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शाओमी इंडिया ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, खाते फ्रीज करने पर रोक लगाने की अपील

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विशाल मैथिल Updated Fri, 07 Oct 2022 11:35 AM IST
सार

कंपनी ने इस साल की शुरुआत में भी इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत सक्षम प्राधिकारी से संपर्क करने का आदेश दिया था।

Karnataka High Court
Karnataka High Court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

चीनी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी शाओमी इंडिया ने एक बार फिर कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शाओमी ने 3 अक्टूबर को हाईकोर्ट मे एक और याचिका दायर की है। कंपनी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) सक्षम प्राधिकारी के 29 सितंबर, 2022 के आदेश को चुनौती दी है, जिसने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के 29 अप्रैल के जब्ती आदेश की पुष्टि की थी। अब कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को 14 अक्तूबर तक के लिए बढ़ा दिया है।



बता दें कि कंपनी ने इस साल की शुरुआत में भी इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत सक्षम प्राधिकारी से संपर्क करने का आदेश दिया था।


दरअसल, इसी साल अप्रैल में ईडी की ओर से शाओमी पर मनी लॉन्ड्रिग मामले में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली थी। ईडी ने गोरखधंधे में फेमा, 1999 के तहत कार्रवाई कर शाओमी इंडिया के बैंक खातों में जमा करीब 5,551 करोड़ रुपये जब्त कर लिए थे। ईडी ने दावा किया था कि कंपनी की ओर से विदेशों में पैसा भेजने को लेकर बैंकों को भी गलत जानकारी मुहैया कराई गई थी और यह कंपनी गलत तरीके से विदेशों में पैसा भेज रही थी, जो फेमा की धारा 4 का सीधा उल्लंघन था।

गुरुवार को जस्टिस एन एस संजय गौड़ा की अवकाश पीठ ने शाओमी की याचिका पर सुनवाई की। शाओमी ने अंतरिम आदेश मांगा था लेकिन सक्षम प्राधिकारी के आदेश की प्रति प्रस्तुत नहीं की थी और उसी से छूट देने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने चार हफ्ते में प्रमाणित प्रतियों के उत्पादन के अधीन आक्षेपित जब्ती आदेश की प्रमाणित प्रतियों को पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही वित्त मंत्रालय और प्रवर्तन निदेशालय के लिए नोटिस जारी करने का आदेश भी दिया गया था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एमबी नरगुंड और अधिवक्ता मधुकर देशपांडे ने हाईकोर्ट को बताया कि कंपनी को हाईकोर्ट से संपर्क करने के बजाय सक्षम प्राधिकारी के आदेश के खिलाफ अपीलीय प्राधिकारी से संपर्क करना था। नई याचिका में शाओमी ने सक्षम प्राधिकारी के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि सुनवाई के दौरान किसी विदेशी बैंक के प्रतिनिधि को पूछताछ की अनुमति नहीं दी गई थी। कंपनी के वकील ने यह भी तर्क दिया कि कंपनी पर फेमा की धारा 37 ए, जो कि एक कंपनी द्वारा भारत के बाहर रखी गई संपत्ति से संबंधित है पर भी याचिका लगाई गई है। 

दूसरी ओर, अधिवक्ता मधुकर देशपांडे ने प्रस्तुत किया कि कंपनी ने जब्त की गई अधिकांश राशि को पहले ही वापस ले लिया था। कंपनी के अकाउंट में पहले के 5,551.27 करोड़ रुपये के मुकाबले अब केवल 1,900 करोड़ रुपये ही थे। बता दें कि कंपनी की याचिका के बाद हाईकोर्ट ने कंपनी को अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए इन पैसों का उपयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन रॉयल्टी का भुगतान करने के लिए इसका इस्तेमाल करने से मना किया था।

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