इस तरह इंटरनेट का करेंगे इस्तेमाल तो किसी को कुछ पता नहीं चलेगा

ब्राउजर का इस्तेमाल करने के दौरान यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी का पूरा ब्यौरा हिस्ट्री में दर्ज हो जाता है। इससे कोई भी आसानी से यह जान सकता है कि यूजर ने ब्राउजर पर कौन-कौन सी वेबसाइट्स को चेक किया है। इस तरह की स्थिति यूजर को परेशानी में भी डाल सकती है। इस परेशानी से निपटने के लिए यूजर प्राइवेट ब्राउंजिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस तरह गूगल क्रोम और फायरफॉक्स में करें प्राइवेटी ब्राउजिंग

गूगल क्रोम पर प्राइवेट ब्राउजिंगः
गूगल क्रोम पर दो तरह की ब्राउजिंग होती है। एक सामान्य, जो आमतौर पर यूजर करते हैं और दूसरी ‘प्राइवेट ब्राउजिंग’। प्राइवेट ब्राउजिंग करने के लिए सबसे पहले गूगल क्रोम ओपन करें। इसके बाद डिस्प्ले पर दाईं तरह ऊपर नजर आ रहे तीन बिंदुओं पर क्लिक करें। अब यहां मौजूद ‘न्यू इन्कोग्निटो विंडो’ पर क्लिक करें। ऐसा करते ही डिस्प्ले पर एक काले रंग का एक नया सर्चिंग ब्राउजर खुल जाएगा। यूजर चाहें, तो इसे शॉर्टकट तरीके से भी खोल सकते हैं। इसके लिए उन्हें कंट्रोल+शिफ्ट+ एन का प्रयोग करना होगा। इसे सामान्य ब्राउजर की तरह ही इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर यूजर ‘कंट्रोल एच’ करके कंप्यूटर पर हिस्ट्री देख लेते हैं, लेकिन न्यू इन्कोग्निटो विंडो में सर्च किए गए रिजल्ट हिस्ट्री में सेव नहीं होती है।
फायरफॉक्स पर प्राइवेट ब्राउजिंगः
मोजिला फायरफॉक्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर भी प्राइवेट ब्राउजिंग कर सकते हैं। फायरफॉक्स ब्राउजर के मेन्यू में जाकर ‘न्यू प्राइवेट विंडो’ को सिलेक्ट करिए। इसके लिए कंट्रोल+शिफ्ट+ पी का शॉर्टकट भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से डिस्प्ले पर नई प्राइवेट विंडो खुल जाएगी। प्राइवेट विंडो में यूजर कुछ भी सर्च कर सकते हैं। इसमें सर्च की गईं वेबसाइट्स या उन पर खोले गए पेज इंटरनेट हिस्ट्री में सेव नहीं होते हैं। पिछले एक दशक में साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जिससे यूजर्स की प्राइवेसी जैसे कि बैंकिंग डिटेल, ऑनलाइन पोर्टल और सोशल नेटवर्किंग एक्टिविटी को काफी नुकसान हुआ है। साइबर कैफे में मौजूद कंप्यूटर पर काम करने के लिए प्राइवेट ब्राउजिंग अच्छा विकल्प है।