सेमीकॉन इंडिया 2026: 5 अरब डॉलर का रिसर्च पार्क, 10,000 करोड़ की फैक्टरी; क्या रहे निवेश के बड़े एलान?

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 17 Sep 2026 04:33 PM IST
सार

सेमिकॉन इंडिया 2026 में भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए कई बड़े एलान हुए। एप्लाइड मैटेरियल्स ने 5 अरब डॉलर और लैम रिसर्च ने करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजनाओं का एलान किया। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 16 समझौते और माइक्रोन ने उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की। आइए जानते हैं सेमीकॉन इंडिया 2026 के पहले दिन किन कंपनियों ने भारत में निवेश करने की घोषणा की।

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सेमीकॉन कार्यक्रम में क्या रहे बड़े एलान? - फोटो : अमर उजाला

    विस्तार

    भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए 17 सितंबर 2026 का दिन अहम रहा। सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण के लिए 13.5 अरब डॉलर (लगभग 1,27,500 करोड़ रुपये) के कुल बजटीय परिव्यय और निवेश का लक्ष्य रखा। आयोजन के पहले दिन वैश्विक कंपनियों ने भारत में रिसर्च, विनिर्माण, सप्लाई चेन और चिप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बड़े प्लान सामने रखे। दोपहर तक की प्रमुख घोषणाओं में एप्लाइड मैटेरियल्स और लैम रिसर्च के निवेश सबसे बड़े रहे। साथ ही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने 16 समझौते करने की जानकारी दी, जबकि माइक्रोन ने गुजरात में उत्पादन कई गुना बढ़ाने की योजना बताई।

    एप्लाइड मैटेरियल्स का 5 अरब डॉलर का प्लान

    • सेमीकॉन इंडिया 2026 में एप्लाइड मैटेरियल्स ने 'इंडिया विजन 2035' की घोषणा की। कंपनी अगले दशक में भारत में 5 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका फोकस तीन क्षेत्रों पर रहेगा, जिसमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट बढ़ाना, घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करना और भविष्य के लिए तकनीकी प्रतिभा तैयार करना शामिल है।
    • कंपनी ने भारत में 140 एकड़ का एडवांस्ड सेमीकंडक्टर रिसर्च पार्क विकसित करने की योजना पर काम करेगी। इसमें क्लीनरूम सुविधाएं, इंजीनियरिंग क्षमता और ग्राहकों व सप्लायर्स के साथ सहयोगी रिसर्च की व्यवस्था होगी। कंपनी का लक्ष्य 2035 तक भारत आधारित अपनी सप्लाई चेन क्षमता को 10 गुना बढ़ाना भी है।

    लैम रिसर्च लगाएगी 10,000 करोड़ रुपये

    • दूसरा बड़ा एलान लैम रिसर्च की ओर से आया। कंपनी करीब 10,000 करोड़ रुपये निवेश कर भारत में अपनी पहली सिलिकॉन कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करने की योजना बना रही है। कंपनी के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से सेमीकंडक्टर और संबंधित उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए भारत में स्थानीय क्षमता तैयार करना जरूरी है।
    • यह निवेश भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि देश में चिप फैक्टरी के साथ-साथ उपकरण और कंपोनेंट की स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करने पर अब ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स करेगी 16 समझौते

    • टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ रणधीर ठाकुर ने बताया कि कंपनी सेमीकॉन इंडिया 2026 में 16 समझौता ज्ञापन पर हस्ताझर करने जा रही है। इन साझेदारियों का उद्देश्य भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इनमें यूरोप, जापान, मलेशिया, सिंगापुर और भारत की कंपनियां व संस्थान शामिल हैं।
    • इन साझेदारों में नेक्सपीरिया, बीईएसआई, जेएसआर, फुजीफिल्म, सुमितोमो, सोजित्ज, इनोमोटो, कॉलिंगटन, एसीेंडस फर्स्टस्पेस, एलएंडटी सेमीकंडक्टर्स, इनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स, सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी और गति शक्ति विश्वविद्यालय जैसे नाम शामिल हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने यह भी कहा कि गुजरात के धोलेरा में उसका फैब और असम के जागीरोड में ओएसएटी पैकेजिंग प्रोजेक्ट तय कार्यक्रम के मुताबिक आगे बढ़ रहे हैं।

    माइक्रोन ने उत्पादन बढ़ाने का एलान किया

    • माइक्रोन ने आज किसी नए निवेश की रकम घोषित नहीं की, लेकिन गुजरात के साणंद संयंत्र से उत्पादन बढ़ाने की योजना जरूर बताई। कंपनी के सीईओ संजय मेहरोत्रा के अनुसार, 2026 में साणंद में करोड़ों चिप की असेंबली और टेस्टिंग होगी, जबकि 2027 में यह संख्या सैकड़ों करोड़ चिप तक पहुंचाने की तैयारी है।
    • माइक्रोन ने इसी साल साणंद में भारत की पहली सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट सुविधा का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया था। इस परियोजना में माइक्रोन और सरकारी साझेदारों का कुल निवेश करीब 2.75 अरब डॉलर बताया गया था।

    ASML भी बनाएगी स्थानीय सप्लाई चेन

    नीदरलैंज स्थित सेमीकंडक्टर उपकरणों की प्रमुख कंपनी एएसएमएल (ASML) ने भी भारत में स्थानीय सप्लाई चेन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने की जानकारी दी है। कंपनी के अधिकारी के मुताबिक, भारत में चिप निर्माण बढ़ने के साथ उपकरणों से जुड़े स्थानीय सप्लायर्स की क्षमता विकसित करना जरूरी होगा। एएसएमएल पहले से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रस्तावित फैब परियोजना के लिए तैयारी कर रही है।

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    सेमीकॉन 2.0 को भी समझना जरूरी

    • इन घोषणाओं के साथ सेमीकॉन 2.0 का बड़ा सरकारी ढांचा भी ध्यान देने लायक है। सरकार ने इसके लिए करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। हालांकि, यह राशि आज सेमीकॉन इंडिया 2026 में नया घोषित निवेश नहीं है; इसे पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत चिप फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, उपकरण, सामग्री, डिजाइन और रिसर्च जैसे क्षेत्रों को समर्थन देने की व्यवस्था है।
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन के दौरान कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर अभियान अब परियोजनाओं की घोषणा और निर्माण से आगे बढ़कर व्यावसायिक उत्पादन के चरण में पहुंच रहा है। उन्होंने उद्योग से भारत में रिसर्च एवं डेवलपमेंट को और मजबूत करने की अपील भी की।

    कितने महत्वपूर्ण हैं आज के एलान?

    • आज सामने आई घोषणाओं को केवल फैक्ट्रियों में निवेश के तौर पर देखना अधूरा होगा। एप्लाइड मैटेरियल्स का रिसर्च पार्क, लैम रिसर्च की कंपोनेंट फैक्टरी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की 16 साझेदारियां और एएसएमएल की स्थानीय सप्लाई चेन पहल संकेत देती हैं कि भारत अब चिप बनाने के साथ-साथ चिप के आसपास का पूरा औद्योगिक नेटवर्क तैयार करने पर जोर दे रहा है।
    • यानी सेमीकॉन इंडिया 2026 में भारत के लिए सबसे बड़ा बदलाव सिर्फ निवेश की रकम नहीं, बल्कि चिप फैब्रिकेशन से लेकर उपकरण, रिसर्च, पैकेजिंग, सप्लायर और प्रतिभा तक पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार के रूप में सामने आया है।
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