AI: अब वाई-फाई से बनेगा कमरे का नक्शा, शोधकर्ताओं ने विकसित की अनोखी तकनीक
जापानी शोधकर्ताओं ने लेटेंट सीएसआई तकनीक विकसित की है, जो वाई-फाई सिग्नल्स की मदद से कमरे की सटीक और हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें बना सकती है। जानें पूरा अपडेट।

विस्तार
टोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए वाई-फाई सिग्नल्स की मदद से कमरे की सटीक और हाई-रेजोल्यूशन तस्वीर बनाई जा सकती है। इस तकनीक को “लेटेंट सीएसआई (LatentCSI)” नाम दिया गया है, जो वाई-फाई डेटा को एआई के जरिए एक डिजिटल पेंटब्रश में बदल देती है।वाई-फाई सिग्नल्स कैसे मदद करते हैं?
हमारे आसपास मौजूद वाई-फाई डिवाइस लगातार सिग्नल्स भेजते और प्राप्त करते रहते हैं। ये सिग्नल्स सिर्फ डिवाइस तक ही नहीं जाते, बल्कि दीवारों, फर्नीचर और कमरे में मौजूद अन्य चीजों से टकराकर भी वापस आते हैं। इस डेटा को चैनल स्टेट इंफॉर्मेशन (CSI) कहा जाता है। पहले सीएसआई डेटा से सिर्फ कमरे का एक धुंधला नक्शा बनाया जा सकता था, लेकिन अब एआई ने इसे और ज्यादा सटीक बना दिया है।लेटेंटसीएसआई और स्टेबल डिफ्यूजन 3 का कमाल
शोधकर्ताओं ने सीएसआई डेटा को लेटेंट स्पेस में बदला और फिर इसे स्टेबल डिफ्यूजन 3 जैसे एडवांस एआई मॉडल से जोड़ दिया। लेटेंट स्पेस इमेज का एक कंप्रेस्ड फॉर्म होता है जिसे एआई बेहतर तरीके से प्रोसेस करता है। इस प्रोसेस से अब कमरे की फोटो-रीलिस्टिक तस्वीर तैयार हो सकती है।रियल-टाइम इमेजिंग और मूवमेंट ट्रैकिंग
लेटेंटसीएसआई की मदद से न सिर्फ कमरे की सटीक तस्वीर मिलती है, बल्कि यह तकनीक कमरे में मौजूद लोगों की स्थिति और उनकी मूवमेंट भी ट्रैक कर सकती है। यानी अगर कोई व्यक्ति कमरे में घूम रहा है, तो उसकी रियल-टाइम लोकेशन भी इसमें दिखाई जा सकती है।प्राइवेसी पर सवाल
इस तकनीक से सुरक्षा और निगरानी के नए रास्ते खुल सकते हैं, लेकिन साथ ही प्राइवेसी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर लागू होती है, तो वाई-फाई सिग्नल्स का इस्तेमाल सर्विलांस के लिए भी किया जा सकता है।फिलहाल रिसर्च लेवल पर
अभी यह तकनीक केवल रिसर्च स्टेज में है और सिर्फ उन्हीं कमरों पर काम कर सकती है, जिनकी ट्रेनिंग पहले से एआई को दी गई हो। यानी किसी भी नए कमरे का नक्शा तुरंत बनाना फिलहाल संभव नहीं है। लेटेंटसीएसआई तकनीक एआई और वाई-फाई के मेल से भविष्य की इमेजिंग का नया अध्याय लिख रही है। यह तकनीक एक ओर जहां कमरे का सटीक डिजिटल नक्शा पेश करती है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेसी को लेकर चिंता भी बढ़ा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तकनीक कितनी आगे जाती है और इसका इस्तेमाल किस हद तक सुरक्षित रहेगा।