Passkey Vs Password: डिजिटल अकाउंट को सेफ बनाने में कौन बेहतर, किसमें मिलेगी फुल-प्रूफ सिक्योरिटी? यहां जानें

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Wed, 10 Dec 2025 02:32 PM IST
सार

Passkey Vs Password: Difference:

डिजिटल अकाउंट की सुरक्षा के लिए अब पासवर्ड का दौर खत्म हो रहा है। हर दिन बढ़ते हैकिंग और साइबर फ्रॉड के बीच तकनीक ने Passkey का एक नया और बेहद सुरक्षित विकल्प दिया है। यह न सिर्फ पासवर्ड से ज्यादा सुरक्षित है, बल्कि इसे चोरी या हैक करना लगभग नामुमकिन है।

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बायोमैट्रिक डेटा (सांकेतिक) - फोटो : फ्रीपिक

    विस्तार

    पासवर्ड से तो आप भली-भांती परीचित होंगे। जीमेल में साइन करना हो या अपना फेसबुक अकाउंट चेक करना हो, बैंक अकाउंट में लॉग-इन करते समय पासवर्ड मांगा जाता है। डिजिटल डिवाइस की दुनिया में पासवर्ड का इस्तेमाल दशकों से होता आ रहा है। हालांकि, अब आपके डिजिटल अकाउंट को सेफ रखने की यह तकनीक पुरानी हो गई है और इसकी कई खामियां भी सामने आ रही हैं। हैकर्स ने एआई की मदद से पासवर्ड का तोड़ निकाल लिया है और इसी वजह से डिजिटल क्राइम भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में तकनीक ने पासवर्ड से भी ज्यादा सुरक्षित ऑप्शन हमें दिया है जिसे Passkey कहते हैं। तो चलिए जानते हैं Passkey क्या है और यह Password से कैसे अलग है।

    क्या है Passkey और कहां से आया?

    Passkey का कॉन्सेप्ट 2009 में ही आ गया था, लेकिन इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने का श्रेय FIDO (फास्ट आडेंटिटी ऑनलाइन) अलायंस को जाता है, जिसमें Microsoft, Apple और Google जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। Google ने अकाउंट लॉग-इन करने के लिए Passkey को 2023 से रोल आउट करना शुरू कर दिया था। Passkey का काम Password जैसा ही है, लेकिन इसके काम करने का तरीका और तकनीक बिल्कुल अलग है। Passkey एक नई तकनीक है जो पारंपरिक पासवर्ड से पूरी तरह अलग है। Passkey यूजर के डिवाइस जैसे फोन या कंप्यूटर में क्रिप्टोग्राफिक फॉर्मेट में स्टोर होती है, जो उसके बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट या फेस ID) या डिवाइस PIN से लिंक होती है। इसमें यूजर को पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ती। आसान भाषा में समझें तो आपके फोन पर आने वाला फिंगरप्रिंट और फेस अनलॉक वाला सिस्टम ही Passkey है।

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    Passkey डिवाइस में स्टोर होता है
    Passkey डिवाइस में स्टोर होता है - फोटो : apple

    इसका फायदा ये है कि कोई आपकी Passkey का पता लगा ही नहीं सकता। Passkey किसी को दिखाई या बताई नहीं जा सकती क्योंकि इसमें पारंपरिक पासवर्ड जैसे अल्फान्यूमेरीक डिजिट्स नहीं होते। ऐसे में हैकर्स के लिए इसका पता लगा पाना नामुमकिन हो जाता है। यानी अगर आपका डिवाइस गुम भी हो जाए तो उसके Passkey का किसी को कोई सुराग नहीं मिलेगा। इसके, अलावा कोई दूसरा यूजर आपके Passkey का इस्तेमाल भी नहीं कर सकता, क्योंकि ये हर यूजर के लिए एकदम यूनिक होता है।

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    Password और Passkey में अंतर

    जैसा कि हमने पहले बताया Password और Passkey में सबसे बड़ा अंतर तकनीक का है। Password अल्फान्यूमेरीक डिजिट्स वाली पुरानी तकनीक पर आधारित है, जबकि Passkey में अधिक सिक्योर क्रिप्टोग्राफिक प्रोटेक्शन मिलता है, जिसे केवल आपके बायोमेट्रिक डेटा से एक्सेस किया जा सकता है। Password आपके डिवाइस और वेबसाइट या एप के सर्वर पर स्टोर होता है। अगर हैकर सर्वर तक पहुंच बना लेते हैं तो वे आपका पासवर्ड भी जान सकते हैं। ऐसे में Password के हैक होने का खतरा हमेशा बना रहता है। दूसरी ओर, Passkey एनक्रिप्डेट कोड के तौर पर दोनों जगह स्टोर होता है। अगर हैकर्स इसे चुराने की भी कोशिश करें तो वह बिना यूजर डिवाइस के अकाउंट एक्सेस ही नहीं कर सकते। इस वजह से पासवर्ड की तुलना में Passkey फिशिंग या पासवर्ड गेसिंग जैसे हमलों से सुरक्षित रहते हैं।

    क्या Passkey में किसी तरह की कमी होती है?

    Passkey में फिलहाल किसी तरह की किसी एक डिवाइस पर बनाया गया Passkey किसी दूसरे डिवाइस पर लॉगइन करने पर काम नहीं करेगा। अगर आपने अपने फोन में फेसबुक लॉग-इन करने के लिए Passkey बनाई है, तो दूसरे डिवाइस पर उसी Passkey से लॉगइन नहीं कर पाएंगे। दूसरे डिवाइस से Passkey के जरिए तभी लॉगइन कर पाएंगे जब बनेगी जब आप खुद उस डिवाइस पर नई Passkey बनाएंगे। इससे अकाउंट को हैकिंग से तगड़ी प्रोटेक्शन मिलती है।

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