Meta: मेटा का भारतीय कंपनी पर एक्शन, बंद किए 40 से अधिक फर्जी अकाउंट, चीन से जुड़े 900 अकाउंट्स भी किए बंद
मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक से चीन के एक अज्ञात फर्म द्वारा संचालित लगभग 900 फर्जी अकाउंट्स के नेटवर्क को भी हटाया है। ये फर्म इन अकाउंट्स का इस्तेमाल करके लोगों को बरगलाने और हैकिंग जैसी गतिविधियां करती थी।

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सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक भारतीय फर्म द्वारा संचालित 40 से अधिक अकाउंट्स को बंद कर दिया है। मेटा ने कहा कि इन अकाउंट्स को साइबररूट रिस्क एडवाइजरी द्वारा चलाया जा रहा था, जो कि सोशल इंजीनियरिंग और फिशिंग में लगे हुए थे। फर्म इन अकाउंट्स का इस्तेमाल करके लोगों को बरगलाने और हैकिंग जैसी गतिविधियां करती थी। मेटा ने इंस्टाग्राम और फेसबुक से चीन के एक अज्ञात फर्म द्वारा संचालित लगभग 900 फर्जी अकाउंट्स के नेटवर्क को भी हटा दिया है।
मेटा के अनुसार, फर्म की हैकिंग एक्टिविटीज भारत, कजाकिस्तान, जिबूती, सऊदी अरब, म्यान्मार, दक्षिण अफ्रीका और ताइवान जैसे देशों में व्यापार सरकारी अधिकारियों, वकीलों, डॉक्टरों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों पर केंद्रित थी। ये फर्म लोगों के फोन, कंप्यूटर और ऑनलाइन अकाउंट, सोशल मीडिया अकाउंट और ईमेल को हैक करने के फर्जी अकाउंट को संचालित कर रही थीं।
स्पूफ डोमेन का करते थे इस्तेमाल
इस फर्म द्वारा टारगेट के ऑनलाइन अकाउंट में लॉगिन क्रेडेंशियल्स जानकारी चुराने के लिए स्पूफ डोमेन का इस्तेमाल किया गया था। मेटा के अनुसार, साइबररूट ने दुनिया भर में लक्षित लोगों के साथ विश्वास हासिल करने और अधिक विश्वसनीय दिखने के लिए काल्पनिक व्यक्तित्व बनाने के लिए फर्जी अकाउंट्स का इस्तेमाल किया।
मेटा ने कहा कि "हमने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साइबररूट रिस्क एडवाइजरी प्राइवेट नामक एक भारतीय फर्म द्वारा संचालित 40 से अधिक अकाउंट्स के एक नेटवर्क को हटा दिया। हमारे एप्स पर सीधे मैलवेयर शेयर करने के बजाय, इस ग्रुप्स की गतिविधि मुख्य रूप से सोशल इंजीनियरिंग और फिशिंग के रूप में देखी गई है। इन गतिविधियों का उद्देश्य इंटरनेट पर विभिन्न ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए अपनी साख के नाम पर लोगों को बरगलाना था।
200 देशों के लोगों को बनाया निशाना
मेटा ने कहा कि पिछले साल से कंपनी ने भारत सहित दुनिया भर के स्पाइवेयर विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें चीन, रूस, इजराइल, संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इन फर्मों ने लगभग 200 देशों में लोगों को निशाना बनाया है।