Energy Crisis: कार से लेकर लिफ्ट तक के इस्तेमाल पर पाबंदिया, ऊर्जा की कमी से ऐसे निपट रही टेक कंपनियां
Energy Crisis:
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते ऊर्जा संकट गहराने लगा है। ऐसे में सैमसंग, एसके ग्रुप और लोटे ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों ने ऊर्जा बचाने के लिए सख्त नियम लागू करने शुरू कर दिए हैं। कंपनियां कारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध और यहां तक की एसी के तापमान तक पर नियंत्रण कर उर्जा बचाने के उपाय कर रही हैं।

विस्तार
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे दुनियाभर में ऊर्जा संकट गहराने लगा है। इस स्थिति से निपटने के लिए अब निजी कंपनियां भी सक्रिय हो गई हैं। पहले जहां ऐसे उपाय सरकारी संस्थानों तक सीमित थे, वहीं अब कॉर्पोरेट सेक्टर भी ऊर्जा बचत की दिशा में तेजी से कदम उठा रहे हैं।
सैमसंग ने लगाई गाड़ियों के इस्तेमाल पर पाबंदिया
मौजूदा हालात को देखते हुए दक्षिण कोरियाई टेक कंपनी सैमसंग ने अपने सभी घरेलू दफ्तरों में 10 दिन के वाहन प्रतिबंध सिस्टम को लागू करने का फैसला किया है। इस नियम के तहत जिस दिन तारीख और गाड़ी के नंबर का आखिरी अंक एक जैसा होगा, उस दिन वाहन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहन, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और दिव्यांगों से जुड़े वाहनों को इसमें छूट दी गई है।
वहीं, एसके ग्रुप और लोटे ग्रुप ने पांच दिन के वाहन रोटेशन सिस्टम को अपनाने का फैसला किया है, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और ईंधन की बचत हो सके।
एसी के तापमान के लिए भी निर्देश
ऊर्जा बचाने के लिए कंपनियों ने अपने दफ्तरों में भी कई बदलाव किए हैं। लंच ब्रेक और काम खत्म होने के बाद लाइट्स बंद रखना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, ठंडक के लिए एसी का तापमान 18 डिग्री या उससे अधिक और हीटिंग के लिए 26 डिग्री या उससे अधिक रखने का निर्देश दिया गया है।
बिजली की खपत कम करने के लिए कम मंजिलों पर लिफ्ट के उपयोग को सीमित किया जा रहा है और कुछ जगहों पर फ्लोर-स्किपिंग सिस्टम अपनाया जा रहा है, जिससे अनावश्यक रुकावटें कम हों और ऊर्जा की बचत हो।
लोटे ग्रुप का विशेष अभियान
लोटे ग्रुप (Lotte Group) ने ऊर्जा बचाने के लिए एक खास अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत कर्मचारियों को बिजली की खपत कम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसमें स्टैंडबाय पावर को कम करना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देना और ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल शामिल है। इसके साथ ही, कंपनी ने फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स को बढ़ावा देने की भी योजना बनाई है, ताकि ऑफिस आने-जाने के समय को बांटकर ट्रैफिक और ईंधन की खपत कम की जा सके।
सरकार की ओर से भी की गई अपील
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भी ऊर्जा संकट को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अस्थिर हो रही है। उन्होंने सरकारी संस्थानों से इन उपायों को अपनाने की अपील की और आम लोगों से भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने और रोजमर्रा की जिंदगी में ऊर्जा बचाने का आग्रह किया।
- UPI PIN का झंझट खत्म: अब BHIM एप पर अंगूठा दिखाते ही होगा पेमेंट, जानें कैसे काम करेगा ये नया फीचर
- BSNL के ₹1000 से कम वाले ये 3 प्लान हैं पैसा वसूल: 164 दिनों तक की वैलिडिटी, सस्ते कॉलिंग ऑप्शन और कई फायदे
- Cooker: LPG सिलेंडर का झंझट भुला देगा ये कुकर, 1,500 रुपये से भी कम है कीमत, इंडक्शन की भी नहीं पड़ेगी जरूरत
- बच्चों के डेटा से खिलवाड़ पड़ेगा भारी: एनएचआरसी ने मेटा-व्हाट्सएप को थमाया नोटिस; 15 दिनों में मांगा जवाब