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बंपर मुनाफे के बावजूद फेसबुक की साख में गहरी सेंध, शेयरों में आई गिरावट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Feb 2021 03:06 PM IST

सार

फॉर्च्यून मैग्जीन की गुरुवार को जारी हुई सबसे प्रतिष्ठित कंपनियों की लिस्ट में इस बार फेसबुक का नाम नहीं है। इस लिस्ट में लगातार 14वें साल पहले नंबर पर एपल कंपनी आई है...
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Mark Zuckerberg
Mark Zuckerberg - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार

फेसबुक का कारोबार भले फल-फूल रहा हो, लेकिन उसकी साख में गहरी सेंध लग गई है। ये बात यूगोव-सेंटर फॉर ग्रोथ एंड अपॉर्चुनिटी के एक ताजा सर्वे से सामने आई है। इस सर्वे से सामने आई सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि अमेरिका में गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट या टिकटॉक की तुलना में कहीं ज्यादा लोग फेसबुक पर अविश्वास करते हैं। इस सर्वे में लगभग 40 फीसदी लोगों ने कहा कि वे निजी डाटा की सुरक्षा के लिहाज से फेसबुक पर बिल्कुल यकीन नहीं करते। 39 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर फेसबुक कंपनी को विभाजित कर दिया जाए, तो यह दुनिया के लिए बेहतर होगा।
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लेकिन फिलहाल लोगों की बदलती राय का फेसबुक के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। पिछले हफ्ते सामने आए आंकड़ों के मुताबिक वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी शेयर बाजार) के अनुमानों के विपरीत बीते साल में फेसबुक का मुनाफा स्थिर गति से बढ़ा। कोरोना महामारी का उसकी आमदनी पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इसके बावजूद पिछले हफ्ते फेसबुक के शेयरों के भाव में गिरावट आई। इसकी वजह निवेशकों का यह अंदेशा है कि इस कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी में प्रस्तावित बदलाव का कंपनी के कारोबार पर असर पड़ेगा। हफ्ते भर बाद भी शेयरों के भाव में कोई सुधार नहीं हुआ है।


यही वजह है कि फॉर्च्यून मैग्जीन की गुरुवार को जारी हुई सबसे प्रतिष्ठित कंपनियों की लिस्ट में इस बार फेसबुक का नाम नहीं है। इस लिस्ट में लगातार 14वें साल पहले नंबर पर एपल कंपनी आई है। जुलाई 2020 में एक्सियोस/हैरिस सर्वे में कॉरपोरेट प्रतिष्ठा के लिहाज बनाई गई लिस्ट में फेसबुक 100 कंपनियों के बीच 97वें नंबर पर आई थी। 2019 में उसका दर्जा 94 था। यानी एक साल में उसकी प्रतिष्ठा में तीन पायदान की गिरावट आई। जुलाई 2020 में ही पिउ रिसर्च सेंटर के एक सर्वे में अमेरिका दो तिहाई लोगों ने कहा था कि सोशल मीडिया का आमतौर पर देश की दिशा पर खराब असर पड़ रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि फेसबुक कंपनी के सामने कई गंभीर संकट खड़े हो गए हैं, जिनका असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और उपभोक्ता अधिकार संगठनों का आरोप है कि फेसबुक की वजह से अमेरिकी समाज में उग्रवाद बढ़ा है, जिसका नतीजा पिछले छह जनवरी को कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद भवन) पर हमले के रूप में देखने को मिला। अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने एक रिपोर्ट मे बताया था कि फेसबुक के पास इस बात की जानकारी पहले से थी कि कुछ गुट हथियार जुटा रहे हैं और हिंसा की योजना की बना रहे हैं। फेसबुक ने पिछले हफ्ते कहा था कि अब उसके प्लेटफॉर्म पर सिविक या राजनीतिक संगठनों को ज्वाइन करने के बारे में सजेशन नहीं आएगा।

अमेरिका में विनियामक एजेंसियां तमाम बड़ी तकनीक कंपनियों को नियंत्रित करने की दिशा में बढ़ रही हैं। गूगल और फेसबुक के खिलाफ एकाधिकार कायम करने के आरोप में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। अमेरिका का फेडरल ट्रेड कमीशन फेसबुक पर प्रतिस्पर्धा रोकने के आरोप में मुकदमा दायर करा चुका है। फेसबुक के अधिकारियों को कई संसदीय सुनवाइयों में भी तलब किया जा चुका है। इन सबका असर फेसबुक की साख पर पड़ा है। अपनी साख संभालने की कोशिश में ही अब कंटेंट निगरानी का काम बाहरी एजेंसी को देने की पहल फेसबुक ने की है।

वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के मुताबिक फेसबुक के कई अधिकारियों ने गुजरे एक साल के दौरान उससे कहा कि कई बहुचर्चित घोटालों से कंपनी के सामने आज गंभीर संकट पैदा हो गया है। इन घोटालों में 2020 का विज्ञापन बहिष्कार मामला, कैपिटल हिल पर धावा और एपल कंपनी के साथ चल रहा फेसबुक का चर्चित विवाद शामिल हैं। अब वॉल स्ट्रीट में भी फेसबुक के भविष्य को लेकर चिंता पैदा होने लगी है। इससे कंपनी का संकट और गहरा सकता है।

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