Mouse: ये काम भी कर सकता है आपका कंप्यूटर माउस! रिसर्च ने लोगों को चौंकाया, रहें सावधान
Computer Mouse Can Hear Your Voice: अगर आप सोचते हैं कि कंप्यूटर माउस सिर्फ क्लिक और स्क्रॉल के काम आता है तो फिर सोच बदल दें। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च रिपोर्ट पेश की है जिसमें बताया गया है कि कैसे कंप्यूटर से लगा माउस आपकी आवाज को सुन सकता है।

विस्तार
आज से करीब 60 साल पहले 1964 में दुनिया के पहले कंप्यूटर माउस का आविस्कार किया गया था। माउस के आने के कंप्यूटर को चलाना पहले से आसान हो गया। पहले माउस डिब्बे के आकार के और काफी बड़े और भारी होते थे, लेकिन समय के साथ इनमें बदलाव हुआ और आज कल के माउस लेजर लाइट और सेंसर तकनीक के साथ आते हैं। माउस मोशन तकनीक पर काम करता है। आपने अपने कंप्यूटर के माउस के नीचे जलने वाली लाल रंग की लाइट पर जरूर गौर किया होगा। यह लाइट माउस के मूवमेंट को कैप्चर करती है जिससे आप कंप्यूटर की स्क्रीन पर स्क्रॉल कर पाते हैं। लेकिन अब यही तकनीक प्राइवेसी के लिए परेशानी बनकर उभर रही है।
जी हां, जिस माउस से आप कंप्यूटर चलाते हैं उसी से आपकी जासूसी भी हो सकती है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने बताया है कि माउस में लगे सेंसेटिव सेंसर्स का इस्तेमाल हैकर्स जासूसी के लिए कर सकते हैं। इस रिसर्च ने टेक जगत में हलचल मचा दी है। लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है कि माउस का ऐसा इस्तेमाल भी हो सकता है।
कैसे जासूसी कर सकता है माउस?
जैसा की हमने पहले बताया कि माउस में सेंसेटिव सेंसर लगे होते हैं, जो बेहद सूक्ष्म वाइब्रेशन भी पकड़ लेते हैं। इन्हें विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए माइक्रोफोन जैसा उपयोग किया जा सकता है। रिसर्च में बताया गया कि सेंसर माइक के जैसे अकॉस्टिक वाइब्रेशन्स को पकड़ सकते हैं। अगर वाइब्रेशन को रिकॉर्ड कर लें तो इन्हें सॉफ्टवेयर की मदद से साफ-साफ सुना जा सकता है।
प्राइवेसी को खतरे में डाल सकता है माउस
टीम ने रिसर्च में पाया कि यह आवाज की आवाज की फ्रीक्वेंस के आधार पर शब्दों की पहचान लगभग 61% तक सही बैठी। कुल मिलाकर शब्दों को पूरी तरह स्पष्ट करना मुश्किल रहा, लेकिन अंकों और संख्याओं की पहचान आसान थी, जो क्रेडिट-कार्ड जैसे संवेदनशील आंकड़ों के लिए चिंताजनक है।
एआई की मदद से हो सकती है पहचान
शोधकर्ताओं ने रिकॉर्ड किए गए सिग्नल्स को एआई तकनीक से लैस सॉफ्टवेयर से शोर मुक्त किया और फिर AI-मॉडल से शब्दों का अनुमान लगवाया। इतना करने के बाद भी शब्दों की शुद्धता सीमित रही, पर नंबर और डिजिटल इनफॉर्मेशन सटीकता से पता लग गए।
रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने इस हमले की सीमाएं भी बताईं। माउस को सपाट, साफ सतह पर होना जरूरी है। अगर माउस-पैड या कवर हो तो संवेदनशीलता कम हो जाती है। आस-पास का शोर और पर्यावरणीय ध्वनि भी रिकॉर्डिंग को प्रभावित करती है। सबसे बड़ी शर्त यह है कि हमलावर को पहले आपके सिस्टम को इंफेक्ट करना होगा, यानी मैलवेयर के जरिए ही यह तरीका काम कर पाता है। पर चूंकि माउस जैसे एक्सटरनल पेरिफेरल्स की सुरक्षा के लिए कोई सॉफ्टवेयर नहीं होते इसलिए इनकी जांच नहीं होती है, इसलिए ये हैकिंग के लिए कमजोर कड़ी बन सकते हैं।
सेफ रहने के लिए करें ये काम
- अनजान सॉफ्टवेयर या अटैचमेंट न खोलें।
- नियमित रूप से एंटी-मैलवेयर स्कैन चलाएं और पेरिफेरल्स के ड्राइवर ऑफिशियल सोर्स से ही लें।
- महत्वपूर्ण बातचीत करते समय अनावश्यक पेरिफेरल्स डिस्कनेक्ट कर दें।
- सिस्टम और सॉफ्टवेयर अपडेट रखें ताकि चूक की गुंजाईश कम हो।