ऑनलाइन शॉपिंग में एक गलती से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट: कैसे करें फर्जी वेबसाइट और एप की पहचान? जानें तरीका

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Sun, 11 Oct 2026 05:02 PM IST
सार

क्या आप ऑनलाइन शॉपिंग करते समय वेबसाइट या एप की जांच करते हैं? साइबर ठग असली कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट और एप के जरिए पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल्स और निजी जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं। आइए जानते हैं नकली लिंक, संदिग्ध ऑफर और फर्जी एप की पहचान करने का आसान तरीका क्या है...

Beware Fake Websites and Apps: 5 Smart Ways Protect Your Banking Details Online
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    ऑनलाइन शॉपिंग करना हो या कोई नया एप डाउनलोड करना हो, एक छोटी-सी लापरवाही आपको साइबर ठगी का शिकार बना सकती है। साइबर अपराधी असली कंपनियों जैसी दिखने वाली वेबसाइट और एप तैयार करते हैं, ताकि यूजर्स उन पर भरोसा करके अपनी बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और दूसरी निजी जानकारी साझा कर दें। कई बार फर्जी वेबसाइट पर आकर्षक डिस्काउंट और सस्ते ऑफर देकर लोगों को फंसाया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि किसी भी वेबसाइट पर अपनी जानकारी भरने या एप डाउनलोड करने से पहले उसकी जांच कर लें। आइए जानते हैं कि आप फर्जी वेबसाइट और नकली एप की पहचान कैसे कर सकते हैं।

    फर्जी वेबसाइट की पहचान कैसे करें?

    वेबसाइट का यूआरएल ध्यान से जांचें

    • एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फर्जी वेबसाइट की पहचान करने का सबसे आसान तरीका उसके यूआरएल यानी वेब एड्रेस की जांच करना है। साइबर ठग असली ब्रांड के नाम में एक अक्षर बदलकर या उसके साथ अतिरिक्त शब्द जोड़कर नकली लिंक तैयार कर सकते हैं। पहली नजर में ऐसे लिंक असली वेबसाइट जैसे दिखाई देते हैं।
    • इसलिए किसी वेबसाइट पर लॉगिन करने, पेमेंट करने या बैंकिंग डिटेल्स भरने से पहले यूआरएल को ध्यान से देखना सुरक्षित माना जाता है। केवल वेबसाइट पर लॉक का निशान या HTTPS देखकर उसे पूरी तरह सुरक्षित न मानें। बेहतर है कि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट खुद टाइप करके खोलें या उसके सत्यापित स्रोत से लिंक प्राप्त करें।

    वेबसाइट की भाषा और डिजाइन पर ध्यान दें

    • इसके साथ ही कई फर्जी वेबसाइट असली कंपनियों की नकल करके बनाई जाती हैं। हालांकि, उनमें वर्तनी की गलतियां, अजीब भाषा, खराब डिजाइन या कम गुणवत्ता वाली तस्वीरें देखने को मिल सकती हैं।
    • अगर वेबसाइट पर कंपनी का लोगो धुंधला है, प्रोडक्ट की जानकारी अधूरी है या कई जगह गलतियां दिखाई दे रही हैं, तो सावधान हो जाएं। हालांकि, ध्यान रखें कि अच्छी डिजाइन वाली वेबसाइट भी फर्जी हो सकती है। इसलिए केवल इसके लुक के आधार पर भरोसा न करें।

    बहुत सस्ते ऑफर के लालच में न आएं

    अगर किसी वेबसाइट पर महंगे स्मार्टफोन, लैपटॉप या दूसरे प्रोडक्ट बाजार की कीमत से बहुत कम दाम पर मिल रहे हैं, तो खरीदारी करने से पहले जांच जरूर करें।कई बार ठग सीमित समय के ऑफर, भारी डिस्काउंट या 'अभी खरीदें, वरना मौका चला जाएगा' जैसे मैसेज के जरिए जल्दबाजी में पेमेंट करवाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बिना जांच किए भुगतान न करें। प्रोडक्ट की कीमत और ऑफर की तुलना कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय शॉपिंग प्लेटफॉर्म से करें।

    कंपनी की संपर्क जानकारी जांचें

    • किसी वेबसाइट पर खरीदारी करने से पहले उसकी संपर्क जानकारी भी देखना सुरक्षित माना जाता है। आधिकारिक पता, कस्टमर केयर नंबर, रिटर्न पॉलिसी और रिफंड से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है या नहीं, इसकी जांच करें।
    • अगर वेबसाइट पर संपर्क जानकारी गायब है, दी गई जानकारी संदिग्ध लगती है या ग्राहक सहायता का कोई भरोसेमंद तरीका नहीं मिलता, तो सतर्क रहें। जरूरत पड़ने पर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से संपर्क विवरण की पुष्टि करें।

    नकली एप की पहचान कैसे करें?

    एप के रिव्यू और परमिशन जांचें

    • किसी नए एप को डाउनलोड करने से पहले उसके डेवलपर का नाम, डाउनलोड की संख्या, यूजर रिव्यू और एप की उपलब्धता का इतिहास देखें। अगर कई यूजर्स ने धोखाधड़ी, संदिग्ध गतिविधि या निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल की शिकायत की है, तो एप डाउनलोड करने से बचें।
    • इसके अलावा, एप किन परमिशन की मांग कर रहा है, इस पर भी ध्यान दें। जैसे मान लीजिए, किसी साधारण टॉर्च एप को कॉन्टैक्ट्स या कॉल लॉग का एक्सेस मांगने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अगर एप अपने काम से असंबंधित परमिशन मांगता है, तो उसे देने से पहले सावधानी बरतें। ध्यान रखें कि ज्यादा डाउनलोड या अच्छी रेटिंग होने का मतलब यह नहीं है कि एप पूरी तरह सुरक्षित है।

    गूगल प्ले प्रोटेक्ट चालू रखें

    • एंड्रॉयड स्मार्टफोन में गूगल प्ले प्रोटेक्ट संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले एप की पहचान करने में मदद कर सकता है। यह गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किए गए एप के साथ-साथ डिवाइस पर मौजूद कुछ अन्य एप की भी जांच कर सकता है।
    • इसे चालू रखने के लिए गूगल प्ले स्टोर खोलें, अपनी प्रोफाइल पिक्चर पर टैप करें और प्ले प्रोटेक्ट के विकल्प पर जाएं। यहां उपलब्ध सेटिंग्स में जाकर एप स्कैनिंग की स्थिति जांचें।
    • प्ले प्रोटेक्ट सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत देता है, लेकिन यह हर खतरे को पहचानने की गारंटी नहीं देता। इसलिए अनजान वेबसाइट से एपीके फाइल डाउनलोड करने या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।

    ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स

    • किसी अंजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसका URL जांचें।
    • बैंकिंग डिटेल्स और पासवर्ड केवल सत्यापित वेबसाइट या आधिकारिक एप पर ही दर्ज करें।
    • किसी के साथ ओटीपी, यूपीआई, पिन या बैंकिंग पासवर्ड साझा न करें।
    • एप डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक एप स्टोर का इस्तेमाल करें।
    • जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगने वाले एप से सावधान रहें।
    • अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल न करें।
    • अपने फोन, ब्राउजर और सुरक्षा से जुड़े फीचर्स को अपडेट रखें।

    अगर गलती से फर्जी वेबसाइट पर जानकारी भर दी तो क्या करें?

    अगर आपको लगता है कि आपने किसी संदिग्ध वेबसाइट पर बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड या दूसरी संवेदनशील जानकारी साझा कर दी है, तो तुरंत कार्रवाई करें। संबंधित अकाउंट का पासवर्ड बदलें और बैंकिंग जानकारी साझा होने पर अपने बैंक से संपर्क करके जरूरी सुरक्षा कदम उठाएं। अगर यूपीआई, पिन या ओटीपी साझा किया है या अनधिकृत लेनदेन हुआ है, तो बैंक को तुरंत सूचित करें।

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