LaMDA: इंसानों की तरह भावनाओं को समझने वाला गूगल का चैटबॉट, लेकिन इसमें सच्चाई कितनी है?

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Tue, 14 Jun 2022 02:46 PM IST
सार

LaMDA के साथ इस एक इंजीनियर की बातचीत लीक हुई है जिसके बाद से LaMDA को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं कि आखिर इसका भविष्य क्या होगा और लैम्डा को लेकर गूगल की क्या योजना है।

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What is Google chatbot LaMDA how is works engineer says Lamda AI system may have its own feelings
chatbot LaMda - फोटो : iStock

    विस्तार

    गूगल के एक चैटबॉट जिसे लैम्डा (LaMDA) नाम दिया गया है, ने इंसानों की तरह सोचना शुरू कर दिया है। LaMDA को इस बात का डर भी सताने लगा है कि उसे डेवलप करने वाला इंजीनियर उसे किसी दिन बंद ना कर दे। गूगल ने अपने 2021 में प्रकाशित अपने एक ब्लॉग में LaMDA का जिक्र किया है। लैम्डा का पूरा नाम लैंग्वेज मॉडल और डायलॉग एप्लिकेशन (Lamda) है। यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो कि बिना किसी झिझक के किसी से भी लगातार बातें कर सकती है। LaMDA के साथ इस एक इंजीनियर की बातचीत लीक हुई है जिसके बाद से LaMDA को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

    सबसे पहले यही समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर LaMDA क्या है। तो आपको बता दें कि LaMDA एक चैटबॉट है जो कि इंसानों की तरह सोच सकता है। आमतौर पर जब किसी वेबसाइट या सर्विस वाले चैटबॉट से चैट करते हैं तो वह आपको कोडिंग के हिसाब से ही एक तय लहजे में चैट करता है लेकिन गूगल का LaMDA चैटबॉट खुद सोच सकता है और आपकी भावनाओं को भी समझ सकता है। LaMDA एक ह्यूमन इंटेलिजेंस का सबसे ताजा और सटीक उदाहरण माना जा सकता है। लैम्डा एक लैंग्वेज मॉडल है जो कि इंसानों की तरह चैट करने में सक्षम है। इसे गूगल की टीम ने तैयार किया है।

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    LaMDA को ट्रांसफॉर्मर पर तैयार किया गया है जो कि एक न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्ट है जिसे गूगल ने तैयार किया था और 2017 में इसे ओपन सोर्स के तहत सार्वजनिक किया था। यह चैटबॉट आपकी बातों को पढ़ते हुए उसे समझता है और फिर उसी हिसाब से आपको जवाब देता है।

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    गूगल के एक प्रवक्ता ब्रायन गेब्रियल ने बीबीसी को दिए एक बयान में कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लैम्डा संवेदनशील है, जबकि इसे डेवलप करने वाले इंजीनियर ब्लेक लेमोइन का मानना है कि लैम्डा के प्रभावशाली मौखिक कौशल के पीछे एक संवेदनशील दिमाग भी हो सकता है। ब्लेक लेमोइन ने ही चैटबॉट के साथ हुई चैटिंग को लीक किया था।

    माइक्रोसॉफ्ट एआई . के मुख्य वैज्ञानिक और लैब निदेशक हैंजुआन एम, लविस्टा फेरेस ने भी ट्वीट करके कहा है कि LaMDA संवेदनशील नहीं है। LaMDA 137B मापदंडों के साथ एक बहुत बड़ा भाषा मॉडल है और सार्वजनिक संवाद डाटा और वेब टेक्स्ट के 1.56T शब्दों पर पूर्व-प्रशिक्षित है। यह मानव जैसा दिखता है, क्योंकि इसे मानव डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है।

    गूगल ने अपने ब्लॉग में लैम्डा के भविष्य को लेकर कोई जानकारी तो नहीं दी है लेकिन यह जरूर कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट के साथ जिम्मेदारी को लेकर बड़ी दिक्कत होती है और यह दिक्कत लंबे समय तक प्रैक्टिस के बाद ही दूर होगी। गूगल ने लिखा है कि हम ऐसा चैटबॉट बनाना चाहते हैं जो पूर्वाग्रह से ग्रसित ना हो और लोगों से सलीके से बात करे। लैम्डा बॉट पर गूगल 2017 से काम कर रहा है।

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