स्मार्ट TV खरीदने से पहले नोट कर लें ये जरूरी बातें, नहीं तो टीवी खरीदकर पछताएंगे

भारत में धीरे-धीरे स्मार्ट टीवी का चलन बढ़ रहा है। पिछले एक साल में सैमसंग, शाओमी, थॉमसन और वीयू जैसी कंपनियों ने अपने स्मार्ट टीवी बाजार में उतारे हैं। स्मार्ट टीवी बाजार की हालत ऐसी हो गई है कि हाल ही में अमेजन ग्रेड फेस्टिवल सेल में शिंको कंपनी ने सिर्फ 5,500 रुपये में 55 इंच का 4के टीवी बेचा है। अब सवाल यह है कि क्या आपको वाकई स्मार्ट टीवी की जरूरत है या फिर कहीं स्मार्ट टीवी खरीदकर आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं? आइए जानते हैं...
स्मार्ट टीवी के साथ क्या है दिक्कत?

इसकी शुरुआत हम एक ग्राहक से ही करते हैं। 34 साल के इराम मिर्जा ने पिछले साल एक स्मार्ट टीवी खरीदा था, लेकिन अभी तक वे अपने स्मार्ट टीवी में नेटफ्लिक्स इंस्टॉल नहीं कर पाए और वह इसलिए क्योंकि उनके टीवी में 'साइडलोड' नहीं है। आप में से कई लोग साइडलोड के बार में नहीं जानते होंगे। यह कुछ ऐसा है कि जैसा कि कोई एप गूगल प्ले-स्टोर पर नहीं है और आपको उस एप को 9एप्स जैसे थर्ड पार्टी प्लेटफॉर्म से डाउनलोड करना पड़े।
मिर्जा के साथ भी ऐसा ही हुआ है। उनके स्मार्ट टीवी में नेटफ्लिक्स पहले से इंस्टॉल नहीं है और ना ही उनके टीवी के स्टोर पर नेटफ्लिक्स मौजूद है। ऐसे में स्मार्ट टीवी होने के बावजूद मिर्जा नेटफ्लिक्स एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। तो अब सवाल यह है कि जब आप स्मार्ट टीवी में मनचाहा एप डाउनलोड ही नहीं कर सकते तो फिर स्मार्ट टीवी लेने का फायदा क्या है।
क्या होता है स्मार्ट टीवी?

स्मार्ट टीवी का सीधा मतलब है कि उसमें एक ऑपरेटिंग सिस्टम होगा और आप उसे इंटरनेट से कनेक्ट कर सकेंगे। स्मार्ट टीवी एक तरह से आपके स्मार्टफोन जैसा ही है जिसमें आप इंटरनेट चला सकते हैं और गूगल, अमेजॉन प्राइम वीडियो जैसे एप को इंस्टॉल कर सकेंगे। आजकल स्मार्ट टीवी के बाजार में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले टीवी का बोलबाला है। इस समय बाजार में एंड्रॉयड, सैमसंग के टाइजेन और एलजी के वेबओएस जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ स्मार्ट टीवी मौजूद हैं।
महंगे और ब्रांडेड स्मार्ट टीवी में नहीं है दिक्कत

सस्ते स्मार्ट टीवी को खरीदना हमेशा ही घाटे का सौदा है, क्योंकि सस्ते स्मार्ट टीवी में कमजोर प्रोसेसर के साथ रैम और स्टोरेज भी कम मिलती है। ऐसे में कुछ समय बाद आपको परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही आपको कुछ महीने बाद अपडेट मिलना बंद हो जाता है। ऐसे में आपके टीवी में इंस्टॉल एप में कई सारे फीचर्स नहीं मिलते हैं और कई बार ये एप काम करना भी बंद कर देते हैं। धीरे-धीरे आपका टीवी कछुए की चाल चलने लगता है। कई बार तो टीवी क्रैश भी हो जाता है। सस्ते टीवी को लांच करने वाली कंपनियां नेटफ्लिक, हॉटस्टार और अमेजॉन जैसी कंपनियों से अपने टीवी के ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करने वाले एप भी नहीं तैयार करवा पाती हैं। खास बात यह है कि भारत में बिकने वाले LeEco के टीवी में भी इनमें से कोई एप नहीं हैं।
आपको क्या करना चाहिए

अगर आप वास्तव में स्मार्ट टीवी चाहते हैं तो स्मार्ट टीवी के बजाय आप अमेजॉन फायर स्टिक, गूगल क्रोमकास्ट या फिर एप्पल टीवी ले सकते हैं, क्योंकि इन डिवाइस में कस्टम सॉफ्टवेयर होते हैं। फायर स्टिक के साथ अलग से एक रिमोट होता है और कई सारे एप का एक्सेस भी मिलता है। गूगल क्रोम कास्ट की मदद से आप अपने फोन पर मौजूद कंटेंट को अपने एलईडी टीवी पर आसानी से देख सकते हैं।