कितना बदला AI?: सैम ऑल्टमैन ने कहा- 14 महीनों में 1000 गुना किफायती हुआ एआई, लेकिन आगे यह रफ्तार मुमकिन नहीं

शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीशुभम कुमार
Thu, 19 Feb 2026 06:43 PM IST
सार

आखिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कितना बदला है? इसकी लागत में कमी आई है या फिर बढ़ोतरी हुई है? क्या सभी देशों के लिए एआई सस्ती लागत और व्यापक रूप से उपलब्ध हो पाएगा? इन सभी सवालों के जवाब में ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने क्या कहा? आइए जानते हैं।

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Sam Altman said AI has become 1000 times more cost-effective in 14 months News In Hindi
सैम ऑल्टमैन, ओपनएआई के सीईओ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

    विस्तार

    दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक की बढ़ती पहुंच और लागत को लेकर चर्चा तेज है। ऐसे में ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने इससे संबंधित कुछ अहम सवालों के जवाब दिए हैं।

    उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई मॉडल सस्ते और अधिक किफायती होंगे, जिससे विशेष रूप से ग्लोबल साउथ और भारत में यह तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने बताया कि पिछले 14 महीनों में एआई से मुश्किल सवालों के जवाब पाने की लागत 1,000 गुना घट गई और भविष्य में कीमतें और भी कम होंगी।

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    न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि एआई को सस्ता बनाने की दिशा में क्या प्रगति हो रही है और किन कारणों से यह भारत के लिए अधिक किफायती बन सकता है? तब उन्होंने कहा कि हमारे मॉडल से मुश्किल सवालों के जवाब पाने की लागत पिछले 14 महीनों में 1,000 गुना घट गई है। उन्होंने इसे अविश्वसनीय बताया और कहा कि अगले 14 महीनों में शायद इतनी तेजी से कमी नहीं आएगी, लेकिन लागत निश्चित रूप से बेहद कम होगी।

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    एआई मॉडलों की कीमतों में गिरावट जारी रहेने की उम्मीद- ऑल्टमैन

    हालांकि, ऑल्टमैन ने यह भी कहा कि अगले 14 महीनों में इतनी बड़ी उपलब्धि को हासिल या लागत में इतनी बड़ी कटौती को दोहराना संभव नहीं हो सकता। फिर भी AI मॉडलों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट जारी रहने की उम्मीद है। अगर लागत तेजी से घटती है, तो इसका सबसे अधिक लाभ विकासशील देशों और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को मिलेगा। इसके साथ ही जब उनसे पूछा गया कि क्या निकट भविष्य में एआई विकासशील देशों के लिए किफायती हो पाएगा, तो उन्होंने कहा कि वे इसे लेकर आशावादी हैं। उन्हें भरोसा है कि लागत लोगों की अपेक्षा से भी अधिक तेजी से नीचे लाई जा सकती हैं।

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    एआई की ताकत को लेकर भी बोले ऑल्टमैन

    इसके अलावा इंटरव्यू के दौरान ऑल्टमैन ने कहा कि एआई की ताकत किसी एक देश या कंपनी के हाथों में सिमट जाने को लेकर वे भी चिंतित हैं। उनका मानना है कि आगे बढ़ने का इकलौता रास्ता तकनीक का व्यापक लोकतंत्रीकरण है। एआई उपकरणों को लोगों के हाथों में देना होगा, भले ही इसके साथ चुनौतियां जुड़ी हों। ऑल्टमैन ने कहा कि इतिहास के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि एआई जैसी किसी चीज की पूरी शक्ति को किसी एक कंपनी या देश के हाथों में केंद्रित कर देना बेहद विनाशकारी कदम साबित हो सकता है, भले ही वह सुरक्षा के नाम पर क्यों न हो।

    उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता एआई के व्यापक लोकतंत्रीकरण है ताकि लोग इन उपकरणों का उपयोग कर सकें। इसका यह अर्थ नहीं है कि जिम्मेदारी से समझौता किया जाए या शुरुआत में सतर्कता न बरती जाए, लेकिन इसका मतलब यह जरूर है कि लोगों को इस तकनीक के साथ प्रयोग करने और नए उपयोग विकसित करने का अधिकार दिया जाए।

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