Smartphones In Water: पानी के अंदर भी सुरक्षित रहता है फोन, जानिए कैसे होती है वाटरप्रूफिंग

जागृति
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति
Fri, 20 Feb 2026 06:59 PM IST
सार

How smartphones are made waterproof:

आजकल कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स को वाटर-रेजिस्टेंट बनाकर बाजार में उतार रही हैं। हल्की बारिश, पानी के छींटे या कुछ समय तक पानी में रहने के बावजूद ये फोन काम करते रहते हैं। लेकिन यह जादू नहीं, बल्कि सटीक इंजीनियरिंग और कई स्तरों की सुरक्षा का नतीजा है। जानें पोर्ट्स, स्पीकर्स और सिम ट्रे के पीछे छिपा वो विज्ञान, जो पानी की एक बूंद को भी अंदर जाने नहीं देता।

विज्ञापन
Smartphones: How phones stay functional underwater? secret port & speaker waterproofing tech news hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

    विस्तार

    ज्यादातर कंपनियां अपने फोन को वाटरप्रूफ नहीं बल्कि वाटर रजिस्टेंट कहती हैं। वाटर रजिस्टेंट का मतलब है कि सीमित समय तक पानी झेल सकता है। ये तय गहराई तक ही सुरक्षित है और यह स्थायी सुरक्षा नहीं है। मतलब कि यह फीचर पूरी तरह गारंटी नहीं, बल्कि नियंत्रित परिस्थितियों में सुरक्षा देता है।

    कैसे बनता है एक वाटर-रजिस्टेंट स्मार्टफोन?

    फोन को वाटरप्रूफ बनाने की शुरुआत उसकी बाहरी बनावट से होती है। कंपनियां बैक पैनल और फ्रंट ग्लास को फ्रेम के साथ जोड़ने के लिए बहुत ही शक्तिशाली प्रेशर-सेंसिटिव एडहेसिव (गोंद) का इस्तेमाल करती हैं। यह गोंद न केवल पैनल को चिपकाता है, बल्कि एक वाटरप्रूफ सील भी बना देता है।

    विज्ञापन

    ये भी पढ़े: Gemini 3.1 Pro: गूगल ने लॉन्च किया Gemini 3.1 Pro, जटिल सवालों के लिए और ज्यादा समझदार बना AI मॉडल

    पोर्ट्स और बटन्स: रबर का सुरक्षा कवच

    फोन में सबसे कमजोर जगह चार्जिंग पोर्ट, सिम ट्रे और वॉल्यूम बटन्स होते हैं। यहां सिलिकॉन गैस्केट का उपयोग किया जाता है। जब आप सिम ट्रे अंदर डालते हैं, तो उसके चारों ओर लगी रबर रिंग दब जाती है और पानी के लिए रास्ता बंद कर देती है।

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    स्पीकर और माइक्रोफो नहीं

    यह सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जाता है। स्पीकर को बजने के लिए हवा के कंपन की जरूरत होती है। यहां कंपनियां ePTFE (Expanded Polytetrafluoroethylene) जैसी हाइड्रोफोबिक मेंम्ब्रेन (जाली) लगाती हैं। इस जाली के छेद इतने सूक्ष्म होते हैं कि पानी का सतही तनाव उसे अंदर नहीं जाने देता, लेकिन आवाज की लहरें आसानी से पार हो जाती हैं।

    इंटरनल नैनो-कोटिंग

    मान लीजिए कि किसी कारणवश पानी की कुछ बूंदें अंदर चली भी गईं, तो वहां नैनो-हाइड्रोफोबिक कोटिंग काम आती है। यह कोटिंग फोन के मदरबोर्ड और संवेदनशील सर्किट पर स्प्रे की जाती है। यह पानी को रिपेल करती है, यानी पानी सर्किट पर चिपकने के बजाय बूंद बनकर गिर जाता है, जिससे शॉर्ट-सर्किट का खतरा टल जाता है।

    ये भी पढ़े: WhatsApp Group History: ग्रुप एडमिन अब शेयर कर सकेंगे पुरानी चैट; प्राइवेसी और सुरक्षा के साथ आया नया अपडेट

    वाटरप्रूफ और वाटर-रजिस्टेंट में अंतर

    ध्यान रखें, कोई भी फोन 100% वाटरप्रूफ नहीं होता। समय के साथ फोन गिरने या पुराना होने पर उसकी रबर सीलिंग ढीली पड़ सकती है। कंपनियां इसे वाटर-रजिस्टेंट इसलिए कहती हैं क्योंकि यह एक निश्चित गहराई और समय (जैसे IP68 रेटिंग) तक ही सुरक्षित रहता है।

    आईपी रेटिंग क्या होती है?

    अक्सर फोन के साथ आईपी 67 या आईपी 68 जैसी रेटिंग लिखी होती है। इसमें पहला नंबर का मतलब धूल से सुरक्षा और दूसरे का मतलब पानी से सुरक्षा होता हैं। जैसे मान लीजिए आईपी 68 का मतलब है कि फोन तय समय तक एक निश्चित गहराई तक पानी में सुरक्षित रह सकता है, लेकिन ध्यान रहे, यह टेस्ट लैब कंडीशन में होता है, रोजमर्रा की स्थिति में परिणाम अलग हो सकते हैं।

    किन बातों का रखें ध्यान?

    • खारे पानी (समुद्री पानी) से फोन को नुकसान हो सकता है।
    • गर्म पानी या साबुन वाले पानी में सुरक्षा कम हो सकती है।
    • गिरने के बाद सील कमजोर हो सकती है।
    • पानी से खराबी अक्सर वारंटी में कवर नहीं होती।
    Login or Signup
    अपना शहर चुनें