ISRO ने बनाई देसी परमाणु घड़ी, 10 हजार साल चलने पर होती है 1 सेकेंड पीछे, जानिए इसके बारे में सबकुछ

प्रदीप पाण्डेय, अमर उजाला, नोएडा
Mon, 07 May 2018 02:57 PM IST
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Isro develops desi atomic clock, Know everything about it
atomic clock

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक परमाणु घड़ी (एटॉमिक क्लॉक) तैयार की है जिसका इस्तेमाल नेविगेशन सैटेलाइट्स (जीपीआरएस) में किया जाएगा। इसकी मदद से हमें किसी भी जीपीएस आधारित चीज की सटीक लोकेशन मिल सकेगी। गौरतलब है कि इससे पहले इसरो को अपने नेविगेशन सैटेलाइट के लिए यूरोपियन ऐरोस्पेस मैन्युफैक्चरर ऐस्ट्रियम से परमाणु घड़ी खरीदनी पड़ती है लेकिन यह देसी परमाणु घड़ी फिलहाल परीक्षण अवधि में है। टेस्ट में सफल होने के बाद इसका इस्तेमाल प्रायोगिक तौर पर नेविगेशन सैटेलाइट में होने लगेगा। अब सवाल यह है कि आखिर यह परमाणु घड़ी क्या होती है और यह कैसे काम करती है?

    परमाणु घड़ी में दो शब्द हैं- परमाणु और घड़ी।

    सबसे पहले घड़ी की बात करें तो अगर आपको लगता है कि रेडियो द्वारा बताया गया समय ही सटीक है तो आप गलत हैं क्योंकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब सवाल यह है कि कौन-सा समय सबसे सटीक है? आप कंप्यूटर या मोबाइल या फिर इंटरनेट पर किसी वेबसाइट पर भी समय देखते हैं तो बताइए कि इन जगहों पर समय कौन-सी घड़ी से अपडेट होता है? इसका जवाब यह है कि ये समय जीपीएस यानि ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम पर आधारित हैं। परमाणु घड़ियां सेकेंड के लाखवें हिस्से तक सटीकता से बताती हैं।

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    Image result for atomic clock
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    परमाणु घड़ी ठीक उसी फ्रिक्वेंसी पर काम करती हैं जैसे पेंडुलम वाली घड़ियां चलती हैं। जिस तरह पेंडुलम तापमान और प्रेशर के आधार पर काम करता है, उसी तरह परमाणु घड़ियां भी परमाणु कणोंं के कंपन के आधार पर काम करती हैं। इस घड़ी के अंदर सीजियम धातु के परमाणु ठीक वैसे ही विद्युत द्वारा कंपन करते हैं जैसे दीवार घड़ी में पेंडुलम में कंपन करते हैं।

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    बता दें कि परमाणु के 9,19,26,31,776 कंपनों की अवधि 1 सेकेंड के बराबर माना गया् है। परमाणु घड़ी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम की माइक्रोवेव, ऑप्टिकल, अल्ट्रावायलेट और प्रकाश के कंपनी या फ्रिकवेंसी के आधार पर समय बताती है। कंप्यूटर, मोबाइल और यहां तक की पेसमेकर भी इसी के आधार पर समय बताता है। परमाणु घड़ी को ही दुनिया में सबसे सटीक माना गया है। नेविगेशन सैटेलाइट के आधार पर ही आजकल ज्योतिष भी भविष्यवाणी करने हैं। इसकी सटीकता इतनी है कि 1 मिलियन साल लगातार चलने के बाद यह 1 सेकेंड पीछे हो सकता है।

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