6G: देश में आने वाला है 6G नेटवर्क? रिलायंस AGM में आकाश अंबानी ने लॉन्च टाइमलाइन को लेकर दिया यह बड़ा अपडेट
Jio 6G:
क्या भारत अब 5जी के बाद 6 जी का दौर शुरू होने वाला है? रिलायंस जियो ने एजीएम में 6जी, एआई और सैटेलाइठ इंटरनेट को लेकर बड़े संकेत दिए है। आइए जानते हैं कि देश में जियो 6G कब तक आ सकता है और यह कैसे बदल देगा इंटरनेट का अनुभव।

विस्तार
Jio 49th AGM Announcements:
भारत में मोबाइल इंटरनेट की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। रिलायंस जियो अब अगली बड़ी छलांग की तैयारी में जुट गई है। दरअसल, कंपनी ने अपनी 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में 6G नेटवर्क, AI टेक्नोलॉजी और सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर बड़े संकेत दिए हैं। जियो का कहना है कि सिर्फ तेज इंटरनेट देना ही नहीं, बल्कि भविष्य के डिजिटल इकोसिस्टम को तैयार करना भी, कंपनी का लक्ष्य है।
6G को लेकर क्या कहा गया?
- एजीएम के दौरान जियो इनफोकॉम लिमिटेड के चैयरमैन अकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी 6G तकनीक के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। हालांकि अभी तक 6जी की लॉन्चिंग को लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन कंपनी का लक्ष्य 2030 तक कमर्शियल 6G सेवाएं शुरू करना है।
- कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में 6G केवल इंटरनेट स्पीड ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि एआई आधारित सेवाओं, स्मार्ट डिवाइसेज और नई डिजिटल टेक्नोलॉजी को भी मजबूत करेगा।
कब तक शुरू हो सकती है टेस्टिंग?
- कार्यक्रम के दौरान कंपनी ने संकेत दिए कि 6G नेटवर्क के लिए जरूरी तकनीकी तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है। संभावना है कि वर्ष 2028 तक प्री-कमर्शियल टेस्टिंग या पायलट ट्रायल शुरू किए जा सकते हैं। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा ताकि 2030 तक व्यापक स्तर पर 6G सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
पहले सभी यूजर्स को 5G पर लाने का लक्ष्य
कंपनी का फोकस फिलहाल 5G नेटवर्क को देशभर में मजबूत करना भी है। एजीएम में बताया गया कि जियो का लक्ष्य 2030 तक अधिकतम मोबाइल यूजर्स को 5G नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि 6G के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।
सैटेलाइट इंटरनेट पर भी बड़ा दांव
हालांकि इस दौरान और भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई, जिसमें लॉ अर्थ ऑरबिट यानी LEO सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की तैयारी शामिल है। बताया कि जियो भविष्य में ऐसा सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करना चाहती है जो मोबाइल टावरों के साथ मिलकर इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराए। इस तकनीक की मदद से दूरदराज और नेटवर्क से वंचित इलाकों तक भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकेगा।LEO Satellite Network क्या होता है ?
- एलईओ यानी लॉ अर्थ ऑरबिट सैटेलाइट पृथ्वी के काफी नजदीक स्थित होते हैं। ये आमतौर पर 160 किलोमीटर से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।
- धरती के नजदीक होने की वजह से डेटा ट्रांसमिशन तेज होता है और इंटरनेट लेटेंसी कम रहती है। यही वजह है कि एलईओ सैटेलाइट तकनीक को भविष्य के हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन कैसे काम करता है?
आपको बता दें कि पूरी दुनिया को इंटरनेट कवरेज देने के लिए केवल एक या दो सैटेलाइट पर्याप्त नहीं होते। इसलिए कई सैटेलाइट्स का नेटवर्क बनाया जाता है, जिसे सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन कहा जाता है।
ये सभी सैटेलाइट आपस में डेटा साझा करते हुए बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं और यूजर्स तक लगातार इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाते हैं।
AI और 6G का होगा गहरा संबंध
- जियो ने AI आधारित नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं का भी जिक्र किया। कंपनी का मानना है कि भविष्य में एआई और 6G एक-दूसरे के पूरक होंगे।
- स्मार्ट नेटवर्क मैनेजमेंट, ऑटोमेशन और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए AI की भूमिका काफी अहम रहने वाली है।
जियो नेटवर्क के बढ़ते आंकड़े
कंपनी के मुताबिक जियो के ग्राहकों की संख्या 524 मिलियन से अधिक हो चुकी है। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जियो नेटवर्क पर 241 एक्साबाइट्स डेटा ट्रैफिक दर्ज किया गया, जो देश में बढ़ती इंटरनेट खपत को दर्शाता है।