Online Fraud: दीपावली का 'बंपर ऑफर' पड़ सकता है महंगा, क्लिक करते ही खाते से उड़ जाएगी मेहनत की कमाई

Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्लीHarendra Chaudhary
Wed, 27 Oct 2021 06:28 PM IST
सार

ऑनलाइन बाज़ार होने के साथ ही साइबर अपराध भी बढ़ने लगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक़ 2018 में देश में साइबर अपराध के 27,248 मामले दर्ज किये गये थे। 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 44,735 तक पहुंच गया। कोरोना काल में भी साइबर अपराधों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2020 में साइबर अपराध के मामले 11.8 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 50,035 तक पहुंच गए...

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Online fraud cases rise during festival season
online fraud - फोटो : for reference only

    विस्तार

    दीपावली का त्योहार आ गया है और इस अवसर पर लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। भीड़भाड़ से बचने और बड़ी छूट पाने के चक्कर में लोग ऑनलाइन शॉपिंग को बहुत प्रमुखता दे रहे हैं। लोगों के इस मूड को भांपते हुए बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह के ऑफर दे रही हैं। कहीं एक सामान की खरीद पर 80-90 फीसदी तक की छूट या ऑफर दिया जा रहे हैं तो कहीं महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स सामान खरीदने के लिए शून्य ब्याज दर पर कर्ज देने का ऑफर दिया जा रहा है। लेकिन ऐसे किसी भी बंपर ऑफर पर क्लिक करते समय ग्राहकों को बेहद सावधान रहना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि बिलकुल असली जैसा दिखने वाला ऑफर कोई फिशिंग लिंक हो और इस पर क्लिक करते ही आपके बैंक खाते से मेहनत की कमाई गायब हो जाए।

    दरअसल, अब ग्राहकों को लूटने के लिए धोखेबाजों ने ऐसे-ऐसे नए-नये तरीके इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं, जिनसे असली-नकली की पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। कई बार फर्जीवाड़ा करने के लिए असली कंपनी के रूप-रंग और डिजाइन की हूबहू वेबसाइट भी बना दी जाती है। इन पर क्लिक करते ही आपकी सारी गोपनीय जानकारी धोखेबाजों तक पहुंच जाती है। ऐसे में किसी भी ऑफर पर क्लिक करने से पहले बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

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    कैसे बचें, क्या करें

    बजाज फाइनेंस के एक अधिकारी ने बताया कि यदि ग्राहक थोड़ा सा सावधान रहें तो ऐसे किसी फर्जीवाड़े से बचा जा सकता है। ऑनलाइन सर्च करते समय किसी कंपनी की वेबसाइट पर तभी क्लिक करना चाहिए, जब इसकी वेबसाइट https:// के साथ खुल रही हो। सभी आधिकारिक कंपनियां इसी डोमेन एक्सटेंशन का इस्तेमाल करती हैं और इस पर फर्जीवाड़े की संभावना काफी कम होती है।

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    किसी भी कंपनी का कोई ऑफर भारी छूट या बेहद सस्ते दामों पर देने का वादा किया जा रहा है तो इसको कंपनी के सोशल मीडिया अकाउंट की अवश्य जांच कर लें। कंपनियों के सोशल मीडिया अकाउंट ज्यादातर मामले में ब्लू टिक वाले यानी वैरिफाइड होते हैं। इन पर दी गई जानकारी आधिकारिक होती है। फर्जी कंपनियों के लिए इस ब्लू टिक को पाना आसान नहीं होता, लिहाजा इस पर भरोसा किया जा सकता है।

    इसके बाद भी यदि कुछ शंका हो तो समय निकालकर कंपनी के आसपास की शाखा या शोरूम पर जाकर ऑनलाइन बाज़ार के लिए दिए जा रहे ऑफर्स की जानकारी अवश्य लें। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार के दामों में आ रहे अंतर और फायदे के बारे में आपको बेहतर जानकारी भी मिल जायेगी।

    गूगल प्ले स्टोर पर भी कई फर्जी एप

    किसी भी ऑनलाइन ऑफर के मेसेज पर क्लिक करने से बचें। साथ ही किसी कंपनी के एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने से पहले भी सावधानी बरतें। गूगल प्ले स्टोर पर भी असली कंपनी के जैसे दिखते हुए अनेक एप उपलब्ध होते हैं। असली एप की पहचान न होने और गलत एप पर रजिस्टर करते समय आप कई गंभीर जानकारियां ठगों तक पहुंचा देते हैं। आपको इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

    अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर कंपनियां अपनी योजनाओं की जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी अवश्य देती हैं। इसलिए किसी ऑफर की जानकारी लेने के लिए कंपनी की वेबसाइट भी चेक कर लेना चाहिए।

    किसी कंपनी के ऑफर के बारे में पता करने के लिए उसके कस्टमर केयर पर फोन करना भी अच्छा विकल्प होता है, लेकिन ध्यान रखें कि किसी कंपनी के कस्टमर केयर का नंबर आप गूगल पर खोजने से बचें। क्योंकि ज्यादातर मामलों में ऐसे फ्रॉड करने वाले गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर डाल देते हैं। इस नंबर पर आपको वही फर्जी कहानी सुनाई जा सकती है जो लोगों को लूटने के लिए बनायी गई हो। ऐसे में कोशिश करें कि असली नंबर का पता करने के लिए कई सोर्स पर निर्भर रहें, एक सोर्स से नंबर लेकर उसे किसी अन्य सोर्स से क्रॉस चेक अवश्य कर लें।

    इतना बढ़ चुके ऑनलाइन अपराध

    ऑनलाइन बाज़ार होने के साथ ही साइबर अपराध भी बढ़ने लगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक़ 2018 में देश में साइबर अपराध के 27,248 मामले दर्ज किये गये थे। 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 44,735 तक पहुंच गया। कोरोना काल में भी साइबर अपराधों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्ष 2020 में साइबर अपराध के मामले 11.8 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 50,035 तक पहुंच गए। 2020 के साइबर अपराध के कुल मामलों में से 60 फीसदी का उद्देश्य फ्रॉड करना था। इसके बाद 6.6 फीसदी का उद्देश्य महिलाओं से छेड़छाड़ और 4.9 फीसदी का उद्देश्य धनउगाही करना था।

    यहां दें लूट की जानकारी

    यदि इसके बाद भी आपके साथ ऑनलाइन खरीद में कोई धोखाधड़ी हो जाती है तो आप साइबर क्राइम विभाग में इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 155-260 पर फोन भी किया जा सकता है। साइबर सेल की ऑनलाइन शाखा पर भी इसका केस दर्ज कराया जा सकता है। साइबर सेल की सक्रियता से हाल के दिनों में कई पीड़ितों के पैसे वापस मिले हैं, आप इस विकल्प को आजमा सकते हैं।

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