मेटा म्यूज एआई में प्राइवेसी पर बड़ा सवाल: ऑनलाइन मिले 6,800 से ज्यादा चैट लिंक; कंपनी ने क्या कदम उठाए?

जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीजागृति शुक्ला
Wed, 21 Oct 2026 05:30 PM IST
सार

अगर आप निजी काम-काज, बिजनेस रिपोर्ट्स या नोट्स बनाने के लिए एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए। मेटा के म्यूज एआई असिस्टेंट में एक बेहद गंभीर सुरक्षा खामी सामने आई है, जिसके चलते हजारों यूजर्स की गोपनीय जानकारी सार्वजनिक हो गई है। आइए जानते हैं इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से...

Meta Suspends Muse AI Chat Sharing After Researchers Find 6,800 Links Online
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    मेटा के एआई असिस्टेंट म्यूज एआई की चैट शेयरिंग सुविधा में सुरक्षा से जुड़ी गंभीर खामी सामने आई है। साइबर सिक्योरिटी फर्म क्लारोक (Claroc) के शोधकर्ताओं को 6,800 से ज्यादा शेयर्ड बातचीत के लिंक ऑनलाइन मिले हैं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड, लोन आवेदन, बैंकिंग अलर्ट और कंपनियों की गोपनीय कारोबारी जानकारी जैसी संवेदनशील जानकारियां शामिल थीं। मामले की जांच के दौरान मेटा ने चैट शेयरिंग फीचर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

    मेटा म्यूज एआई के साथ क्या हुआ?

    • Ars Technica की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लारोक के सुरक्षा विशेषज्ञों ने म्यूज एआई में बातचीत शेयर करने के लिए लिंक बनाने के तरीके में एक कमजोरी की पहचान की। दूसरे एआई चैटबॉट्स की तरह म्यूज भी यूजर्स को अपनी बातचीत, इमेज और अन्य कंटेंट शेयर करने के लिए वेब लिंक बनाने की सुविधा देता था।
    • ऐसे लिंक के जरिए कोई यूजर अपनी बातचीत दूसरे व्यक्ति के साथ साझा कर सकता है, लेकिन अगर लिंक आसानी से खोजा जा सके, तो उसे उन लोगों तक पहुंचने का खतरा रहता है जिनके साथ बातचीत साझा करने का इरादा नहीं था।
    • शोधकर्ताओं के मुताबिक, म्यूज के शेयरिंग लिंक में बातचीत का टाइटल सीधे वेबसाइट एड्रेस में शामिल था। इससे इन लिंक्स को सार्वजनिक इंटरनेट रिकॉर्ड्स के जरिए खोजना आसान हो गया। इस तरीके से शोधकर्ताओं को लगभग 6,800 म्यूज यूजर्स की साझा बातचीत के लिंक मिले।
    • शोधकर्ताओं ने सैकड़ों लिंक्स की जांच की और पाया कि कुछ बातचीत में ऐसी जानकारियां मौजूद थीं, जिन्हें यूजर्स सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे।

    सिर्फ एक क्वेरी से मिल गए हजारों लिंक

    • इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बातचीत के लिंक ढूंढने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि ऐसे लिंक इकट्ठा करने में काफी समय लगेगा, लेकिन इसके लिए केवल एक क्वेरी पर्याप्त रही।
    • आमतौर पर शेयरिंग लिंक में रैंडम कैरेक्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि किसी बाहरी व्यक्ति के लिए उनका अनुमान लगाना मुश्किल हो। लेकिन अगर लिंक में बातचीत का टाइटल जैसी पहचान योग्य जानकारी शामिल हो, तो उसे सार्वजनिक रिकॉर्ड्स में खोजना आसान हो सकता है।
    • यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी लिंक का ऑनलाइन मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हर बातचीत को अनधिकृत व्यक्ति ने देखा या उसका दुरुपयोग किया। हालांकि, इस मामले में सामने आए उदाहरणों ने साझा की गई बातचीत की गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े किए।

    चैट्स में मिलीं वित्तीय और कारोबारी जानकारियां

    क्लारोक के शोधकर्ताओं को मिली कुछ साझा बातचीत में निजी और व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी मौजूद थी। इनमें यह जानकारी शामिल हैं...

    • प्राइवेट रिक्रूटमेंट मीटिंग के नोट्स:एक एआई कंपनी से जुड़ी निजी भर्ती बैठक की जानकारी।
    • इंटरनल रेवेन्यू रिपोर्ट:एक कंपनी के सीईओ के लिए तैयार की गई आंतरिक कारोबारी रिपोर्ट।
    • लोन आवेदन:एक छोटे बिजनेस के मालिक के लोन आवेदन से जुड़ी जानकारी, जिसमें राशि भी शामिल थी।
    • बैंकिंग फ्रॉड अलर्ट:बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े अलर्ट और अकाउंट की कुछ आंशिक जानकारी।
    • प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट:निवेश से जुड़े वित्तीय आंकड़े और पते।
    • कर्मचारियों के वेकेशन कैलेंडर:दर्जनों कर्मचारियों की छुट्टियों से संबंधित जानकारी।

    ये उदाहरण दिखाते हैं कि एआई चैटबॉट में साझा की गई बातचीत में सिर्फ सामान्य सवाल-जवाब नहीं, बल्कि निजी दस्तावेज और कंपनियों के आंतरिक रिकॉर्ड भी हो सकते हैं। अगर ऐसे कंटेंट के लिंक अनचाहे लोगों तक पहुंचें, तो इससे व्यक्तिगत और कारोबारी गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

    मेटा ने क्या कदम उठाए?

    • रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं की समीक्षा के दौरान मेटा ने म्यूज एआई के बातचीत-शेयरिंग फीचर को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य सामने आई समस्या की समीक्षा करना और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों को समझना है।
    • हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि फीचर को दोबारा कब शुरू किया जाएगा या लिंक बनाने की व्यवस्था में किस तरह के तकनीकी बदलाव किए जाएंगे। यह भी साफ नहीं है कि सामने आए लिंक किसी व्यापक अनधिकृत एक्सेस या डेटा के दुरुपयोग का कारण बने थे या नहीं।

    एआई चैटबॉट इस्तेमाल करने वालों के लिए क्या है सबक?

    • यह मामला एआई असिस्टेंट्स के इस्तेमाल के साथ जुड़ी एक अहम समस्या को सामने लाता है। यूजर्स अक्सर इन टूल्स में ऐसी जानकारी डाल देते हैं, जिसे वे सार्वजनिक नहीं करना चाहते। इसमें वित्तीय रिकॉर्ड, कंपनी के दस्तावेज, निजी बातचीत और व्यक्तिगत विवरण शामिल हो सकते हैं।
    • इसलिए किसी भी एआई चैटबॉट में बातचीत शेयर करने से पहले यह जांचना जरूरी है कि लिंक खोलने वाला व्यक्ति क्या देख पाएगा और क्या लिंक दूसरों तक पहुंच सकता है। संवेदनशील जानकारी वाली बातचीत को सार्वजनिक या व्यापक रूप से शेयर करने से बचना चाहिए। जहां संभव हो, दस्तावेज साझा करने से पहले उसमें मौजूद निजी जानकारी को हटाना भी बेहतर है।
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