X Corp: टेकडाउन मामले में एक्स कॉर्प ने जमा किया आधा जुर्माना, कर्नाटक हाई कोर्ट को किया सूचित

विशाल मैथिल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीविशाल मैथिल
Wed, 13 Sep 2023 08:15 PM IST
सार

कंपनी पर यह जुर्माना, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के आदेशों का पालन नहीं करने को लेकर लगाया गया था।

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X Corp deposits 25 lakh of fine amount in Karnataka High Court on Takedown Order Compliance
X Corp - फोटो : Bloomberg

    विस्तार

    माइक्रो ब्लॉगिंग साइट एक्स कॉर्प (पूर्व में ट्विटर) ने बुधवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के बाद जुर्माने की आधी राशि यानी 25 लाख रुपये जमा करने की जानकारी दी। गौरतलब है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 10 अगस्त को एक्स कॉर्प को सात दिन में जुर्माने की आधी रकम (यानी 25 लाख रुपये) जमा करने के आदेश दिए थे। कंपनी पर यह जुर्माना, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के आदेशों का पालन नहीं करने को लेकर लगाया गया था।

    सात दिन में आधा जुर्माना जमा करने का मिला था आदेश

    दरअसल, कंपनी ने 14 अगस्त तक 50 लाख रुपये जमा करने के 30 जून के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी। जिसके बाद खंडपीठ ने 10 अगस्त को याचिका पर सुनवाई करते हुए कंपनी को अपील की अनुमति देने और अपनी प्रामाणिकता दिखाने के लिए जुर्माने की आधी राशि जमा करने का निर्देश दिया था।

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    उच्च न्यायालय से खारिज हुई थी ट्विटर की याचिका

    इससे पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए एक्स कॉर्प की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें प्लेटफॉर्म पर कुछ आपत्तिजनक अकाउंट और ट्वीट्स को ब्लॉक करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने सोशल मीडिया कंपनी से कहा था कि सरकार के पास ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की शक्ति है। न्यायालय ने ट्विटर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, 10 अगस्त 2023 के अपने फैसले में न्यायालय ने इस जुर्माने पर रोक लगा दी थी लेकिन कंपनी को इसका 50 फीसदी सात दिन के अंदर जमा करने का आदेश दिया था।

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    यह है पूरा मामला

    ट्विटर ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी किए गए टेक डाउन आदेशों के खिलाफ याचिका दायर की थी। ट्विटर ने जून 2022 में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्वीट्स, अकाउंट्स और यूआरएल को हटाने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    याचिका में ट्विटर ने दावा किया था कि केंद्र को उन ट्विटर हैंडल के मालिकों को नोटिस जारी करने की आवश्यकता थी जिनके खिलाफ ट्विटर पर अकाउंट ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए थे। ट्विटर ने यह भी दावा किया था कि उसे अपने इन अकाउंट्स को टेकडाउन के बारे में जानकारी देने से भी रोका गया था।

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