NVIDIA Groq Deal: एनवीडिया ने की अब तक की सबसे बड़ी डील, एआई इंफरेंस चिप्स पर जोर
NVIDIA Acquisition:
एनवीडिया ने एआई इंफरेंस चिप्स में विशेषज्ञ स्टार्टअप ने AI इंफरेंस चिप्स में विशेषज्ञ स्टार्टअप Groq के एसेट्स को करीब 20 अरब डॉलर में खरीदने का समझौता किया है। यह एनवीडिया का अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण माना जा रहा है। जानिए इस सौदे से क्या-क्या बदलाव होने की उम्मीद है?

विस्तार
सीएनबीसी समेत कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया की सबसे मूल्यवान चिप कंपनी एनवीडिया ने AI स्टार्टअप ग्रोक के एसेट्स को लगभग 20 अरब डॉलर नकद में खरीदने पर सहमति जताई है। अगर ये आंकड़ा सही रहा तो, एनवीडिया अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण बन सकता है। इससे पहले 2019 में मेलानॉक्स कंपनी ने सबसे बड़ी डील की थी। करीब सात अरब डॉलर की। ग्रोक एआई इंफरेंस चिप्स में स्पेशलाइज्ड कंपनी है। रिपोर्ट्स की माने तो ग्रोक की LPU (Language Processing Unit) चिप्स बड़े भाषा मॉडल (LLM) को 10 गुना तेज और 10 गुना कम ऊर्जा में चलाने में सक्षम हैं।
एआई इंफरेंस का मतलब है ट्रेन किए गए एआई मॉडल्स से रियल-टाइम जवाब निकालना, जो चैटबॉट, सर्च और एआई असिस्टेंट्स के लिए बेहद जरूरी है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह सौदा नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग मॉडल पर आधारित है। एनवीडिया, ग्रोक की इंफरेस टेक्नोलॉजी को लाइसेंस करेगी। ग्रोक के फाउंडर जोनाथन रॉस और सीनियर इंजीनियर NVIDIA में शामिल होंगे, लेकिन ग्रोकक्लाउड बिजनेस इस डील का हिस्सा नहीं है क्योंकि ग्रोक एक स्वतंत्र कंपनी के रूप में काम करती रहेगी।
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एनवीडिया पहले से ही एआई मॉडल ट्रेनिंग में लीडर है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इंफरेंस सेगमेंट में उसे एएमडी, ग्रोक और Cerebras जैसी कंपनियों से कड़ी चुनौती मिल रही थी। इस डील के जरिए एनवीडिया अपनी लो-लेटेंसी और रियल-टाइम AI प्रोसेसिंग क्षमता को और मजबूत करना चाहती है। एनवीडिया के सीईओ जेनसन ह्वांग ने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर कहा कि ग्रोक की टेक्नोलॉजी को एनवीडिया के एआई फैक्ट्री आर्किटेक्चर में जोड़ा जाएगा।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक सितंबर 2025 में ग्रोक के 750 डॉलर मिलियन फंडिंग जुटाई। उस दौरान कंपनी की वैन्यूएशन 6.9 डॉलर अरब थी। एक साल पहले यह सिर्फ 2.8 डॉलर अरब थी। ये दिखाता है कि एआई इंफरेंस चिप्स की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है।
हालांकि NVIDIA और Groq ने 20 अरब डॉलर के आंकड़े पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार इस डील पर एंटीट्रस्ट रेगुलेटर्स की नजर रह सकती है। यह सौदा उस बढ़ते ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है, जहां बड़ी टेक कंपनियां पूरी कंपनी खरीदने के बजाय टेक्नोलॉजी और टैलेंट पर फोकस कर रही हैं। हाल के उदाहरणों में माइक्रोसॉफ्ट और मेटा की डील्स भी शामिल है।
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