Electric Warship: भारत का पहला इलेक्ट्रिक युद्धपोत बनाएगा रोल्स-रॉयस, भारतीय नौसेना के साथ साझेदारी की तैयारी

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Fri, 10 Oct 2025 03:47 PM IST
सार

Rolls Royce Electric Warship For Indian Navy:

भारत की नौसेना अब भविष्य की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। ब्रिटिश इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर देश का पहला इलेक्ट्रिक वॉरशिप डिजाइन और विकसित करने में सहयोग की इच्छा जताई है।

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rolls royce to make electric warship for Indian navy announces collaboration
नौसेना के पास जल्द होगा इलेक्ट्रिक वॉर शिप - फोटो : AI

    विस्तार

    रोल्स-रॉयस भारतीय नौसेना के साथ मिलकर देश का पहला इलेक्ट्रिक युद्धपोत विकसित कर सकता है। यह कदम भारत को एक सस्टेनेबल और भविष्य के लिए तैयार नेवल पावर बनाने की दिशा में बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।

    रोल्स-रॉयस डिफेंस के इंडिया और साउथ ईस्ट एशिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अभिषेक सिंह ने कहा कि कंपनी के पास ऐसे आधुनिक हाइब्रिड-इलेक्ट्रिक और फुल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम हैं, जो भारत की नौसेना के आधुनिकीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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    रोल्स-रॉयस की तकनीक कैसे करेगी मदद

    रोल्स-रॉयस का MT30 मरीन गैस टरबाइन इंजन, जो ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर प्रिंस ऑफ व्हेल्स को शक्ति देता है, इसी तकनीक का हिस्सा है। यह इंजन 36 मेगावाट की शक्ति उत्पन्न करता है, और जहाज का इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम 109 मेगावाट की कुल आउटपुट क्षमता रखता है, जो एक छोटे शहर को बिजली देने के बराबर है।

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    कंपनी के अधिकारी एलेक्स जीनो ने कहा कि भारत में ब्रिटिश नेवी के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का आगमन भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए एक बेहतरीन अवसर है, जिससे नौसेना के अधिकारी रोल्स-रॉयस की विश्वस्तरीय समुद्री तकनीक को करीब से देख सकें।

    भारत में लंबे समय से सक्रिय है कंपनी

    रोल्स-रॉयस भारत में 90 साल से सक्रिय है और देश में मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन, इंजीनियरिंग नेटवर्क और शैक्षणिक साझेदारियां बना चुकी है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना, नौसेना, कोस्ट गार्ड और थल सेना के प्लेटफॉर्म्स पर 1,400 से अधिक रोल्स-रॉयस इंजन कार्यरत हैं। कंपनी अब भारत में उन्नत विनिर्माण और रक्षा इंजीनियरिंग क्षमताओं का विस्तार कर रही है ताकि वह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के अभियानों में सक्रिय योगदान दे सके।

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