Karnataka HC: ट्विटर अकाउंट्स ब्लॉकिंग मामले में कोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- हम सरकार के आदेश पर नहीं
Karnataka HC: Twitter ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्वीट्स, अकाउंट्स और यूआरएल को हटाने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार द्वारा बार-बार स्थगन की मांग पर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले पर बार-बार स्थगन मांगा जा रहा है। हम सरकार के आदेश पर नहीं हैं। बता दें कि मामले की आखिरी सुनवाई 27 अक्टूबर, 2022 को हुई थी, जब ट्विटर ने तर्क दिया था कि केंद्र द्वारा जारी किए गए अकाउंट ब्लॉकिंग आदेशों में ऐसे कारण होने चाहिए जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूजर्स को बताए गए हों। दरअसल, ट्विटर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्वीट्स, अकाउंट्स और यूआरएल को हटाने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
ट्विटर ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर को यूजर्स को नोटिस दिए बिना उनके अकाउंट्स, पोस्ट और यूआरएल को ब्लॉक करने के आदेश दिए गए थे। जिसके बाद सरकार के आदेश को चुनौती देने वाला ट्विटर का यह मामला जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित के समक्ष आया। बता दें कि केंद्र सरकार के वकील ने सुनवाई को 27 जनवरी या 3 फरवरी तक के लिए स्थगित करने की मांग की।
कोर्ट ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले पर बार-बार स्थगन मांगा जा रहा है। कोर्ट ने कहा, "हम इस तरह सरकार के आदेश पर नहीं हैं। मैं सहमत नहीं हूं। लोग क्या सोचेंगे? हम आपके इशारे पर नहीं हैं। आपने कितनी बार स्थगन लिया है। ऑर्डर शीट देखें।" कोर्ट ने कहा वह केवल एक सप्ताह का समय देगी और मामले को 18 जनवरी को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।