अमेरिका में फेसबुक पर कसा कानून का फंदा, कई भागों में बंट सकती है कंपनी
गूगल पर इल्जाम है कि उसने ऑनलाइन सर्च और सर्च विज्ञापन के मामलों में प्रतिस्पर्धा को रोकने की कोशिश की है। इसके पहले ऐसा मामला 1990 के दशक में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के खिलाफ शुरू हुआ था...

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फेसबुक पर अमेरिकी कानून का फंदा और कस गया है। अमेरिका की संघीय और कई राज्य सरकारों ने अब बाजार में अनुचित तरीके से प्रतिस्पर्धा को रोकने की कोशिशों के मामले में कंपनी पर औपचारिक मुकदमा ठोक दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने डिजिटल बाजार में अपने वर्चस्व का दुरुपयोग किया है। मुकदमे में गुजारिश की गई है कि फेसबुक और उसके दूसरे प्लेटफॉर्म- इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप को अलग-अलग कर दिया जाए। यानी इस कंपनी को विभाजित कर दिया जाए। यह मुकदमा अमेरिका के एंटीट्रस्ट कानून के तहत दायर हुआ है।
एंटीट्रस्ट कानूनों का मकसद उपभोक्ताओं को कंपनियों के शोषक व्यवहार से बचाना होता है। इनका उद्देश्य यह होता है कि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे। इस कानून के तहत कंपनियों की संदिग्ध कारोबारी गतिविधियों, बाजार आवंटन में गड़बड़ी, निविदा में धांधली, कीमत तय करने में धांधली और बाजार में एकाधिकार कायम करने जैसी कोशिशों के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। अगर इस मुकदमे में फेसबुक कंपनी हार गई, तो इसके स्वरूप में बुनियादी बदलाव आ जाएगा।
ताजा मुकदमे के बाद फेसबुक दूसरी ऐसी बड़ी डिजिटल कंपनी बन गई है, जिसे अमेरिका की संघीय और राज्य सरकारें हाल में एंटीट्रस्ट कानून के उल्लंघन के आरोप में कोर्ट में ले गई हैं। बीते अक्टूबर में अमेरिका की संघीय सरकार और 11 राज्यों ने ऐसा ही एक मुकदमा गूगल के खिलाफ दायर किया था। गूगल पर इल्जाम है कि उसने ऑनलाइन सर्च और सर्च विज्ञापन के मामलों में प्रतिस्पर्धा को रोकने की कोशिश की है। इसके पहले ऐसा मामला 1990 के दशक में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसका फैसला इस सदी के आरंभ में आया। तब कोर्ट के आदेश से माइक्रोसॉफ्ट कंपनी को दो भागों में विभाजित कर दिया गया था।
फिलहाल अमेरिका में सिर्फ फेसबुक और गूगल ही सरकारों के निशाने पर नहीं हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने आईटी सेक्टर की लगभग हर बड़ी कंपनी द्वारा प्रतिस्पर्धा रोकने की कोशिश की जांच हाल में की है। इसके तहत एपल कंपनी के आईओएस एप पर नियंत्रण और अमेजन कंपनी द्वारा स्वतंत्र विक्रेताओं से गलत व्यवहार की जांच की गई है।
कानून के जानकारों के मुताबिक फेसबुक के खिलाफ दायर मामले में सरकारों को कोर्ट में यह साबित करना होगा कि इस कंपनी के गलत आचरण से उपभोक्ताओं पर खराब असर पड़ा या बाजार में प्रतिस्पर्धा को रोका गया। एंटीट्रस्ट विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री हेल सिंगर ने एक टीवी चैनल से कहा- उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचने की बात सिर्फ कीमत के संदर्भ में नहीं देखी जाती है। बल्कि इसमें उनकी निजता के हनन जैसे सवाल भी आते हैं।
दायर मामले में अभियोग पक्ष ने कहा है कि निजी सोशल नेटवर्किंग का आज करोड़ों अमेरिकियों की जिंदगी में महत्व हो गया है। फेसबुक ने अपने एकाधिकार को मजबूत करने और उसे जारी रखने की कोशिशें की हैं, जिससे उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धा का लाभ नहीं मिल सका है। मुकदमे का मकसद फेसबुक के प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण को रोकना और बाजार में प्रतिस्पर्धा बहाल करना है, ताकि आविष्कार की प्रवृत्ति और मुक्त होड़ फूल-फल सकें।
फेसबुक के खिलाफ लगे आरोप मुख्य रूप से उसके इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप खरीदने से जुड़े हैं। फेसबुक ने 2012 में इंस्टाग्राम को एक अरब डॉलर में खरीदा था। 2014 में उसने व्हाट्सएप को 19 अरब डॉलर में खरीद लिया। अभियोजकों का कहना है कि फेसबुक कंपनी एक दशक से बाजार पर अपने वर्चस्व और एकाधिकार का इस्तेमाल छोटे प्रतिस्पर्धियों को कुचलने और उन्हें होड़ से बाहर करने में करती रही है। उसने विशाल मात्रा में डाटा और पैसा इकट्ठा किया है। इससे वह बाजार में एक खतरा बन गई है।
फेसबुक ने कहा है कि इस मुकदमे में अपना बचाव करने के लिए उसके पास मजबूत दलीलें हैं। उसने कहा है कि लोग और छोटे कारोबारी फेसबुक की मुफ्त सेवाएं और विज्ञापनों का इस्तेमाल इसलिए करते हैं, क्योंकि फेसबुक के एप और सेवाएं उन्हें अधिकतम मूल्य प्रदान करती हैं। गौरतलब है कि फेसबुक के विभिन्न प्लैटफॉर्म और एप का इस्तेमाल आज दुनिया में तीन अरब से ज्यादा लोग कर रहे हैँ। ये कंपनी कई देशों में अपने व्यवहार की वजह से विवादों में रही है। लेकिन अब ऐसा लगता है कि उस पर ऐसा फंदा कसा है, जिससे निकलना आसान नहीं होगा। कंपनी का भविष्य फिलहाल अधार में लटका नजर आता है।