मेटा पर अमेरिका में ऐतिहासिक जुर्माना: कंपनी भरेगी 2.2 लाख करोड़, कैम्ब्रिज एनालिटिका से जुड़ा है मामला

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Thu, 22 Oct 2026 04:30 PM IST
सार

-मेटा पर यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी को लेकर गुमराह करने के आरोप में 2.2 लाख करोड़ रुपये के जुर्माने का मामला सामने आया है।

-यह मामला फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा के डेटा इस्तेमाल और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े आरोपों पर केंद्रित है।

-कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद भी इस मामले के संदर्भ में चर्चा में है। इस विवाद में फेसबुक यूजर्स के डेटा के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

-मेटा पर पहले भी डेटा प्राइवेसी, यूजर्स की जानकारी और सुरक्षा से जुड़े मामलों में भारी जुर्माने लगाए जा चुके हैं।

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मेटा पर अमेरिकी कोर्ट ने लगाया भारी भरकम जुर्माना। - फोटो : एआई जनरेटेड

    विस्तार

    फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को अमेरिका में डेटा प्राइवेसी से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। न्यू मैक्सिको कोर्ट के एक जज ने कंपनी पर 25 अरब डॉलर (करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। यह मामला यूजर्स के निजी डेटा के इस्तेमाल, सुरक्षा और कंपनी की नीतियों को लेकर लोगों को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को जज फ्रांसिस मैथ्यू ने जुर्माने की रकम तय की। इससे पहले सितंबर में सांता फे की जूरी ने माना था कि कंपनी और उसके अधिकारियों के कई बयान भ्रामक थे और उन्होंने राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन किया।

    कंपनी के नाम पर 4.3 करोड़ से ज्यादा उल्लंघन के मामले

    • न्यू मैक्सिको प्रशासन ने आरोप लगाया था कि मेटा ने यूजर्स को उनके डेटा तक पहुंच, नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट और कंपनी की दूसरी नीतियों के बारे में सही जानकारी नहीं दी। मामले में कंपनी और उसके अधिकारियों के कुल 29 बयानों की जांच हुई। जूरी ने इनमें से 26 बयानों को भ्रामक माना।
    • इन बयानों से जुड़े मामलों में राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून के 4.3 करोड़ से ज्यादा उल्लंघन गिने गए। राज्य के कानून के तहत हर उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है।
    • जज ने अपने आदेश में कहा कि कानून के हिसाब से जुर्माने की रकम 219 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती थी। हालांकि, उन्होंने इसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया। अगर मेटा जुर्माने की कोई रकम समय पर नहीं चुकाती है, तो बकाया रकम पर हर साल 15 फीसदी ब्याज भी लगेगा।

    मेटा पर जुर्माने को घटाकर 3.45 अरब डॉलर किया

    • इस मामले में न्यू मैक्सिको के वकीलों ने 35 अरब से 40 अरब डॉलर तक के जुर्माने की मांग की थी। वहीं, मेटा ने अदालत से इसे अधिकतम 3.45 अरब डॉलर तक सीमित रखने की अपील की थी।
    • कंपनी का तर्क था कि बहुत बड़ा जुर्माना दूसरी कंपनियों को न्यू मैक्सिको में कारोबार करने से हतोत्साहित कर सकता है। मेटा ने यह भी कहा कि वह लोगों का निजी डेटा नहीं बेचती और राज्य यह साबित नहीं कर पाया कि किसी यूजर को वास्तव में गुमराह किया गया था।
    • न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने कहा है कि जुर्माने से मिलने वाली रकम राज्य के स्कूलों पर खर्च की जाएगी। फैसले पर मेटा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

    क्या है 2018 का कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद?

    • यह मामला 2018 में सामने आए कैम्ब्रिज एनालिटिका विवाद से जुड़ा है। उस समय रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया था कि ब्रिटेन की कंपनी कैंब्रिड अनैलेटिका (Cambridge Analytica) ने एक थर्ड-पार्टी एप के जरिए फेसबुक के करीब 8.7 करोड़ यूजर्स की जानकारी उनकी सहमति के बिना जुटाई थी।
    • यह कंपनी डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के लिए भी काम कर चुकी थी। इस विवाद के बाद सोशल मीडिया कंपनियों के डेटा इस्तेमाल और यूजर्स की सहमति को लेकर दुनिया भर में सवाल उठे थे।
    • न्यू मैक्सिको के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल हेक्टर बाल्डेरास ने 2021 में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। राज्य ने अगस्त में कई राज्यों के अटॉर्नी जनरल और मेटा के बीच हुए अलग मामले के करीब 17 अरब डॉलर के समझौते में हिस्सा नहीं लिया था।

    इस साल मेटा के खिलाफ दूसरा बड़ा फैसला

    • न्यू मैक्सिको में मेटा के खिलाफ यह इस साल का दूसरा बड़ा फैसला है। मार्च में सांता फे की एक जूरी ने युवा यूजर्स की सुरक्षा से जुड़े मामले में कंपनी को 37.5 करोड़ डॉलर का हर्जाना भरने का आदेश दिया था। बाद में जज ने 56.7 करोड़ डॉलर की रकम किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े फंड में देने का निर्देश दिया।
    • मेटा ने उस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही थी। ताजा मामले में 25 अरब डॉलर का जुर्माना कंपनी के लिए एक और बड़ी कानूनी चुनौती है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स के डेटा और सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

    मेटा पर कब-कब लगे बड़े जुर्माने?

    मेटा की स्वामित्व वाली कंपनी फेसबुक दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। लेकिन अपने यूजर्स के डेटा की प्राइवेसी, उपभोक्ता संरक्षण और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में कोताही बरतने के कारण कंपनी को कई बार अदालतों और रेगुलेटर्स की कार्रवाई का शिकार होना पड़ा है:

    FTC द्वारा 5 बिलियन डॉलर का जुर्माना (2019)

    किसने लगाया:

    अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC)।

    कारण:

    साल 2018 में कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल सामने आया था, जिसमें बिना सहमति के 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा एक पॉलिटिकल कंसल्टिंग फर्म को दे दिया गया था।

    अहम बात:

    FTC ने प्राइवेसी के उल्लंघन के लिए 5 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया, जो उस समय तक दुनिया में किसी भी टेक कंपनी पर लगा सबसे बड़ा प्राइवेसी जुर्माना था।

    यूरोपीय यूनियन द्वारा 1.3 बिलियन डॉलर का जुर्माना (मई 2023)

    किसने लगाया:

    आयरिश डेटा प्रोटेक्शन कमीशन (DPC), यूरोपीय यूनियन।

    कारण:

    फेसबुक पर आरोप था कि उसने यूरोपीय यूजर्स के पर्सनल डेटा को अमेरिकी सर्वर्स पर ट्रांसफर किया, जिससे यूजर्स का डेटा अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की निगरानी के खतरे में आ गया।

    अहम बात:

    यह यूरोपीय यूनियन के इतिहास में GDPR (जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) के तहत लगाया गया सबसे बड़ा जुर्माना था।

    टेक्सास बायोमेट्रिक सेटलमेंट - 1.4 बिलियन डॉलर (2024)

    किसने लगाया:

    टेक्सास राज्य (अमेरिका)।

    कारण:

    टेक्सास अटॉर्नी जनरल ने मेटा पर मुकदमा किया था कि फेसबुक ने बिना सहमति के करोड़ों लोगों के फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान) डेटा को 'फोटो टैग सजेशन' फीचर के जरिए कैप्चर किया।

    अहम बात:

    यह अमेरिका में बायोमेट्रिक प्राइवेसी के उल्लंघन को लेकर सबसे बड़े समझौतों में से एक था।

    इनके अलावा यूरोप में मेटा को अलग-अलग उल्लंघन के मामलों में लगातार करोड़ों यूरो के जुर्माने झेलने पड़े हैं:

    225 मिलियन यूरो (2021):

    मेटा की मैसेजिंग एप WhatsApp पर यह ठीक से न बताने के लिए कि वह फेसबुक के साथ डेटा कैसे शेयर करता है।

    390 मिलियन यूरो (2022):

    फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बिना वैध सहमति लिए यूजर्स को पर्सनलाइज्ड विज्ञापन दिखाने के लिए।

    265 मिलियन यूरो (2022):

    फेसबुक के डिजाइन में खामी के कारण 53.3 करोड़ यूजर्स का डेटा, फोन नंबर आदि लीक होने (डेटा स्क्रेपिंग) के कारण।

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