स्पैम कॉल पर ट्राई का शिकंजा: एआई से होगी पहचान, पांच नंबर पकड़े गए तो कनेक्शन कटेगा
ट्राई ने अवांछित व्यावसायिक कॉल और संदेशों पर रोक लगाने के लिए नियम सख्त किए हैं। अब टेलीकॉम कंपनियों को संदिग्ध स्पैम की पहचान के लिए एआई और मशीन लर्निंग फिल्टर का इस्तेमाल करना होगा। 10 दिन में किसी स्पैमर के पांच या अधिक नंबर पकड़े जाने पर कनेक्शन काटकर एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। ऑटोमेटेड कॉल पर पांच पैसे प्रति मिनट शुल्क भी लगेगा।

विस्तार
दूरसंचार नियामक ट्राई ने अवांछित वाणिज्यिक संचार (यूसीसी) पर अंकुश लगाने के लिए नियम और सख्त कर दिए हैं। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों के लिए संदिग्ध स्पैम कॉल्स और मैसेज की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग फिल्टर का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है। संशोधित नियमों के तहत अगर किसी स्पैमर के पांच या उससे ज्यादा नंबर 10 दिन में पहचाने जाते हैं, तो उनका टेलीकॉम कनेक्शन काटा जा सकता है। साथ ही उसे एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। इसके अलावा ऑटोमेटेड कॉल्स पर पांच पैसे प्रति मिनट का चार्ज भी लगेगा।
गलत नंबर इस्तेमाल तो बंद करना होगा
अगर किसी कंपनी के नंबर या मैसेज टेम्पलेट का गलत इस्तेमाल पाया जाता है तो टेलिकॉम कंपनी को उसको बंद करने की कार्रवाई करनी होगी। अगर इसके पीछे कोई टेलीमार्केटर पाया जाता है तो उसके दूसरे नंबरों पर भी कार्रवाई हो सकती है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
ग्राहकों को अपील का अधिकार
अनचाही व्यावसायिक संचार शिकायत के निपटारे से असंतुष्ट ग्राहक 15 दिनों के भीतर अपील कर सकता है। इसके लिए डीएनडी एप, टेलीकॉम सेवा प्रदाता के एप या पोर्टल और 1909 का इस्तेमाल किया जा सकेगा। ऑटो-डायलर, रोबोकॉल और पहले से रिकॉर्ड की गई या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से की गई आवाज वाली कॉल के लिए पहले घोषणा करना जरूरी होगा। कॉल प्रबंधन एप 1600 और 1601 जैसी व्यावसायिक नंबर सीरीज को एक साथ स्पैम या ब्लॉक नहीं कर सकेंगे।