Cowin: IRCTC से भी बदतर हो गया है कोविन पोर्टल, बुकिंग से पहले स्लॉट खाली, लॉगिन करते ही सब फुल
कोविन पोर्टल को स्मार्टफोन यूजर्स को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, लेकिन देश में जो करीब 55 करोड़ फीचर फोन यूजर्स हैं उनके बारे में नहीं सोचा गया है।

विस्तार
28 अप्रैल को देश में बड़े जोर-शोर के साथ 18-45 साल के लोगों के लिए वैक्सीन लगाने का एलान किया गया, लेकिन रजिस्ट्रेशन शुरू होते ही कोविन पोर्टल क्रैश हो गया। कुछ लोग रजिस्ट्रेशन कराने में सफल रहे लेकिन आज 18 दिन बाद भी स्लॉट के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कोविन पोर्टल पर 18-45 साल वालों के लिए बुकिंग स्लॉट तो दिख रहा है लेकिन लॉगिन करके बुकिंग करने पर सारे स्लॉट गायब हो जा रहे हैं। सरकार के कोविन पोर्टल की हालत आईआरसीटीसी की वेबसाइट जैसी हो गई है। जहां तत्काल टिकट बुकिंग से पहले तो सीट खाली रहती हैं लेकिन जैसे ही बुकिंग शुरू होती है तो वेबसाइट क्रैश हो जाती है या फिर पेमेंट अटक जाता है। कोविन पोर्टल को देखकर ऐसा लग रहा है कि सरकार और डेवलपर्स को इस बात का इल्म ही नहीं था कि यह पोर्टल कितनी ट्रैफिक को हैंडल करेगा। किसी का ओटीपी नहीं आ रहा है तो किसी को स्लॉट नहीं मिल रहा।
रात 8 बजे के बाद बुकिंग
सरकार के कोविन पोर्टल की तारीख सुननी और पढ़नी है तो आप सोशल मीडिया पर एक नजर देख लीजिए आपको पता चलेगा कि कोरोना जैसी भयावह महामारी से निपटने के लिए पोर्टल पर किस तरह का मजाक चल रहा है। कोविन पोर्टल पर कोई ओटीपी के लिए परेशान है तो कोई स्लॉट के लिए है। आपको जानकर हैरानी होगी कि कोविन पोर्टल पर दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। ये दलाल लोगों से पैसे लेकर उन्हें स्लॉट दिला रहे हैं, लेकिन यहां यह भी बात सोचने वाली है कि जब वैक्सीन के लिए एक कोड की जरूरत पड़ रही है तब यह दलाल गैंग कैसे काम कर रहा है। सोशल मीडिया पर आपको ऐसे हजारों पोस्ट मिल जाएंगे जिनमें लोग बता रहे हैं कि रात के 8 बजे के बाद कोविन पोर्टल अपडेट किया जा रहा है और उसके बाद ही स्लॉट की जानकारी लोगों को मिल पा रही है।
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स्लॉट है खाली लेकिन समय का विकल्प नहीं
कोविन पोर्टल की हालत ऐसी हो गई है कि इसमें बग भी आने लगे हैं और उन्हें दूर भी नहीं किया जा रहा है। कोविन पोर्टल पर स्लॉट बुकिंग के लिए पहले लॉगिन करना होता है और फिर वैक्सीनेशन सेंटर को सेलेक्ट करने के बाद टाइम स्लॉट चुनना होता है लेकिन अब टाइम स्लॉट चुनने का नोटिफिकेशन तो मिल रहा है लेकिन पोर्टल पर कोई टाइम स्लॉट ही नहीं दिखा रहा है। एक यूजर की शिकायत के बाद अमर उजाला ने पटना के हेल्पलाइन नंबर पर बात की। एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की कि कोविन पोर्टल में स्लॉट टाइमिंग की समस्या तकनीकी कारणों से आ रही है। आपको थोड़ा इंतजार करना चाहिए। जब अधिकारी से यह सवाल पूछा गया कि पिछले तीन दिनों से इंतजार ही किया जा रहा है और कितना इंतजार करना होगा तो अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में हम ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते। कोविन पोर्टल के लिए भी एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जो कि 1075 है। इस नंबर पर कॉल लगता ही नहीं है। हमने दो दिनों तक प्रतिदिन करीब 10 बार इस नंबर पर बात करने की कोशिश की लेकिन हम असफल रहे।
वैक्सीन लगाने में लग जाएंगे सालों
यदि कोविन पोर्टल की यही हालत रही तो देश के युवाओं को पूरी तरह से वैक्सीन लगाने में कई साल लग जाएंगे। कोविन पोर्टल को स्मार्टफोन यूजर्स को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, लेकिन देश में जो करीब 55 करोड़ फीचर फोन यूजर्स हैं उनके बारे में नहीं सोचा गया है। इसके अलावा करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई फोन हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनके घर में एक ही फीचर फोन या स्मार्टफोन है, ऐसे लोगों का रजिस्ट्रेशन कैसे होगा और वैक्सीन कैसे लगेगी। फीचर फोन यूजर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार को USSD कोड आधारित रजिस्ट्रेशन शुरू करना चाहिए।
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