धरती कांपेगी, पर आपका घर हवा में तैरेगा: जापान की इस क्रांतिकारी 'फ्लोटिंग हाउस' तकनीक से बचेंगी लाखों जानें
भूकंप से होने वाली सबसे बड़ी तबाही इमारतों के गिरने से होती है। इसी खतरे को कम करने के लिए जापान ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें भूकंप के झटके महसूस होते ही पूरा घर कुछ सेंटीमीटर हवा में उठ जाता है। जानिए यह सिस्टम कैसे काम करता है और इसकी क्या सीमाएं हैं।

विस्तार
दुनिया में हर साल आने वाले भूकंप हजारों लोगों की जान ले लेते हैं और अरबों रुपये की संपत्ति पलभर में मलबे में बदल जाती है। हाल के वर्षों में तुर्किये और वेनेजुएला जैसे देशों में आए विनाशकारी भूकंपों ने एक बार फिर दिखा दिया कि सबसे ज्यादा नुकसान इमारतों के गिरने से होता है। ऐसे में भूकंप प्रभावित देशों में सुरक्षित निर्माण तकनीकों पर तेजी से काम किया जा रहा है।
इसी दिशा में जापान ने एक ऐसी अनोखी तकनीक विकसित की है, जो भूकंप आते ही पूरे घर को जमीन से ऊपर उठा देती है। इसका उद्देश्य झटकों के सीधे असर को कम करना है, ताकि इमारत के गिरने का खतरा काफी हद तक घट सके।
हवा में उठने वाले घर
- जापान की एक इनोवेटिव टेक कंपनी 'एयर डानशिन सिस्टम्स इंक' (Air Danshin Systems Inc) ने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो किसी हॉलीवुड फिल्म के दृश्य जैसा लगता है। इस नई तकनीक का मुख्य उद्देश्य भूकंप के दौरान इमारत और जमीन के सीधे संपर्क को तोड़ना है, ताकि झटकों का असर घर की नींव तक न पहुंच सके।
- इस सिस्टम में घर को एक विशेष एयर चैंबर के ऊपर बनाया जाता है। जैसे ही घर में लगे सीस्मिक सेंसर भूकंप की शुरुआती हलचल को पहचानते हैं, सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है। इसके बाद चैंबर में तेज दबाव वाली हवा भरी जाती है, जिससे पूरा घर लगभग 3 सेंटीमीटर तक जमीन से ऊपर उठ जाता है।
- जब घर सीधे जमीन के संपर्क से कुछ समय के लिए अलग हो जाता है, तो भूकंप के झटकों का प्रभाव काफी कम हो जाता है। जैसे ही कंपन खत्म होता है, सिस्टम धीरे-धीरे घर को वापस अपनी मूल स्थिति में ले आता है।
एक सेकंड से भी कम समय में हो जाता है एक्टिव
- यह तकनीक सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। जापान में करीब 90 घरों और इमारतों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
- कंपनी के अनुसार, भूकंप की शुरुआती तरंगें महसूस होने के एक सेकंड से भी कम समय में यह सिस्टम सक्रिय हो जाता है। इसमें इमरजेंसी बैटरी बैकअप भी दिया गया है, जिससे बिजली गुल होने की स्थिति में भी यह बिना रुकावट काम कर सकता है।
- कंपनी का दावा है कि इस तकनीक को अपनाने के लिए अत्यधिक खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि अब इसका उपयोग केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी लैबोरेट्री, औद्योगिक इकाइयों और फैक्ट्रियों के लिए भी इसके अलग संस्करण तैयार किए जा चुके हैं।
अभी भी जारी है तकनीक को और बेहतर बनाने का काम
- डानशिन सिस्टम्स इस तकनीक को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। कंपनी इसके डिजाइन में सुधार कर रही है और इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उपलब्ध कराने की तैयारी में है।
- हालांकि शुरुआती परीक्षणों में इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। मौजूदा सिस्टम हल्के भूकंप के झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है, लेकिन बहुत तेज तीव्रता वाले भूकंप या अलग-अलग दिशाओं से आने वाली जटिल भूकंपीय तरंगों के दौरान इसकी क्षमता सीमित हो सकती है।
- फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को और विकसित किया गया, तो भविष्य में यह भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान साबित हो सकती है।