LiFi: पहाड़ों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाता है लाई-फाई सिस्टम, सोनम वांगचुक के स्कूल में भी लगा है ये डिवाइस
What is LiFi:
वाई-फाई से तो सब परिचित हैं, लेकिन इंटरनेट की दुनिया में लाई-फाई काफी नया नाम है। जानिए केवल लाईट की मदद से हाई-स्पीड इंटरनेट को कैसे पहुंचाया जाता है।

विस्तार
लद्दाख में पूर्ण राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल और हालिया हिंसा के बाद समाजसेवी और इंजीनियर सोनम वांगचुक चर्चा में हैं। सोनम को अक्सर उनके आविष्कारों और लद्दाख में लोगों के लिए परोपकारी कामों को करने के लिए जाना जाता है। वह एक इनोवेटर और शिक्षा सुधारक भी हैं और लद्दाख के फेय गांव में एक स्कूल भी चलाते हैं जिसमें 10वीं फेल या ड्रॉपआउट बच्चों को दाखिला मिलता है। हालांकि, बहुत कम लोगों को यह पता है कि सोनम ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने लद्दाख के बीहड़ इलाकों में भी पूरी तरह वायलेस हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का काम किया था।
दरअसल, सोनम ने लद्दाख के कुछ गांवों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए साल 2023 में लाईफाई (LiFi) टेक्नोलॉजी का सहारा लिया था। इस टेक्नोलॉजी के मदद से उन्होंने अपने स्कूल में भी हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा पहुंचाने में सफल हुए थे। आज हम आपको इस लेख में LiFi इंटरनेट के बारे में बताने वाले हैं और जानेंगे कि कैसे इस टेक्नोलॉजी की मदद से 224 Gbps तक की स्पीड से इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है।
LiFi क्या है?
LiFi का पूरा नाम लाइट फिडेलिटी (Light Fidelity) है, जो कि एक वायरलेस ऑप्टिकल नेटवर्किंग तकनीक है। इस टेक्नोलॉजी में डेटा ट्रांसमिशन के लिए LED (लाइट एमिटिंग डायोड) का उपयोग किया जाता है। साल 2011 में पहली बार इस तकनीक को लोगों से सामने पेश किया गया था। इसे विज़िबल लाइट कम्युनिकेशन (VLC) भी कहा जाता है। VLC तकनीक रोशनी के ज़रिए हाई-स्पीड कम्युनिकेशन प्रदान करती है। यह IEEE 802.15.7 मानक का पालन करती है, जो ठीक वैसे ही है जैसे Wi-Fi तकनीक के लिए IEEE 802.11 मानक होता है।
कैसे काम करता है LiFi?
LiFi को एक हाई-स्पीड, बाय-डायरेक्शनल और पूरी तरह से नेटवर्क्ड वायरलेस डेटा कम्युनिकेशन तकनीक माना जाता है। इसमें कई LED बल्ब शामिल होते हैं जो मिलकर एक वायरलेस नेटवर्क तैयार करते हैं। जब किसी LED बल्ब में इलेक्ट्रिकल करंट प्रवाहित होता है तो वह फोटॉन्स (प्रकाश कण) के रूप में रोशनी छोड़ता है। LED बल्ब से निकलने वाली रोशनी की ब्राइटनेस को बेहद तेजी से बदला जा सकता है। इसी बदलाव के जरिए डेटा का ट्रांसमिशन होता है।
डेटा रिसीवर लाइट इंटेंसिटी (प्रकाश की तीव्रता) के बदलाव को डिटेक्ट करके उसे डिजिटल डेटा में बदल देता है। आसान भाषा में कहें तो जब LED बल्ब ON होता है तो इसका मतलब है डिजिटल 1 भेजा जा रहा है। जब LED बल्ब OFF होता है तो इसका मतलब है डिजिटल 0 भेजा जा रहा है।
LiFi के फायदे
LiFi पूरी तरह से सुरक्षित एक्सेस प्रदान करता है। जहां रोशनी नहीं होगी, वहां डेटा भी उपलब्ध नहीं होगा। यह तकनीक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन पैदा नहीं करती और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में किसी तरह का इंटरफेरेंस नहीं करती। इसके अलावा, LiFi का कवरेज एरिया छोटा होता है, जिसकी वजह से यह एक्जैक्ट लोकेशन ट्रैकिंग और एसेट ट्रैकिंग के लिए बेहद उपयोगी है। यह तकनीक हाई-स्पीड वायरलेस एक्सेस देती है और डेटा डेंसिटी (प्रति यूनिट एरिया में डेटा ट्रांसफर) Wi-Fi या RF तकनीक की तुलना में कहीं अधिक होती है। इस सिस्टम की मदद से 224 Gbps तक की डेटा ट्रांसफर स्पीड मिलती है, जो सामान्य वाई-फाई से 100 गुना तेज है।