सेंधमारी : डिजिटल बैंकिंग पर तीन लाख साइबर हमले, एटीएम टेंपरिंग कर बंद कार्ड से निकाल रहे कैश

Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।Jeet Kumar
Mon, 19 Apr 2021 03:51 AM IST
सार
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Three lakh cyber attacks on digital banking
सांकेतिक तस्वीर.... - फोटो : social media

    विस्तार

    देश में डिजिटल बैंकिंग पर पिछले दो वर्ष में साइबर हमले दोगुने हो गए हैं। जांच एजेंसियों केअनुसार 2018 में 1.59 लाख से बढ़ कर बीते वर्ष इनकी संख्या 2.90 लाख के पार हो गई है। यही नहीं, अब साइबर ठगे एटीएम को निशाना बना कर बंद या ब्लॉक हो चुके एटीएम कार्ड से भी पैसा निकालने लगे हैं।

    इसके लिए वे एटीएम बूथ में छेड़छाड़ कर रहे हैं। इन्हें मैन इन द मिडल (एमआईटीएम) मामले कहा गया है। इन्हें रोकने के लिए केंद्र सरकार व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को डिजिटल प्रक्रिया और एटीएम दोनों की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है।

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    केंद्र सरकार ने बैंकों से कहा है कि यह ठगी एटीएम स्विच और एटीएम होस्ट के बीच होने वाले संदेशों को बदल कर अंजाम दी जा रही है। मामले से जुड़े एक एक अधिकारी ने बताया कि यह नये प्रकार की साइबर ठगी है, जो एटीएम से पैसा निकालने में उपयोग हो रही है। ठग एटीएम बूथ में लगी लोकल एरिया नेटवर्क (लेन) केबल में छेड़छाड़ कर रहे हैं क्योंकि यह कई बार खुले पड़े मिल रहे हैं।

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    इस दौरान एटीएम मशीन और राउटर या स्विच के बीच होने वाले संदेश को बदलने वाला उपकरण फिट कर दिया जाता है। इसके बाद साइबर ठग बंद एटीएम कार्ड से पैसा निकालते हैं।

    एटीएम स्विच कार्ड को बंद या ब्लॉक देखकर निकासी खारिज करने का संदेश एटीएम होस्ट को भेजता है, लेकिन ठगों का डाला उपकरण इस संदेश को निकासी स्वीकार होने के संदेश में बदल देता है। निकासी स्वीकार होने का संदेश मिलने पर पैसा निकल आता है।

    यह खतरा ऐसे समझें

    मान लीजिए किसी बैंक ग्राहक का कार्ड खो जाए या चोरी होकर ठगों के पास पहुंचे। ग्राहक बैंक में कार्ड खोने की शिकायत कर इसे तुरंत ब्लॉक करवा देगा और निश्चित हो जाएगा कि उस कार्ड से कोई पैसा नहीं निकल सकता। लेकिन एमआईटीएम मामले में साइबर ठग बंद कार्ड और बिना पिन के भी पैसा निकाल सकते हैं।

    सुरक्षा के लिए बैंकों को दिए दो निर्देश

    1. बैंक अपने एटीएम स्विच व टर्मिनल के बीच संदेशों को एनक्रिप्ट करें। इससे ठग यह संदेश नहीं पढ़ेंगे

    2

    . एटीएम बूथ पर वायरिंग व समस्त उपकरण पूरी तरह कवर करें ताकि इनसे छेड़छाड़ न हो

    दो साल में डिजिटल बैंकिंग पर दोगुन साइबर हमले

    डिजिटल बैंकिंग पर इस एमआईटीएम के साथ फिशिंग हमले, नेटवर्क स्कैनिंग व तलाशी, वेबसाइट हैकिंग और वायरस हमले भी हो रहे हैं। 2018 के मुकाबले यह करीब दोगुने हो चुके हैं। 2019 के बाद इनमें करीब 45 हजार की वृद्धि हुई।

    वर्ष - डिजिटल बैंकिंग में साइबर अपराध

    2020 - 2,90,445

    2019 - 2,46,514

    2018 - 1,59,761

    स्रोत - भारतीय कंप्यूटर इमर्जेंसी रेस्पोंस टीम (सीईआरटी-सर्ट)

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