Honeycomb Vs Grass: कूलर के लिए कौन सा कूलिंग पैड बेहतर, तेज गर्मी में कौन देगा ज्यादा ठंडी हवा?

Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीNitish Kumar
Mon, 09 Mar 2026 10:21 PM IST
सार

Honeycomb Vs Grass: गर्मी के मौसम में कूलर की ठंडी हवा काफी हद तक उसके कूलिंग पैड्स पर निर्भर करती है। बाजार में आमतौर पर दो तरह के पैड मिलते हैं—हनीकॉम्ब और घास वाले। दोनों की अपनी खूबियां और कमियां हैं। जानिए आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा।

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honeycomb vs grass cooler pads which is better cooling
जानिए कौन-सा कूलिंग पैड है बेहतर - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    भीषण गर्मी में कूलर से मिलने वाली ठंडक काफी हद तक उसके कूलिंग पैड्स पर निर्भर करती है। अगर कूलर में सही पैड लगे हों, तो बाहर का तापमान चाहे जितना भी ज्यादा क्यों न हो, आपको ठंडी हवा ही मिलेगी। बाजार में मुख्य रूप से दो तरह के कूलिंग पैड उपलब्ध हैं- हनीकॉम्ब पैड और घास वाले पारंपरिक पैड।

    हनीकॉम्ब पैड आधुनिक डिजाइन के होते हैं और मधुमक्खी के छत्ते जैसी बनावट के कारण अच्छी ठंडक देने के लिए जाने जाते हैं। वहीं घास वाले पैड पुराने समय से इस्तेमाल होते आ रहे हैं और कम कीमत में भी अच्छी कूलिंग दे सकते हैं।

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    हालांकि दोनों विकल्पों के अपने फायदे और नुकसान हैं। इसलिए कूलर खरीदते समय या पुराने पैड बदलते समय इनके बारे में सही जानकारी होना जरूरी है।

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    घास वाले कूलिंग पैड के फायदे

    घास से बने कूलिंग पैड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये सस्ते होते हैं। कम कीमत होने की वजह से इन्हें जरूरत पड़ने पर आसानी से बदला जा सकता है।अगर आपके इलाके के पानी में नमक की मात्रा ज्यादा है, तो ऐसे पैड ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं क्योंकि इन्हें बदलना आसान और सस्ता होता है।घास वाले पैड जल्दी गीले हो जाते हैं और जैसे ही पूरी तरह पानी सोख लेते हैं, कूलर तुरंत ठंडी हवा देना शुरू कर देता है। इसके अलावा ये प्राकृतिक सामग्री से बने होते हैं, इसलिए पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं।

    घास वाले पैड की कमियां

    घास वाले पैड ज्यादा टिकाऊ नहीं होते। अक्सर इन्हें हर मौसम में बदलना पड़ता है और कई बार एक ही गर्मी में दो-तीन बार भी बदलना पड़ सकता है।इनमें धूल और गंदगी जल्दी जमा हो जाती है। एक बार गंदगी भर जाने के बाद इन्हें साफ करना मुश्किल होता है और तब ये सही तरह से काम नहीं करते।इसके अलावा अगर पैड पूरी तरह गीले न हों, तो ठंडक भी कम महसूस होती है।

    हनीकॉम्ब कूलिंग पैड के फायदे

    हनीकॉम्ब कूलिंग पैड आधुनिक तकनीक से बने होते हैं। ये आमतौर पर सेल्युलोज पेपर से तैयार किए जाते हैं और इनकी बनावट मधुमक्खी के छत्ते जैसी होती है।इनका ढांचा मजबूत होता है, इसलिए ये ज्यादा टिकाऊ होते हैं। अगर पानी में नमक की मात्रा कम हो, तो इन्हें तीन से पांच साल तक भी इस्तेमाल किया जा सकता है।इनकी खास बनावट के कारण पानी पूरे पैड में समान रूप से फैलता है, जिससे बेहतर ठंडक मिलती है। साथ ही ये लंबे समय तक गीले रहते हैं, जिससे कूलर की हवा ज्यादा ठंडी महसूस होती है।

    हनीकॉम्ब पैड की कमियां

    हनीकॉम्ब पैड की सबसे बड़ी कमी उनकी कीमत है। ये घास वाले पैड की तुलना में काफी महंगे होते हैं।अगर पानी में नमक ज्यादा हो, तो नमक इनके अंदर जमा होकर रास्ते बंद कर सकता है, जिससे हवा का प्रवाह कम हो जाता है।लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर इनमें दुर्गंध आने की समस्या भी हो सकती है।

    आखिर कौन सा विकल्प बेहतर?

    अगर आप बार-बार कूलिंग पैड बदलने की परेशानी से बचना चाहते हैं और थोड़ा ज्यादा खर्च करने में दिक्कत नहीं है, तो हनीकॉम्ब पैड बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

    वहीं अगर आपका बजट सीमित है और आप कम खर्च में अच्छी ठंडक चाहते हैं, तो घास वाले पारंपरिक पैड भी एक अच्छा और किफायती विकल्प साबित हो सकते हैं।

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