फेसबुक कॉन्टैक्ट नंबर ही नहीं आपके निजी मैसेज भी पढ़ता है!

मैं भी ऐसे चिंतित आम लोगों में शामिल हूं, जो इन सवालों से जूझ रहा है। पिछले हफ्ते के आखिर में मैंने अपना फेसबुक डेटा डाउनलोड किया। ऐसा करना आसान है। आप सेंटिग में जाइए, उसके बाद 'जनरल अकाउंट सेंटिंग' और फिर 'डाउनलोड माय डेटा' पर क्लिक कीजिए। एक घंटे बाद एक ई-मेल मिला जिसमें एक लिंक दिया गया था। क्लिक करने पर 675 एमबी का फोल्डर डाउनलोड होने लगा, जिसमें 2007 में मेरे फेसबुक पर आने के बाद का सारा डेटा था।
मेरे सारे फोन नंबर फेसबुक के पास थे
शुरुआत में तो कुछ खास ऐसा नहीं दिखा जो परेशान करने वाला था। मुझे लगा था कि मेरे आज तक पोस्ट किए गए सभी फोटो और वीडियो वहां होंगे और टाइमलाइन पर पिछले 10 साल की जिंदगी के सभी रोमांचक हिस्से। मैंने देखा कि कुछ सालों तक तो हर वो गाना जो मैंने 'स्पॉटीफाई' पर सुना था, वहां पर दिख रहा था। इसका मतलब ये है कि आप फेसबुक के जरिए जिस किसी बाहरी ऐप पर क्लिक करते हैं तो आपके बारे में फेसबुक और जानकारी इकट्ठा कर लेता है।
उसके बाद मैंने 'कॉन्टैक्ट' नाम की फाइल पर क्लिक किया। मैं ये देखकर हैरानी में पड़ गया कि मेरी सारी कॉन्टेक्ट लिस्ट वहीं थी, जिसमें हजारों फोन नंबर थे। ऐसा नहीं था कि सिर्फ फेसबुक के दोस्तों के ही नंबर वहां थे, ब्लकि दूसरे दोस्तों के भी। मुझे याद नहीं कि 2007 में फेसबुक पर आने के वक्त क्या हुआ होगा। उन दिनों अनजाने में मैंने शायद अपनी कॉन्टेक्ट लिस्ट को अपलोड करने की इजाजत दे दी होगी ताकि देख सकूं कि फेसबुक पर और कौन-कौन है। शायद, मेरी गलती थी।
लेकिन फिर मैंने ध्यान दिया कि लिस्ट में सबसे ऊपर कुछ नंबर थे जो 10 साल पहले फेसबुक मशीन में नहीं शामिल हुए थे क्योंकि मैंने हाल ही में उन्हें कॉनटैक्ट लिस्ट में जोड़ा था। विडंबना देखिए कि इसमें पत्रकार कैरोल कैडवॉलाडर का भी नंबर था जिन्होंने कैंब्रिज एनालिटिका और फेसबुक की पूरी कहानी रिपोर्ट की है। तो इसका मतलब जैसे ही मैं कोई नया नंबर अपनी फोनबुक में शामिल करता हूं तो वो अपने आप फेसबुक के पास भी चला जाता है। मतलब कंपनी मेरी निगरानी कर रही है।
कैसे करें यूजर्स भरोसा

फेसबुक के डेटा कलेक्शन का ये एक हैरत भरा उदाहरण है। एक यूजर ने रिपोर्ट किया है कि उसके एंड्रॉयड फोन के सारे टेक्स्ट मेसेज फेसबुक पर स्टोर हो गए थे। मान लिया कि किसी फेसबुक यूजर ने अपने डेटा को शेयर करने की इजाजत दे भी दी लेकिन उसके दोस्तों ने तो नहीं दी जिनके टेक्स्ट मेसेज या फोन नंबर इकट्ठा किए जा रहे हैं। अगर उन लोगों ने कभी फेसबुक जॉइन ही नहीं किया या अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट भी कर दिया तो भी उनका कुछ डेटा या जानकारी सोशल नेटवर्क पर मौजूद रहेगी ही।
'यूजर्स कैसे करेंगे भरोसा'
फेसबुक का कहना है कि अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट देना किसी भी मेसेजिंग या सोशल ऐप जॉइन करने की सामान्य प्रक्रिया है और यूजर्स की इच्छा है कि वे ऐसा करें या ना करें। लोगों से पूछा जाता है कि क्या वे अपने फोन के कॉन्टेक्ट अपलोड करने की इजाजत देना चाहते हैं और ये ऐप शुरू करने की एकदम शुरुआत में बताया जाता है। पहले से दी गई किसी जानकारी को लोग डिलीट भी कर सकते हैं। कंपनी का ये कहना सही है कि ये आम बात है।
अगर आपको लगता है कि फेसबुक का आपकी जानकारी इकट्ठा करना गलत है तो ऐपल कंपनी के आईक्लाउड का क्या जहां लाखों लोगों ने अपने आई-फोन का डेटा स्टोर कर रखा है और कॉन्टैक्ट भी। फेसबुक दावा करता है कि ये अपना डेटा किसी के साथ साझा नहीं करता है। दिक्कत ये है कि इसका बिजनेस मॉडल आई-फोन की तरह नहीं है और यूजर डेटा पर काफी निर्भर करता है। लेकिन पिछले हफ्ते जो डेटा लीक का मामला सामने आया है, उसके बाद यूजर्स फेसबुक को संदेह भरी नजरों से देख रहे हैं।