कमाल की तकनीक: महीनों का काम सिर्फ 14 दिनों में! जापान ने 3D प्रिंटर से बना डाला 20 फीट ऊंचा घर

Suyash Pandey
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीSuyash Pandey
Fri, 15 May 2026 06:27 PM IST
सार

Japan 3D Printed House:

जापान की स्टार्टअप Kizuki ने देश का पहला 3D-प्रिंटेड दो-मंजिला घर तैयार किया है। इसे 'Stealth House' नाम दिया गया है। यह घर भूकंप-रोधी डिजाइन के साथ बनाया गया है और इसे सिर्फ 14 दिनों में प्रिंट किया गया। जापान में बढ़ती निर्माण लागत और श्रमिकों की कमी के बीच यह तकनीक बड़ी उम्मीद मानी जा रही है। इस प्रोजेक्ट में ONOCOM समेत 20 से ज्यादा कंपनियों ने सहयोग किया। रिपोर्ट के अनुसार, 3D प्रिंटेड कंस्ट्रक्शन तकनीक भविष्य में तेज, सस्ती और सुरक्षित हाउसिंग का बड़ा समाधान बन सकती है।

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Japan’s First 3D-Printed Two-Storey Home Could Transform Future Housing Industry
जापान में 3D प्रिंटर की मदद से सिर्फ 14 दिन में प्रिंट कर दिया 20 फुट ऊंचा दो मंजिला घर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स

    विस्तार

    जापान की कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री (निर्माण उद्योग) इन दिनों एक बड़े संकट से गुजर रही है। निर्माण सामग्री की आसमान छूती कीमतें और उम्रदराज होते कर्मचारियों के कारण इस 625 अरब डॉलर के सेक्टर का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। लेकिन, अब एक नई तकनीक 3D प्रिंटिंग ने इस संकट को दूर करने की एक बड़ी उम्मीद जगाई है।

    3D-प्रिंटर से भूकंपरोधी 2 मंजिला घर तैयार

    बिल्डिंग-टेक स्टार्टअप Kizuki ने हाल ही में ONOCOM समेत 20 से ज्यादा कंपनियों के साथ मिलकर जापान का पहला 3D-प्रिंटेड दो मंजिला घर तैयार किया है। इसे 'स्टेल्थ हाउस' नाम दिया गया है। सबसे खास बात यह है कि जापान जैसे देश में, जहां भूकंप आना आम बात है, यह घर पूरी तरह से भूकंपरोधी है और सभी सख्त निर्माण नियमों का पालन करता है।

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    नींव से छत तक 14 दिन में प्रिंट किया घर

    यह घर 6 मीटर (20 फीट) ऊंचे और 50 वर्ग मीटर (538 वर्ग फुट) में फैला है। इस एक विशाल 3D प्रिंटर की मदद से नींव से लेकर छत तक मात्र 14 दिनों में साइट पर ही प्रिंट कर लिया गया। इसकी मजबूती का भी खास ख्याल रखा गया है। सरकारी नियमों के तहत इसे सुरक्षित बनाने के लिए इसकी बाहरी दीवारों को पहले खोखला ढांचा दिया गया और फिर बाद में उसमें कंक्रीट भरकर इसे पूरी तरह से मजबूत किया गया।

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    समय की बड़ी बचत

    जापान में काम करने वाली आबादी तेजी से घट रही है, जहां एक अनुमान के मुताबिक अगले 10 वर्षों में कंस्ट्रक्शन सेक्टर के करीब 45% यानी 15 लाख कुशल कर्मचारी रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में 3D-प्रिंटेड कंस्ट्रक्शन (3DPC) तकनीक इस संकट का एक बेहतरीन समाधान बनकर उभरी है।

    यह तकनीक न केवल महीनों के काम को हफ्तों या दिनों में समेटकर समय की भारी बचत करती है, बल्कि एक छोटी सी टीम भी इसकी मशीनों की मदद से बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को आसानी से संभाल सकती है। इसके अलावा, यह ऑन-साइट काम को अधिक सुरक्षित बनाती है और निर्माण सामग्री की बर्बादी को न के बराबर कर देती है।

    सख्त नियम और कागजी कार्रवाई बड़ी रुकावट

    हालांकि यह तकनीक दिखने में जादुई लगती है, लेकिन इसके व्यावसायिक इस्तेमाल के रास्ते में अभी कई रुकावटें हैं। सबसे बड़ी समस्या सख्त नियमों और कागजी कार्रवाई की है। क्योंकि सरकारें नई तकनीकों को लेकर काफी सतर्क हैं और फिलहाल हर एक 3D-प्रिंटेड घर के लिए अलग से मंजूरी लेनी पड़ती है।

    इसके अलावा, जापान में होम लोन के नियमों के मुताबिक मकान का कम से कम 70 वर्ग मीटर होना जरूरी है। जबकि यह 'स्टेल्थ हाउस' सिर्फ 50 वर्ग मीटर का है। ऐसे में इसके खरीदार केवल वही लोग बन सकते हैं जो कैश दे सकें या जो रिटायर्ड हों। साथ ही, निवेशकों और बीमा कंपनियों में भी लंबे समय की मजबूती को लेकर भरोसे की कमी है। क्योंकि अभी तक यह साबित करने के लिए कोई पुराना डेटा मौजूद नहीं है कि ये घर 50-60 वर्षों तक टिक पाएंगे या नहीं।

    निर्माण क्षेत्र में एआई और ऑटोमेशन को बढ़ावा

    इस संकट से उबरने के लिए जापान सरकार 'i-Construction' जैसी पहल के जरिए निर्माण क्षेत्र में एआई और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों को लगातार बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 3D प्रिंटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यह संगम युवाओं को इस सेक्टर की तरफ आकर्षित करेगा। इससे यह काम गंदा और खतरनाक लगने के बजाय काफी क्रिएटिव और कूल बन जाएगा।

    इस बड़े बदलाव की तैयारी के लिए स्टार्टअप Kizuki इस साल के अंत तक एक '3DPC अकादमी' भी शुरू करने जा रहा है, ताकि भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नए 3D प्रिंटर ऑपरेटर्स को तैयार किया जा सके। भले ही आज 3D प्रिंटिंग कई लोगों को किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी लगती हो। लेकिन जब वे इसे अपनी आंखों के सामने हकीकत बनते देखते हैं तो उन्हें साफ समझ आ जाता है कि यही कंस्ट्रक्शन का असली भविष्य है।

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