अब मध्यस्थ नहीं सर्विस प्रोवाइडर है मेटा: बाल शोषण वाले कंटेंट पर कंपनी ने मानी गलती, क्या ली नई जिम्मेदारी?
मेटा ने भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले को लेकर अपना रुख बदल लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा ने माना है कि वह केवल एक मध्यस्थ नहीं बल्कि सर्विस प्रोवाइडर है, जिसके एल्गोरिदम कंटेंट की विजिबिलिटी तय करते हैं। साथ ही मेटा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बच्चों के यौन शोषण (CSAM) से जुड़े कंटेंट की जानकारी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने की बात कही है।

विस्तार
सरकारी सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन को लेकर एक खास अपडेट सामने आया है। अब तक खुद को सिर्फ एक सूचना साझा करने वाला मध्यस्थ बताने वाला मेटा अब अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को नए सिरे से स्वीकार कर रहा है। मेटा अब सिर्फ एक मध्यस्थ नहीं, बल्कि एक सर्विस प्रोवाइडर बन गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि कौन सा कंटेंट किसे दिखेगा, किस कंटेंट की विजिबिलिटी कितनी होगी और किसे बढ़ावा दिया जाएगा। जब एल्गोरिदम खुद कंटेंट की पहुंच तय करता है, तो प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल एक जरिया बनने तक सीमित नहीं रह जाती।
जवाबदेही तय होना क्यों है जरूरी?
सरकारी सूत्रों ने साफ कहा है कि सर्विस प्रोवाइडर की अपनी कुछ जिम्मेदारियां तय होती हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में जिम्मेदारी स्वीकार करने का मेटा का यह फैसला, पूरे सोशल मीडिया क्षेत्र में उसके रुख में आया एक बहुत बड़ा और निर्णायक बदलाव माना जा रहा है।
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मेटा ने मानी गलती, एजेंसियों को डेटा देने पर बनी सहमति
सूत्रों के अनुसार, मेटा ने साफ तौर पर अपनी गलती स्वीकार कर ली है। कंपनी ने बच्चों के शोषण से जुड़े किसी भी प्रकार के कंटेंट की जानकारी सीधे भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा करने का वादा किया है।
एक हफ्ते में दूसरी बार एनसीपीसीआर के सामने पेश हुए मेटा
- बता दें कि एनसीपीसीआर ने मेटा इंडिया के एमडी और प्रमुख को 16 सितंबर को फिर तलब किया था। यह पेशी आयोग की उस औपचारिक जांच का हिस्सा है, जो इंस्टाग्राम पर सीएसईएएम से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में चल रही है। मेटा इंडिया के प्रमुख अरुण श्रीनिवास के साथ कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी आयोग के सामने पेश हुए।
- एनसीपीसीआर ने इस मामले में पहली बार तीन जुलाई को मेटा को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा था। जिसमें इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कथित विज्ञापनों के चलने का आरोप लगाया गया था। मेटा ने करीब एक सप्ताह बाद आयोग को अपना जवाब दिया। इसके बाद एनसीपीसीआर ने मामले में औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया।
मेटा ने क्या कहा?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मेटा के अधिकारियों ने एनसीपीसीआर के सामने वही पक्ष रखा, जो कंपनी पहले इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सामने रख चुकी है। फिलहाल एनसीपीसीआर की जांच जारी है और आयोग मामले से जुड़े तथ्यों तथा कंपनी की प्रतिक्रिया की जांच कर रहा है।
मेटा ने बदली बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टिंग व्यवस्था
- इस पूरे मामले में सबसे बड़ा बदलाव मेटा की रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर सामने आया है। मेटा अब भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे इंडियन साइबर क्राइम कॉआर्डिनेशन सेंटर यानी I4C की ओर से संचालित साइबर क्राइम पोर्टल पर देने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। कंपनी ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा उसके प्लेटफॉर्म की प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- इससे पहले मेटा से जुड़ी ऐसी रिपोर्टिंग मुख्य रूप से अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) के जरिए होती थी। एनसीएमईसी से संबंधित जानकारी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचती थी। अब I4C को सीधे रिपोर्टिंग के लिए अलग चैनल जुड़ गया है।
सरकार के लिए यह बदलाव क्यों अहम है?
- सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बुनियादी और गैर-समझौतावादी जिम्मेदारी है।
- सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए पर्याप्त कदम उठाने होंगे। सूत्रों के मुताबिक, सरकार दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ भी इस मुद्दे पर संपर्क कर रही है।
- यही वजह है कि मेटा का सीधे भारतीय साइबर क्राइम सिस्टम से जुड़ना सिर्फ रिपोर्टिंग का तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर चल रही व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
मेटा ने क्या जिम्मेदारी ली?
- मेटा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यही है कि भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे I4C के साइबर क्राइम पोर्टल पर की जाएगी।
- मेटा ने कहा है कि इस कदम का उद्देश्य ऑनलाइन बच्चों के शोषण से जुड़े अपराधों से निपटने के प्रयासों को मजबूत करना और भारतीय सरकार के साथ समन्वय बढ़ाना है।
- हालांकि, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ पहला कदम है। बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित बनाने के लिए प्लेटफॉर्म्स को अभी और सुरक्षा उपाय करने होंगे।
NCPCR ने कैपजेमिनी अधिकारी को भी बुलाया
इसी दिन NCPCR ने एक अलग मामले में कैपजेमिनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी तलब किया। यह मामला बेंगलुरु में कंपनी द्वारा संचालित डे-केयर सेंटर में बच्चों के कथित दुर्व्यवहार से जुड़ा है। इस मामले की सुनवाई भी 16 सितंबर को हुई थी और आयोग का उद्देश्य मामले के तथ्यों तथा जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच करना है।