WhatsApp की जासूसी: सरकार ने पूछा- पहले क्यों नहीं बताया, कंपनी ने कहा- मई में ही सौंपी थी रिपोर्ट

प्रदीप पांडे
टेक डेस्क, अमर उजालाप्रदीप पांडे
Sat, 02 Nov 2019 10:54 AM IST
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WhatsApp Spyware attack Govt says not alerted on breach whatsapp says it did in May
whatsapp - फोटो : whatsapp

    व्हाट्सएप के जरिए भारत समेत दुनियाभर के 1,400 पत्रकारों और एक्टिविस्ट की जासूसी का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। व्हाट्सएप के जरिए जासूसी की बात सामने आने पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस संबंध में व्हाट्सएप से जानकारी मांगी थी। सरकार की ओर से व्हाट्सएप से पूछा गया था कि उसने जासूसी के बारे में पहले क्यों नहीं बताया, वहीं व्हाट्सएप ने अपने जवाब में कहा है कि उसने साल 2019 की मई में ही सरकार को इसके बारे में जानकारी दी थी।

    समाचार एजेंसी रॉयटर की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाट्सएप ने कहा है, 'इसी साल मई में में हमें भारत के कुछ लोगों के व्हाट्सएप अकाउंट के साथ छेड़छाड़ की सूचना मिली थी। इसकी जानकारी मिलते ही हमने बग को फिक्स करने का काम शुरू कर दिया। साथ ही हमने भारत सरकार को भी इसके बारे में जानकारी दी थी।' व्हाट्सएप ने कहा कि वह सरकार के साथ मिलकर इस समस्या का हल निकालेगा। वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाट्सएप के इस जवाब में सरकार का कहना है कि मई में उसे व्हाट्सएप से जो जानकारी मिली थी, उसकी भाषा बहुत 'मुश्किल और टेक्निकल' थी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि व्हाट्सएप ने पिगासस सॉफ्टवेयर के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी थी। इंडियन एक्सप्रेस ने यह रिपोर्ट व्हाट्सएप और सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखी है। बता दें कि जासूसी के लिए पिगासस सॉफ्टवेयर का ही इस्तेमाल हुआ है।

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    क्या है व्हाट्सएप से जासूसी का मामला?

    hacker
    hacker - फोटो : Hacker Noon

    व्हाट्सएप ने अमेरिकी कोर्ट में इस्रायली फर्म एनएसओ के खिलाफ मुकदमा करते हुए कहा है कि साल 2019 की मई में भारत के कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप चैट की जासूसी हुई है। मुकदमे में दी गई जानकारी के मुताबिक एक इजरायली फर्म ने एक स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ्टवेयर) के जरिए भारतीय यूजर्स की जासूसी की है। जिन लोगों के व्हाट्सएप की हैकिंग हुई है या जासूसी हुई है उनमें मुख्य रूप से मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और पत्रकार हैं, जो आदिवासियों और दलितों के लिए अदालत में सरकार से लड़ रहे थे या उनकी बात कर रहे थे।

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    जासूसी के लिए किस सॉफ्टवेयर का हुआ इस्तेमाल?

    pegasus
    pegasus - फोटो : kaspersky

    इस्रायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप (NSO) पर इस हैकिंग का आरोप लगा है। खबर है कि कंपनी ने इसके लिए Pegasus नाम के स्पाईवेयर (सॉफ्टवेयर) का इस्तेमाल किया है। पिगासस सॉफ्टवेयर के जरिए दुनियाभर के करीब 1,400 लोगों को शिकार बनाया गया है। बता दें कि पिगासस सॉफ्टवेयर साल 2016 में उस समय चर्चा में आया था जब एंटी वायरस सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी फर्म kaspersky ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि पिगासस एक बहुत ही बड़ा जासूसी सॉफ्टवेयर है और इसकी मदद से आईफोन-आईपैड से लेकर किसी भी एंड्रॉयड फोन को हैक किया जा सकता है।

    कौन-कौन लोग हुए शिकार

    whatsapp pegasus attack
    whatsapp pegasus attack - फोटो : citizenlab

    अभी तक सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के 10 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी जासूसी हुई है। यह बात उन्होंने व्हाट्सएप के हवाले से कही है। जिन लोगों की जासूसी हुई है उनमें बेला भाटिया, भीमा कोरेगांव केस में वकील निहाल सिंह राठौड़, जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित एक्टिविस्ट डिग्री प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुम्बडे, शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली के आशीष गुप्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सरोज गिरी, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और राजीव शर्मा के नाम भी शामिल हैं।

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