मोबाइल टावर लगाने के नाम पर हो रही है धोखाधड़ी, यहां करें शिकायत

पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल नेटवर्क काफी तेजी से फैला है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछले एक वर्ष में 66,690 नए टावर लगे हैं और आज 5,90,000 से अधिक टावर आम जनता को निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रहे हैं। हालांकि, सेवाओं के विस्तार के साथ एक समस्या उभरी है और वह समस्या है टावरों की धोखाधड़ी। मोबाइल टावर के नाम पर बड़े-बड़े विज्ञापन दिए जा रहे हैं और लोगों से पैसे लिए जा रहे हैं। ये ठग खुद को ट्राई या आईपी1 या दूरसंचार सेवा प्रदाताओं का एजेंट बताते हैं। इसके अलावा फर्जी विज्ञापन के पैम्फलेट बांटते हैं और फर्जी कॉल करके लोगों को कई तरह के ऑफर्स देते हैं।
किए जाते हैं बड़े-बड़े लेकिन फर्जी वादे
ये ठग बहुत ज्यादा किराया, फ्री टावर इंस्टॉलेशन, स्थानीय नगर निकायों के आवश्यक शुल्क भुगतान को माफ कराने और मुफ्त में मोबाइल फोन जैसे उपहार देने का झांसा देते हैं। इनके बदले वे संपत्ति के मालिक से मोबाइल टावर लगाने के लिए उनके परिसरों को किराए पर देने के संबंध में दूरसंचार कानून के तहत धरोहर राशि अपने खाते में जमा करने को कहते हैं। इस प्रकार से वे ट्राई या किसी अन्य इंफास्ट्रक्चर या दूरसंचार सेवा प्रदाता का प्रतिनिधित्व करने वाली एक फर्जी कंपनी के नाम से भोले भाले संपत्ति मालिक को तुरंत जाली रसीद भी दे देते हैं। एक बार भुगतान हो जाने पर, धोखाधड़ी करने वाले ये लोग गायब हो जाते हैं और नए लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए किसी अन्य शहर या जगह का रूख कर लेते हैं।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में खूब हो रहा फर्जीवाड़ा
सेलुलर ऑपरेशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) महानिदेशक राजन एस. मैथ्यूज के मुताबिक उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मोबाइल टावर को लेकर फर्जीवाड़ा बहुत अधिक है। दिसंबर, 2019 में ट्राई ने सीओएआई को सूचित किया था कि उनके पास मोबाइल टावर को लेकर धोखाधड़ी के संबंध में प्रतिदिन लगभग 15 शिकायतें आती हैं। ट्राई ने इस बात का उल्लेख किया कि पिछले दो महीने में शिकायतों की संख्या लगभग उतनी ही है। ट्राई ने सुझाव दिया कि पीड़ित लोगों को इस मामले को स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष उठाना चाहिए। फर्जीवाड़ों को लेकर दूरसंचार सेवा प्रदाता, दूरसंचार रेगुलेटरी के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं और भारत के कई शहरों में मोबाइल टावर को लेकर किए जा रहे फर्जीवाड़े से जनता को सचेत कर रहे हैं।
यहां करें शिकायत
ट्राई ने यह बात दोहराई है कि मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए परिसरों को किराए पर लेने में रेगुलेटरी प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी तरह से शामिल नहीं है। इस बात को लेकर जागरूक रहना बहुत महत्वपूर्ण है कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता (आईपी -1) को ही टावर लगाने के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया है। इन कंपनियों में इंडसटावर्स लिमिटेड, एटीसी, भारती इंफाटेल आदि शामिल हैं। अगर आपके इलाके में भी कोई टावर गैंग सक्रिय है तो आप नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन 14404 या 1800114000 पर कॉल करके शिकायत कर सकते हैं या फिर www.consumerhelpline.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।