Airtel vs Vi: एयरटेल के 'प्रायोरिटी प्लान' पर वोडाफोन आइडिया का तंज, कहा- 'हमारे लिए सभी ग्राहक बराबर'
Airtel Priority Postpaid:
वोडाफोन आईडिया (Vi) ने एयरटेल के नए 'प्रायोरिटी पोस्टपेड 5G प्लान्स पर सोशल मीडिया के जरिए निशाना साधा है। Vi ने कहा कि उसके नेटवर्क पर सभी यूजर्स को बराबर प्राथमिकता मिलती है, जबकि एयरटेल के प्रीमियम प्लान्स को लेकर नेट न्यूट्रैलिटी पर बहस छिड़ गई है। एयरटेल का दावा है कि उसकी 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक से प्रीपेड यूजर्स की सर्विस प्रभावित नहीं होगी। वहीं Vi अपने नेटवर्क विस्तार और 5G कवरेज को बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की तैयारी कर रही है।

विस्तार
टेलीकॉम सेक्टर में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। वोडाफोन आइडिया (Vi) ने सोशल मीडिया पर एयरटेल (Airtel) के नए 'प्रायोरिटी पोस्टपेड' प्लान पर इशारों-इशारों में तंज कसा है। Vi ने ग्राहकों से अपने नेटवर्क पर स्विच करने की अपील करते हुए कहा है कि वह किसी खास को नहीं, बल्कि अपने सभी ग्राहकों को बराबर अहमियत देता है।
क्या है एयरटेल का प्रायोरिटी पोस्टपेडप्लान?
एयरटेल ने 19 मई को अपना प्रायोरिटी पोस्टपेड प्लान लॉन्च किया था। कंपनी का दावा है कि इस प्लान वाले ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी लगातार फास्ट इंटरनेट स्पीड मिलेगी।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इसके लिए एयरटेल 5G की नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें नेटवर्क के एक हिस्से को खास तौर पर इन प्रीमियम ग्राहकों के लिए अलग कर दिया जाता है।
Vi का जवाब: 'सबको इक्वल नेटवर्क का वादा'
एयरटेल के इस कदम के बाद Vi ने सोशल मीडिया पर एक कैंपेन शुरू किया है। Vi ने अपने पोस्ट में लिखा: 'ना किसी को कम ना ज्यादा, सबको बराबर नेटवर्क का वादा। स्ट्रॉन्ग नेटवर्क सबका हक। चेंज टू वीआई'
Vi ने यह भी साफ किया कि उनके लिए हर ग्राहक प्राथमिकता है। कंपनी ने अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा:
- नेटवर्क मजबूत करने के लिए 2,20,000 से ज्यादा नए टावर जोड़े गए हैं।
- Vi 5G का विस्तार अब 110 से ज्यादा शहरों में हो चुका है (जबकि एयरटेल का 5G पूरे भारत में है)।
- नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए कंपनी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का इस्तेमाल कर रही है।
- कंपनी नेटवर्क सुधारने पर 45,000 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
क्या इससे नेट न्यूट्रेलिटी खतरे में है?
इस नए प्लान ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह नेट न्यूट्रेलिटी (इंटरनेट पर सबको समान स्पीड और अधिकार) के नियमों का उल्लंघन है? भाजपा नेता निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और आईटी पर संसदीय स्थायी समिति ने भी इस पर चिंता जताई है। समिति का मानना है कि ऐसे प्लान्स से करोड़ों सामान्य प्रीपेड ग्राहकों के अधिकारों के साथ समझौता हो सकता है।
एयरटेल की सफाई और जियो का रुख
एयरटेल का क्या कहना है?
संसदीय समिति के सामने अपना बचाव करते हुए एयरटेल ने कहा है कि उनका नया फीचर किसी भी नियम को नहीं तोड़ता।
- एयरटेल के मुताबिक, इससे उनके 34.4 करोड़ प्रीपेड यूजर्स की सर्विस क्वालिटी में कोई कमी नहीं आएगी।
- कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर 5G की इस बेहतरीन तकनीक (स्लाइसिंग) के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई, तो इससे भारत में भविष्य के 6G विकास पर बुरा असर पड़ेगा।
जियो की राय
दूसरी तरफ, रिलायंस जियो का मानना है कि इस तरह की कोई भी सर्विस लॉन्च करने से पहले, दूरसंचार विभाग (DoT) और सरकार को इसकी अच्छे से जांच करनी चाहिए कि कहीं यह नेट न्यूट्रेलिटी के नियमों के खिलाफ तो नहीं है।