Pegasus: सरकारी क्लाइंट को पेगासस नहीं बेचेगी कंपनी, विवाद के बाद लिया फैसला

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Fri, 30 Jul 2021 12:25 PM IST
सार

पेगासस के जरिए 50 देशों में पत्रकारों, नेताओं, कार्यकर्ताओं और कारोबारियों से जुडे़ 50,000 फोन नंबरों की जासूसी कराई गई। इनमें 189 मीडियाकर्मी, 600 से ज्यादा नेता और सरकारी कर्मचारी, 65 कारोबारी अधिकारी और 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं,

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NSO Group blocks government clients from using pegasus spyware
pegasus - फोटो : kaspersky

    विस्तार

    हाल ही में कई देशों की सरकारों द्वारा लोगों की जासूसी की रिपोर्ट सामने आने के बाद इजरायल की साइबर सिक्योरिटी फर्म एनएसओ ने दुनियाभर की सरकारों को पेगासस सॉफ्टवेयर की बिक्री पर रोक लगा दी है। भारत समेत कई देशों में जासूसी को लेकर मचे बवाल के बाद कंपनी ने यह फैसला लिया है।

    एनपीआर की रिपोर्ट के मुताबिक एनएसओ ने कहा है उसने स्पाइवेयर के गलत इस्तेमाल के बाद पेगासस की बिक्री बंद कर दी है। कंपनी ने एक कर्मचारी ने नाम ना बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है। एनएसओ ने सरकारी क्लाइंट्स को ब्लॉक कर दिया है।

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    एनएसओ ग्रुप ने भले ही सरकारी क्लाइंट्स को पेगासस ना बेचने का फैसला लिया है लेकिन यह अभी तक एक राज ही है कि दुनिया की किन-किन सरकारों को पहले पेगासस बेचा गया है। बता दें कि हाल ही में इजरायल की अथॉरिटीज ने जांच के लिए एनएसओ के दफ्तर का दौरा किया है।

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    एनपीआर के अनुसार एनएसओ का कहना है कि 40 देशों में इसके 60 ग्राहक हैं और ये सभी खुफिया एजेंसियां, कानून लागू करने वाली संस्थाएं और सेनाएं हैं। एनएसओ का यह भी कहना है कि हाल ही में पेगासस स्पाइवेयर पर मीडिया रिपोर्ट्स से पहले उसने दुरुपयोग को लेकर अब तक पांच सरकारी कंपनियों के सॉफ्टवेयर को ब्लॉक कर दिया है।

    एनएसओ का कहना है कि वह केवल आतंकवाद और अपराध से लड़ने के उद्देश्य से कुछ देशों को अपने स्पाइवेयर बेचती है, लेकिन हाल की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एनएसओ ने अपने नागरिकों की निगरानी में शामिल देशों के साथ काम किया और दर्जनों स्मार्टफोन इसके स्पाइवेयर से प्रभावित पाए गए।

    बता दें हाल ही में फॉरबिडेन स्टोरीज और मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत 17 मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में कहा गया है कि पेगासस के जरिए 50 देशों में पत्रकारों, नेताओं, कार्यकर्ताओं और कारोबारियों से जुडे़ 50,000 फोन नंबरों की जासूसी कराई गई। इनमें 189 मीडियाकर्मी, 600 से ज्यादा नेता और सरकारी कर्मचारी, 65 कारोबारी अधिकारी और 85 मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हैं, जिनके फोन पर नजर रखी गई।

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