Computer: सिलिकॉन को कहें अलविदा! वैज्ञानिकों ने 2D मैटेरियल से बनाया दुनिया का पहला कंप्यूटर
Computer Without Silicon:
पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने सिलिकॉन की जगह 2D मैटेरियल्स से दुनिया का पहला कंप्यूटर तैयार किया है। यह तकनीकी प्रगति भविष्य में छोटे और अधिक ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए नया रास्ता खोल सकती है।

विस्तार
तकनीक की दुनिया में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अमेरिका की पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसा कंप्यूटर तैयार किया है जिसमें सिलिकॉन का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह कंप्यूटर पूरी तरह से 2D मैटेरियल्स से बना है और यह दिखाता है कि भविष्य में सिलिकॉन की निर्भरता को खत्म किया जा सकता है।
उर्जा बचाएगा यह कम्प्यूटर
यह प्रयोग 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित एक शोध पत्र में सामने आया है। इस कंप्यूटर को 'CMOS' तकनीक से तैयार किया गया है, जो इलेक्ट्रॉनिक सर्किट डिजाइन के लिए व्यापक रूप से उपयोग में ली जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम ऊर्जा की खपत करता है और इसे अत्यधिक छोटे स्तर पर स्केल किया जा सकता है।
प्रमुख शोधकर्ता प्रो. सप्तर्षि दास ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि 2D मैटेरियल्स जैसे मोलिब्डेनम डाइसल्फाइड (MoS₂) और टंगस्टन डाइसीलीनाइड (WSe₂) का प्रयोग कर यह कंप्यूटर बनाया गया है। इन मैटेरियल्स को दो इंच की वेफर पर उगाया जा सकता है, जो औद्योगिक स्तर पर भी लागू करने योग्य हैं।

2D मैटेरियल होगा भविष्य
दास ने यह भी कहा कि आज के समय में जब डिवाइसेज छोटे होते जा रहे हैं और सिलिकॉन अपने प्रदर्शन की सीमा तक पहुंच चुका है। सिलिकॉन की मोटाई और लीक करंट जैसे कारक अब बाधा बन रहे हैं, वहीं 2D मैटेरियल्स की परमाणु-स्तरीय पतली बनावट भविष्य के लिए समाधान बन सकती है।
इस कंप्यूटर को फिलहाल केवल एक इंस्ट्रक्शन पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसका नाम "रिवर्स सब्ट्रैक्ट, स्किप इफ बॉरो" रखा गया है। हालांकि यह एक बुनियादी कंप्यूटर है, लेकिन इससे जोड़, घटाव और गुणा जैसे कार्य भी संभव हो सकते हैं।
इस तकनीक की गति फिलहाल 25 किलोहर्ट्ज है और यह 3 वोल्ट से कम पावर पर काम करती है, जिससे ऊर्जा की खपत बेहद कम होती है।
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के प्रोफेसर मयंक श्रीवास्तव ने इस खोज को "सेमीकंडक्टर तकनीक का मील का पत्थर" करार दिया है। उन्होंने कहा कि 2D मैटेरियल्स सिलिकॉन की सीमाओं को पार कर अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स को दिशा दे सकते हैं।
भविष्य में ले सकती है व्यावसायिक रूप
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर लाने के लिए कई अवसंरचनात्मक चुनौतियों को पार करना होगा। इसमें निर्माण, विश्वसनीयता और बड़े स्तर पर उत्पादन जैसे पहलुओं पर काम किया जाना बाकी है।
इस बीच, भारत सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय भी 2D मैटेरियल्स पर अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट्स को फंड करने की योजना पर विचार कर रहा है।