गूगल और ऑस्ट्रेलिया का विवाद क्या है, भारत में क्या है स्थिति, विस्तार से समझें

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Mon, 25 Jan 2021 10:12 PM IST
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Tech giants vs regulators Google and Facebook to enter into payment negotiations whats the condition in India
Google vs Australia - फोटो : niemanlab

    गूगल और ऑस्ट्रेलिया का झगड़ा अब धमकियों में बदल गया है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कहा था कि गूगल और फेसबुक यदि अपने यूजर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज दिखाते हैं तो उन्हें न्यूज पब्लिशर्स को पैसे देने होंगे। वैसे तो यह विवाद पिछले साल से चल रहा है लेकिन मामला अब ज्यादा गर्म हो गया है। हाल ही में गूगल ने धमकी देते हुए कहा है कि यदि ऑस्ट्रेलिया की सरकार पैसे देने के लिए मजबूर करेगी तो वह सर्च में न्यूज दिखाना बंद करेगा। गूगल ने यहां तक कह दिया है कि यदि सरकार मजबूर करेगी तो वह ऑस्ट्रेलिया को अलविदा कह देगा।

    गूगल के ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के प्रबंध निदेशक, मेल सिल्वा ने पिछले सप्ताह एक संसदीय सुनवाई में कहा था कि प्रस्तावित कानून को यदि अमल में लाया जाता है तो उनके पास ऑस्ट्रेलिया छोड़ने के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं है। सिल्वा के जवाब में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि वे इस तरह की धमकियों पर टिप्पणी नहीं करते।

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    ऑस्ट्रेलियाई संसद में इस बात को लेकर लंबी बहस चल रही है कि गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों जब मीडिया हाउस के कंटेंट का इस्तेमाल कर रही हैं तो बदले में उन्हें मीडिया हाउस को पैसे देने चाहिए या नहीं। अब इंटरनेट कंपनियां सरकार के इस बहस के खिलाफ हैं। गूगल के अलावा फेसबुक ने भी कहा है कि वह ऑस्ट्रेलिया में न्यूज पब्लिशर्स को फेसबुक पर न्यूज शेयर करने से रोकेगा।

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    दक्षिण कोरिया में हो चुका है इस तरह का प्रयोग

    ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब किसी सर्च इंजन को न्यूज पब्लिशर्स को पैसे देने के लिए कहा जा रहा है। इससे पहले साल 2017 में दक्षिण कोरिया में गूगल से ज्यादा लोकप्रिय सर्च इंजन नैवर (Naver) ने इसी तरह का प्रयोग किया था। Naver ने समाचार के बदले 125 से अधिक पब्लिशर्स को पैसे दिए, हालांकि 500 मीडिया हाउस ऐसे भी थे जिन्हें पैसे नहीं मिले। कंपनी ने 2017 में कुल 40 मिलियन डॉलर का भुगतान किया, हालांकि पेमेंट को लेकर पब्लिशर्स खुश नहीं थे।

    फेसबुक का न्यूज टैब जल्द होने वाला है लॉन्च

    कुछ दिन पहले ही ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि फेसबुक जल्द ही न्यूज टैब नाम से एक फीचर लॉन्च करने वाला है। फेसबुक एप और वेबसाइट के न्यूज टैब में सिर्फ खबरें ही दिखेंगी। फेसबुक का न्यूज टैब फीचर साल 2019 से ही अमेरिका में उपलब्ध है लेकिन अब इसे ग्लोबली जारी करने की प्लानिंग हो रही है।

    गूगल ने पिछले साल दिसंबर में गूगल ने कहा था कि वह जल्द ही लोगों से न्यूज के बदले पैसे लेना शुरू करेगा। गूगल ने कहा था कि इसके लिए वह न्यूज पब्लिशर्स के साथ साझेदारी करेगा। पिछले सप्ताह ही कहा था कि वह फ्रांस में न्यूज पब्लिशर्स को न्यूज के बदले पैसे देगा। बता दें कि इससे पहले गूगल स्पेन में ऐसे ही कानून के कारण अपनी न्यूज सर्विस को बंद कर दिया है।

    समस्या कहां है?

    न्यूज फीड के लिए मीडिया हाउस को पैसे देना गूगल जैसी टेक कंपनियों के लिए कोई बड़ी समस्या नहीं है। इसका प्रमाण हाल ही में देखने को मिला जब ऑस्ट्रेलिया में विवाद से कुछ घंटे पहले गूगल ने कहा था कि फ्रांस में न्यूज पब्लिशर्स को न्यूज के बदले पैसे देगा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया का विवाद थोड़ा अलग है।

    ऑस्ट्रेलिया का पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि पेमेंट सिस्टम पर इन कंपनियों का नियंत्रण कितना हो, जैसे- कितनी खबरों के लिए कितना पेमेंट होगा, खबरों के लिए पेमेंट होगा तो क्या सर्च में न्यूज के दिखने की संभावना ज्यादा होगी या कम होगी। ऑस्ट्रेलिया का झगड़ा प्रभुत्व को लेकर आगे बढ़ रहा है। यूरोपियन यूनियन ने बिना विवाद किए इस समस्या का समाधान कॉपीराइट से जोड़कर कर दिया है।

    भारत में क्या है स्थिति?

    FICCI-EY की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ऑनलाइन समाचार पढ़ने और मनोरंजन के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्या 300 मिलियन के करीब है। ये यूजर्स गूगल, फेसबुक और डेलीहंट जैसे एग्रिगेटर के जरिए खबरों को पढ़ते हैं। इनमें से 77 फीसदी यूजर्स स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं। ये आंकड़े 2019-20 के हैं। 282 मिलियन यूनिक विजिटर्स के साथ भारत चीन के बाद सबसे ज्यादा ऑनलाइन न्यूज पढ़ने वाला दुनिया का दूसरा देश है।

    साल 2019 में ऑनलाइन विज्ञापन में 24 फीसदी (27,900 रुपये) का इजाफा देखा गया था जिसे लेकर अनुमान है कि यह साल 2022 तक 51,340 करोड़ का हो जाएगा। डिजिटल विज्ञापन में गूगल और फेसबुक का संयुक्त रूप से 61 फीसदी कब्जा है।

    भारत में Dailyhunt जैसे न्यूज एग्रिटर को गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों से फंडिंग प्राप्त है। वहीं InShorts को Tiger Global से फंडिंग मिलती है। जनवरी 2020 में आई हावर्ड यूनिवर्सिटी Nieman लैब की रिपोर्ट में कहा गया था कि डेलीहंट न्यूज पब्लिशर्स को हर महीने 5-6 लाख रुपये देता है, हालांकि भारत में गूगल और फेसबुक के साथ न्यूज को लेकर फिलहाल कोई बहस नहीं है।

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