रिटायरमेंट तक घर से काम कर सकेंगे Microsoft के कर्मचारी, कम सैलरी से करना पड़ सकता है समझौता
वर्क फ्रॉम होम में मिल सकती है कम सैलरी
घर पर ऑफिस का इंतजाम करेगी कंपनी

विस्तार
टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारी अब रिटायरमेंट तक घर से काम कर सकेंगे, हालांकि यह नियम सभी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। दूसरे शब्दों में कहें तो यदि कोई कर्मचारी हमेशा के लिए घर से काम करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है। कंपनी इसका विरोध नहीं करेगी। अमेरिकी टेक वेबसाइट द वर्ज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि माइक्रोसॉफ्ट के अधिकतर कर्मचारी फिलहाल घर से काम कर रहे हैं और कंपनी जनवरी 2021 तक अपने दफ्तर को नहीं खोलने वाली है, लेकिन ऑफिस खुलने के बाद भी जो कर्मचारी घर से परमानेंट काम करना चाहते हैं, वे इसके लिए आजाद हैं, हालांकि इसकी शर्त यह है कि उन्हेंऑफिस वाली जगह खाली करनी होगी।उदाहरण के तौर पर समझें तो यदि आप घर से काम करना चाहते हैं तो ऑफिस वाली कुर्सी आपको छोड़नी होगी।
मानव संसाधन प्रमुख कैथलीन होगन का कहना है कि कंपनी 50 फीसदी से कम कर्मचारियों को हमेशा के लिए वर्क फ्रॉम होम देने पर विचार कर रही है, हालांकि दफ्तर को पूरी तरह से बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि हम इसका वादा नहीं कर रहे हैं कि सभी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम मिलेगा। उदाहरण के तौर पर समझें तो माइक्रोसॉफ्ट के वे कर्मचारी घर से काम नहीं कर सकते जो लैब में काम करते हैं या फिर अन्य कर्मचारियों को ट्रेनिंग देते हैं।
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सैलरी पर पड़ेगा असर
जो कर्मचारी हमेशा के लिए घर से काम करना चाहेंगे उनकी सैलरी पर भी इसका असर पड़ेगा, हालांकि कंपनी खुद कर्मचारी के घर पर ऑफिस जैसा इंतजाम करेगी। माइक्रोसॉफ्ट में 163,000 हैं जिनमें से 96,000 अमेरिका में है। ये आंकड़े जून 2020 तक के हैं। बता दें कि इससे पहले ट्विटर और फेसबुक जैसी कंपनियों ने परमानेंट वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी है।
वर्क फ्रॉम होम में ऐसा लगता है जैसे नींद में काम कर रहे हों: सत्या नडेला
आपको याद दिलाते चलें कि हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने कहा है कि वे वर्क फ्रॉम होम से परेशान हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान कई बार ऐसा लगता है जैसे कि नींद में ही काम कर रहे हों। सत्या नडेला ने कहा कि काम के साथऑनलाइन मीटिंग काफी थकाने वालाकाम है।
ऐसे में कर्मचारियों को काम और निजी जीवन के बीच तालमेल बनाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऑनलाइन मीटिंग बहुत नुकसानदेह है। महज आधे घंटे की वीडियो मीटिंग में ही इंसान हद से ज्यादा थक जाता है, वह इसलिए क्योंकि इसमें काफी कॉन्सेंट्रेशन की जरूरत होती है।