने का काम करते हैं।
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इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से इसका सीधा फायदा किसानों को भी मिलता है। इसके अलावा चीनी मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलता है। इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन माना जाता है, इस कारण यह पर्यावरण के लिहाज से भी काफी फायदेमंद है। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के चलते आने वाले वर्षों में इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। 


इथेनॉल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का काम कर सकता है। इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च घटाने में मदद मिलेगी और इससे वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलने की भी उम्मीद की जा रही है। यही वजह है कि सरकार इसको लेकर कई योजनाओं पर काम कर रही है। 
 
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