रिलायंस जियो-आरकॉम की डील की वैधता 6 महीने बढ़ी

रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस जियो ने अनिल अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी आरकॉम की वायरलेस परिसंपत्तियां बेचने के लिये हुये आपसी समझौते की अवधि को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है कि जब कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के स्पेक्ट्रम को जियो को बेचने के सौदे को दूरसंचार विभाग की मंजूरी की प्रतीक्षा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, "उसकी अनुषंगी कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड ने आरकॉम लिमिटेड और उसकी सहयोगियों की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिये बाध्यकारी समझौते की अवधि को बढ़ा दिया है।"
आरकॉम ने अलग सूचना में कहा कि कंपनी और रिलायंस जियो ने टावर, फाइबर, एमसीएन और आरकॉम के स्पेक्ट्रम की बिक्री के समझौते की अवधि को बढ़ाकर 28 जून 2019 कर दिया है। यह समझौता 28 दिसंबर 2017 को हुआ था।
गौरतलब है कि रिलायंस जियो इंफोकॉम प्रीमियम 800MHz बैंड में पांच यूनिट्स स्पेक्ट्रम के लिए रिलायंस कम्यूनिकेशन पर निर्भर है। यही स्पेक्ट्रम कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश 4G LTE के लिए जरूरी हैं और जियो के पास 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में 4जी एयरवेव्स की 3.8 यूनिट्स हैं।
स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग अग्रीमेंट पर साल 2017 में किए गए दस्तखत के मुताबिक आरकॉम अपनी 4जी एयरवेव्स की 112.4 यूनिट्स जियो को बेच सकती है। इसके बदले आरकॉम को 18,000 करोड़ रुपये भी मिलेंगे। बता दें कि आरकॉम पर 46,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।