Social Media: ब्रिटेन में सोशल मीडिया पर 'सिगरेट' जैसा वॉर्निंग लेबल, प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने की मांग
क्या सोशल मीडिया बच्चों के लिए उतना ही खतरनाक होता जा रहा है जितना कभी सिगरेट को माना गया था? इसी सवाल को केंद्र में रखकर ब्रिटेन के एक पेरेंटिंग प्लेटफॉर्म ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग करते हुए एक तीखी राष्ट्रीय मुहिम शुरू की है।

विस्तार
ब्रिटेन के चर्चित पेरेंटिंग प्लेटफॉर्म "मम्सनेट" ने एक राष्ट्रीय विज्ञापन अभियान शुरू किया है, जिसमें 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इस अभियान की खास बात यह है कि इसमें सिगरेट के पैकेटों पर छपने वाली स्वास्थ्य चेतावनियों की तर्ज पर तीखे और चौंकाने वाले संदेशों का इस्तेमाल किया गया है।
बिलबोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जारी विज्ञापनों में दावा किया गया है कि रोजाना तीन घंटे या उससे अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में आत्म-हानि की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह फोन की लत को किशोरों में चिंता (एंग्जायटी) के जोखिम को दोगुना करने वाला बताया गया है। विज्ञापनों में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से खान-पान संबंधी विकारों का खतरा बढ़ सकता है और इसकी लत आत्महत्या जैसे गंभीर व्यवहार से भी जुड़ी हो सकती है।
इन विज्ञापनों में लोगों से अपने सांसदों को ईमेल कर “अंडर-16 सोशल मीडिया बैन” की मांग करने का आह्वान किया गया है।
सोशल मीडिया से बच्चों में बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याएं
इस अभियान की घोषणा 'मम्सनेट' की संस्थापक जस्टिन रॉबर्ट्स ने की। उनका मानना है कि कई परिवार रोजाना सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल माता-पिता की जिम्मेदारी या अनुशासन की कमी का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों को ऐसे डिजिटल उत्पादों के संपर्क में लाया जा रहा है जिन्हें जानबूझकर लत लगाने वाला बनाया गया है।
रॉबर्ट्स ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों में अनियंत्रित इस्तेमाल, नींद की कमी, बढ़ती चिंता और आत्मसम्मान में गिरावट जैसे असर को प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं, जबकि संबंधित कंपनियां इससे आर्थिक लाभ कमा रही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बेहतर पैरेंटिंग या अतिरिक्त मार्गदर्शन से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है, क्योंकि यह एक ऐसे व्यावसायिक मॉडल से जुड़ा है जो लत पर आधारित है।
यह अभियान मम्सनेट की पहले से चल रही “रेज अगेन्स्ट द स्क्रीन” पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युवाओं के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियमन की मांग करना है। 2025 में प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में 92 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर चिंता जताई, जबकि 60 प्रतिशत से अधिक का मानना था कि उनका बच्चा फोन या सोशल मीडिया का आदी हो चुका है।
कुछ हफ्तों में नियम ला सकती है सरकार
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह ही संकेत दिए थे कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने वाले कड़े नियम महीनों में नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों के भीतर लाए जा सकते हैं। हालांकि, सरकार की योजना पूर्ण प्रतिबंध की है या केवल कड़े नियंत्रण की, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सरकार के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि माता-पिता की चिंताएं जायज हैं और वे इस दिशा में सही कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मम्सनेट अब आम जनता से अपने सांसदों को ईमेल भेजकर इस प्रतिबंध की मांग को तेज करने की अपील कर रहा है।
दुनियाभर में बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती
- दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट एक्ट को लागू किया है। इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
- डेनमार्क की असेंबली ने नवंबर 2025 में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध लगाने का समझौता किया गया। हालांकि, 13-14 साल के बच्चों को माता-पिता की अनुमति से छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
- इस साल जनवरी में फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का बिल पास किया।
- मलेशियाई सरकार ने भी सभी प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए बैन करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, स्पेन ने भी 16 साल से कम उम्र के नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस बंद करने की योजना की घोषणा की है।
- ग्रीस और स्लोवेनिया भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का बिल ला सकते हैं। वहीं, नॉर्वे में सोशल मीडिया के लिए सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 में बच्चों और किशोरों में बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताई गई है। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया एप्स के लिए उम्र के हिसाब से सीमाएं तय करने और प्लेटफॉर्म्स को सख्त नियम लागू करने की सिफारिश की गई है।
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