Safety Tips: क्या आपका भी डेटा या पासवर्ड हुआ है लीक? हैकर्स से खुद को बचाने के लिए तुरंत करें ये काम

सुयश पांडेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीसुयश पांडेय
Sat, 21 Feb 2026 09:20 PM IST
सार

Data Breach Safety:

डेटा ब्रीच की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इससे आपके ईमेल, पासवर्ड और बैंकिंग डिटेल्स खतरे में पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने जरूरी होते हैं। सही सुरक्षा उपाय अपनाकर आप अपने ऑनलाइन अकाउंट, बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं और साइबर हमलों से बचाव कर सकते हैं।

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Data Breach Alert: What to Do If Your Password and Login Details Are Leaked
डाटा ब्रीच (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एआई

    विस्तार

    आजकल डेटा ब्रीच बहुत आम हो गए हैं। कई बार हमें ईमेल में 'नोटिस ऑफ डेटा ब्रीच' नाम से एक मैसेज मिलता है। इसमें बताया जाता है कि हमारा कुछ डेटा लीक हो गया है। इस ईमेल में आमतौर पर लिखा होता है कि स्थिति कंट्रोल में है और डेटा के गलत इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला है। क्योंकि तुरंत कोई नुकसान दिखाई नहीं देता इसलिए ज्यादातर लोग ऐसे ईमेल को पढ़कर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन साइबर सुरक्षा को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। भारत में यह खतरा और भी बड़ा है क्योंकि हम यूपीआई, नेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट जैसी सेवाओं का रोज इस्तेमाल करते हैं। अगर आपका ईमेल या पासवर्ड लीक हो गया तो आपका बैंक अकाउंट और अन्य जरूरी अकाउंट भी खतरे में आ सकते हैं। ऐसे में आपको घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन तुरंत जरूरी कदम उठाना बहुत जरूरी है। आज इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि कैसे आप ऐसी स्थिति में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं:

    भारत में हाल में हुए बड़े डाटा ब्रीच

    वर्ष 2025 और 2026 की शुरुआत में भारत में डेटा ब्रीच और साइबर हमलों में भारी वृद्धि देखी गई है।

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    रिटेल चेन डेटा लीक (अक्तूबर 2025):

    एक राष्ट्रव्यापी ग्रोसरी रिटेल चेन पर बड़े हमले में 6,00,000 ग्राहकों और 1,000 कर्मचारियों का व्यक्तिगत डेटा लीक हुआ। इसमें आधार कार्ड और बैंकिंग विवरण जैसी संवेदनशील जानकारी शामिल थी।

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    टाटा टेक्नोलॉजीज:

    जनवरी 2025 में कंपनी ने एक रैंसमवेयर हमले की जानकारी दी। इसने उनके कुछ आईटी एसेट्स को प्रभावित किया था।

    फिनटेक और पेमेंट सिस्टम:

    जनवरी 2025 में एक प्रमुख भारतीय मल्टीनेशनल पेमेंट सिस्टम के प्रोडक्शन डेटाबेस और सोर्स कोड में अनधिकृत पहुंच पाई गई। इसे डार्क वेब पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया था।

    एंजेल वन:

    फरवरी 2025 में कंपनी के AWS (अमेजन वेब सर्विसेज) रिसोर्स के साथ छेड़छाड़ होने की सूचना मिली।

    निवा बुपा:

    फरवरी 2025 में इस स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने ग्राहकों के डेटा लीक के दावों की जांच शुरू की थी।

    क्लाउड स्टोरेज एक्सपोजर:

    जनवरी 2025 में कई भारतीय कंपनियों के 22 टेराबाइट से अधिक संवेदनशील डेटा का खुलासा हुआ। इसका मुख्य कारण S3 बकेट की गलत कॉन्फिगरेशन थी।

    2026 के शुरुआती रुझान और रिपोर्ट

    साप्ताहिक हमलों में वृद्धि:

    फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय संगठनों पर प्रति सप्ताह औसतन 3,195 साइबर हमले हो रहे हैं।

    सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र:

    शिक्षा (7,684 हमले प्रति सप्ताह), सरकारी संस्थान (4,912 हमले) और व्यावसायिक सेवाएं 2026 में सबसे अधिक निशाने पर रहे हैं।

    रेमंड:

    फरवरी 2025 के अंत में एक सुरक्षा घटना की सूचना दी गई थी जिसमें आईटी संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए उन्हें अलग करना पड़ा था।

    अहम आंकड़े (2025-26)

    कुल हमले:

    2025 के दौरान भारत में कुल 26.5 करोड़ (265 मिलियन) से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए।

    CERT-In की भूमिका:

    2025 में भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने लगभग 29.44 लाख साइबर घटनाओं को संभाला।

    मुख्य खतरे:

    ट्रोजन (43%) और इन्फेक्टर्स (34%) सबसे बड़े खतरे बनकर उभरे हैं जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहे।

    1. सबसे पहले अपना ईमेल अकाउंट सुरक्षित करें

    आपका ईमेल अकाउंट आपकी बाकी सभी ऑनलाइन सेवाओं की 'मास्टर की' है। अगर किसी को आपके पर्सनल या वर्क ईमेल का एक्सेस मिल जाता है। तो वह आपके बैंकिंग एप्स, सोशल मीडिया, क्लाउड स्टोरेज और अन्य सेवाओं के पासवर्ड आसानी से रीसेट कर सकता है। फिर भले ही उसे आपका असली पासवर्ड पता हो या नहीं। बस 'फॉरगॉट पासवर्ड' पर क्लिक करना है और खेल खत्म।

    क्या करें:

    अगर आपको लगता है कि आपके ईमेल का पासवर्ड लीक हो गया है तो इसे तुरंत बदलें। एक लंबा और अनोखा (यूनिक) पासवर्ड बनाएं जिसका इस्तेमाल आपने पहले कभी न किया हो।

    सिक्योरिटी बढ़ाएं:

    अपने ईमेल पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें। इसके लिए ऑथेंटिकेटर एप या हार्डवेयर सिक्योरिटी की का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित है।

    ओटीपी से बचें:

    भारत में एसएमएस के जरिए ओटीपी पाना सबसे आम है, लेकिन यह सबसे कम सुरक्षित तरीका भी है। हैकर्स 'सिम स्वैपिंग' जैसी तकनीक से आपके फोन नंबर का कंट्रोल ले सकते हैं। ऑथेंटिकेटर एप्स कोड सीधे आपके डिवाइस पर जनरेट करते हैं, जिससे यह खतरा टल जाता है।

    लॉगिन एक्टिविटी चेक करें:

    सेटिंग में जाकर देखें कि आपका अकाउंट हाल ही में कहां और कब एक्सेस किया गया था। अगर कोई अनजान डिवाइस दिखे तो सभी सेशन से 'साइन आउट' कर दें।

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