Microsoft ने कर्मचारियों के AI इस्तेमाल पर लगाई सीमा, तय की टोकन लिमिट; जानिए कंपनी ने क्यों लिया यह फैसला
AI Token Limit:
हाल तक कंपनियां एआई का जमकर इस्तेमाल कर रही थी, लेकिन अब इसकी बढ़ती लागत की वजह से माइक्रोसॉफ्ट ने अपने ही कर्मचारियों के एआई उपयोग पर पाबंदी लगा दी है। आखिर एआई में अरबों डॉलर निवेश करने वाली दिग्गज टेक कंपनी को अपने ही कर्मचारियों के हाथ क्यों खींचने पड़ रहे हैं? आइए जानते हैं इस लेख में विस्तार से...

विस्तार
Microsoft AI Policy:
अब तक कंपनियां और संगठन ज्यादा से ज्यादा एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसे टेक इंडस्ट्री में टोकनमैक्सिंग का नाम दिया गया है। हालांकि एआई मॉडल को चलाने और इंफरेंस की बढ़ती लागत ने कंपनियों को अपना बजट संभालने पर मजबूर कर दिया है।
इसी में टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट का भी एक बड़ा फैसला सामने आया है। जो इंडस्ट्री में आने वाले बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। कंपनी ने अपने ही कर्मचारियों के एआई इस्तेमाल को सीमित करने का फैसला लिया है।
क्या है पूरा मामला?
- माइक्रोसॉफ्ट के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट जे पारीख ने हाल ही में कंपनी के कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए GitHub Copilot का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हम टोकन का कितना उपभोग कर रहे हैं।
- अब से माइक्रोसॉफ्ट के हर एक डिपार्टमेंट को टोकन का एक निश्चित पूल (Fixed Pool) आवंटित किया जाएगा। इसके बाद उनके जरूरत के हिसाब से इसे बढ़ाया और घटाया जाएगा, लेकिन अब कोई भी बेधड़क या असीमित इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।
फैसले से कर्मचारियों में बढ़ी चिंता और सवाल
ईमेल के बाद कंपनी के एक अनाम कर्मचारी ने एक मीडिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बात बहुत कुछ बयां करती है कि जिस कंपनी ने AI में इतना भारी निवेश किया है और इतने AI इंफरेंस को सब्सिडी दी है, वह अब अपने ही कर्मचारियों को खर्च कम करने और AI का उपयोग सीमित करने की सलाह दे रही है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि माइक्रोसाॅफ्ट जैसी कंपनी का यह फैसला साबित करता है कि एआई टूल्स का अधिक इस्तेमाल यानी टोकनमैक्सिंग अब कंपनियों के जेब पर भी भारी पड़ रहा है। भले ही माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां बाजार में AI टूल्स बेच रही हों, लेकिन अंदरूनी स्तर पर बढ़ती लागत को नियंत्रित करना अब उनकी प्राथमिकता बन गया है।