राष्ट्रपति के फैसलों पर भी हावी हो सकता है AI: सैम ऑल्टमैन की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता, कही हैरान करने वाली बात

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Thu, 15 Oct 2026 09:55 AM IST
सार

तेजी से बदलती तकनीक के दौर में OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन का AI को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जिसने दुनिया भर के विचारकों, नेताओं और आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ऑल्टमैन का मानना है कि आने वाले समय में एआई इतना सक्षम और शक्तिशाली हो सकता है कि देश चलाने वाले राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे बड़े नेता भी अहम फैसलों के लिए इस पर निर्भर हो सकते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वे AI की सलाह तो मानेंगे, लेकिन हो सकता है कि उन्हें इसके पीछे का तर्क पूरी तरह समझ न आए।

Sam Altman Warns AI Taking Over Presidential Decisions
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन - फोटो : amarujala.com

    विस्तार

    एआई आज लोगों के सवालों के जवाब देने, जानकारी जुटाने और मुश्किल काम आसान बनाने में मदद कर रहा है, लेकिन क्या भविष्य में यही तकनीक ऐसे बड़े फैसलों को भी प्रभावित कर सकती है, जिनका असर पूरे देश और समाज पर पड़े? ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने इसी संभावना को लेकर चिंता जताई है। एक्स पर एक वायरल क्लिप में वह ऐसी स्थिति की बात करते नजर आ रहे हैं, जिसमें वो कहते हैं कि बेहद सक्षम एआई राष्ट्रपति जैसे बड़े नेताओं को फैसले लेने में मार्गदर्शन दे सकता है, लेकिन नेताओं को यह पूरी तरह समझ नहीं आएगा कि एआई ने उस नतीजे तक पहुंचने के लिए क्या तर्क अपनाया।

    ऑल्टमैन की चिंता सिर्फ एआई की बढ़ती ताकत को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि समाज धीरे-धीरे फैसले लेने का बड़ा हिस्सा एआई को सौंप सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इंसान तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। उन्होंने इस आशंका को समझाते हुए कहा कि मुझे लगता है कि इसी तरह चीजें गलत हो सकती हैं।

    राष्ट्रपति जैसे बड़े फैसलों में एआई की भूमिका बढ़ने की आशंका

    आमतौर पर एआई का इस्तेमाल जानकारी खोजने, डेटा एनालिसिस यानी की विश्लेषण करने और अलग-अलग विकल्प समझने के लिए किया जाता है, लेकिन जैसे-जैसे एआई सिस्टम अधिक सक्षम होते जाएंगे, वैसे-वैसे उनसे जटिल मामलों में सलाह लेने का चलन भी बढ़ सकता है। ऐसे में एआई केवल मदद करने वाला टूल नहीं रह पाएगा, बल्कि फैसले लेने की प्रक्रिया पर उसका प्रभाव काफी बढ़ सकता है। हालांकि, यह एक पूरी तरह से संभावित स्थिति को लेकर जताई गई चिंता है, न कि इस बात का प्रमाण कि वर्तमान में राष्ट्रपति एआई के निर्देशों पर ही फैसले ले रहे हैं।

    एआई की सलाह पर भरोसा करना क्यों बन सकता है चिंता का विषय?

    सैम ऑल्टमैन का मानना है कि एआई बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण करके कुछ ही समय में सुझाव दे सकता है। इससे जटिल समस्याओं को समझने और अलग-अलग विकल्पों पर विचार करने में मदद मिल सकती है, लेकिन किसी सिस्टम का प्रभावशाली जवाब देना और उसके निष्कर्ष को पूरी तरह समझ पाना दो अलग-अलग बातें हैं।

    अगर कोई नेता AI की सलाह पर कोई बड़ा फैसला लेता है, तो यह समझना जरूरी होगा कि उस सलाह के पीछे कौन-सी जानकारी और धारणाएं थीं। यह भी देखना होगा कि सिस्टम ने किसी जरूरी पहलू को नजरअंदाज तो नहीं किया और उसके सुझाव में गलती की कितनी गुंजाइश है।

    यही चिंता आम लोगों के लिए भी है। अगर लोग AI के जवाबों को बिना जांचे सही मानने लगें, तो गलत जानकारी या अधूरे विश्लेषण के आधार पर भी फैसले लिए जा सकते हैं।

    क्या इंसान खुद AI को सौंप सकते हैं जरूरत से ज्यादा अधिकार?

    ऑल्टमैन की चेतावनी का एक खास पहलू यह भी है कि एआई पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बढ़ने के लिए जरूरी नहीं कि तकनीक जानबूझकर कुछ गलत करे। लोग सुविधा, तेजी और बेहतर नतीजों की उम्मीद में धीरे-धीरे उसे अधिक जिम्मेदारियां सौंप सकते हैं।

    शुरुआत में AI से केवल सुझाव लिए जा सकते हैं। इसके बाद लोग उससे विकल्पों का विश्लेषण करवाने लग सकते हैं और आखिरकार कुछ परिस्थितियों में उसके सुझावों को ही अंतिम फैसला मान सकते हैं। इस तरह इंसान की भूमिका फैसले लेने से हटकर AI के नतीजों को स्वीकार करने तक सीमित होने का खतरा पैदा हो सकता है। यही वह स्थिति है, जिस पर ऑल्टमैन की टिप्पणी ध्यान खींचती है।

    वायरल क्लिप पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

    एआई के राष्ट्रपति स्तर के फैसलों को प्रभावित करने की संभावना को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों को लगता है कि एआई वास्तव में इस हद तक प्रभावशाली हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों की चिंता यह है कि इंसान खुद ही सुविधा और तेज नतीजों के लिए तकनीक को बहुत ज्यादा नियंत्रण दे सकते हैं।

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