Smartphone Market: कैसे टूटेगी चीन की दीवार? 70 फीसदी स्मार्टफोन बाजार पर चीनी कंपनियों का कब्जा

अमित शर्मा
Wed, 24 Aug 2022 04:31 PM IST
सार

Smartphone Market: वित्त वर्ष 2022 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत में कुल 3.5 करोड़ फोन की खरीद की गई थी। इसमें सभी प्रकार के फोन शामिल थे। यदि भारतीय स्मार्टफोन बाजार में हिस्सेदारी की बात करें, तो इसके 70 फीसदी हिस्से पर चीनी कंपनियों का नियंत्रण था...

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Smartphone market: Chinese smartphone brands still holds 70 percent stake in india's smartphone market
Smartphone Market - फोटो : पिक्साबे

    विस्तार

    पीएम मोदी हमेशा स्थानीय कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए ‘वोकल फॉर लोकल’ की बात करते हैं। उनकी इसी सोच के अनुसार केंद्र सरकार घरेलू स्तर पर मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने की नीति अपनाती रही है, इसका परिणाम हुआ है कि भारत मोबाइल फोन निर्माण में दुनिया में एक ताकत बन चुका है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि भारत के स्मार्टफोन बाजार पर अभी भी पूरी तरह चीनी कंपनियों का एकतरफा कब्जा बना हुआ है। चीनी स्मार्टफोन कंपनियां भारत के 70 फीसदी बाजार पर छाई हुई हैं। इसमें भी 66.3 फीसदी हिस्सा केवल चार कंपनियों (शाओमी, रियलमी, वीवो और ओप्पो) के बीच बंटा हुआ है।

    केंद्र सरकार घरेलू मोबाइल फोन निर्माताओं को बढ़ोतरी देने के लिए कई योजनाओं की घोषणा कर चुकी है। सरकार विचार कर रही है कि 12 हजार रुपये से कम मूल्य के मोबाइल फोन बाजार में भारतीय निर्माताओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए चीनी कंपनियों से उनकी साझेदारी कराने के लिए नियम बनाने जैसी बात हो रही है।

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    इसलिए पिछड़ी भारतीय कंपनियां

    स्मार्टफोन बाजार विशेषज्ञ एनके गोयल ने अमर उजाला से कहा कि सरकार के लिए इस तरह के नियम बनाना आसान नहीं होगा। सरकार घरेलू निर्माताओं के लिए इंसेंटिव या प्रमोशनल रूल्स लागू कर सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार के नियमों के कारण किसी एक देश की कंपनियों को रोक नहीं सकती।

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    फिलहाल, कुछ समय पहले भारतीय बाजार में कार्बन, इंटेक्स, लावा और कई अन्य कंपनियां मजबूती से काम कर रही थीं, लेकिन तकनीकी ज्ञान की कमी और पूंजी की कमी के कारण वे चीनी कंपनियों के सामने टिक नहीं पाईं और कुछ ही सालों के बाद बाजार से गायब हो गईं। ऐसे में केंद्र सरकार के लिए नई घरेलू कंपनियों के लिए जगह बना पाना आसान नहीं होगा।

    किसकी कितनी हिस्सेदारी

    वित्त वर्ष 2022 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत में कुल 3.5 करोड़ फोन की खरीद की गई थी। इसमें सभी प्रकार के फोन शामिल थे। यदि भारतीय स्मार्टफोन बाजार में हिस्सेदारी की बात करें, तो इसके 70 फीसदी हिस्से पर चीनी कंपनियों का नियंत्रण था। इसमें भी चार कंपनियों शाओमी, रियलमी, ओप्पो और वीवो की हिस्सेदारी 66.3 फीसदी थी। भारतीय बाजार में शाओमी सबसे सफल चीनी ब्रांड बना हुआ है। कंपनी का स्मार्टफोन बाजार में हिस्सेदारी 20.4 फीसदी थी। इस दौरान कंपनी ने 71 लाख स्मार्टफोन बेचे थे।

    इसी अवधि (अप्रैल-जून 2022) में रियलमी की बाजार हिस्सेदारी 61 लाख स्मार्टफोन की बिक्री के साथ 17.59 फीसदी, वीवो की 59 लाख स्मार्टफोन बिक्री के साथ 16.9 फीसदी और 40 लाख स्मार्टफोन की बिक्री के साथ ओप्पो की हिस्सेदारी 11.59 फीसदी थी।

    57 लाख स्मार्टफोन बिक्री के साथ सैमसंग की बाजार में हिस्सेदारी चौथे स्थान पर खिसक चुकी है। कंपनी की हिस्सेदारी भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में केवल 16.3 प्रतिशत रह गई है। सोनी, नोकिया और एलजी जैसे सभी अन्य ब्रांड मिलाकर केवल 17.4 प्रतिशत बाजार पर पकड़ बनाए हुए हैं।

    मिड रेंज फोन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

    बड़ी बात यह है कि अब कुल फोन खरीद का औसत मूल्य तेजी से बढ़ रहा है। पहले भारतीय बाजार में बेसिक फोन की हिस्सेदारी ज्यादा हुआ करती थी, लेकिन अब स्मार्टफोन बाजार तेजी से फैल रहा है और अब यह गांवों में भी तेजी से पकड़ बना रहा है। इसका सीधा असर कुल फोन खरीद के औसत मूल्य पर पड़ रहा है।

    जानकारी के मुताबिक स्मार्टफोन की बिक्री में औसत मूल्य में लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब यह 17 हजार रुपये की सीमा को भी पार कर गया है। हालांकि, भारतीय स्मार्टफोन बाजार में अभी भी सबसे ज्यादा (करीब 60 फीसदी) हिस्सेदारी आठ हजार से 16 हजार रुपये तक के स्मार्टफोन की बनी हुई है।

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