Jio को रोकने के लिए हुआ Idea-Vodafone का महागठबंधन !

गठबंधन, अब महागठबंधन हो गया है। हाल के कुछ दिनों की बात करें तो किसी को रोकना हो या किसी को हराना हो सबसे पहले विरोधी पार्टियां महागठबंधन का रास्ता अपना रही हैं। हालांकि महागठबंधन अब तक राजनीति में ही होता था लेकिन अब यह टेलीकॉम सेक्टर में होने लगा है। राजनीति में जहां पीएम मोदी को रोकने के लिए यूपी और बिहार में महागठबंधन हुआ वहीं जियो को रोकने के लिए टेलीकॉम इंडस्ट्री में महागठबंधन हो रहा है।
एयरटेल-टेलीनॉर का महागठबंधन

फरवरी से खबर चल रही है कि देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल नार्वे की कंपनी टेलीनॉर के इंडिया ऑपरेशन को खरीदने जा रही। बताया जा रहा है कि एयरटेल का यह कदम जियो को रोकने के लिए है क्योंकि इस अधिग्रहण के बाद एयरटेल के पास 1,800MHz बैंड का एक्स्ट्रा स्पेक्ट्रम होगा। एयरटेल टेलीनॉर इंडिया के सात सर्कल को खरीदेगी जिनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश (पश्चिम), उत्तर प्रदेश (पूर्व) और असम शामिल हैं
जियो की एंट्री से हड़कंप

सितंबर में जियो ने टेलीकॉम बाजार में जैसे ही कदम रखा उसके बाद से ही अन्य टेलीकॉम कंपनियों की नींद उड़ी है। जियो को रोकने के लिए रोज नए-नए ऑफर पेश हो रहे हैं। कोई कंपनी फ्री में 30 जीबी डाटा दे रही है तो कोई कम दाम में अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ डाटा दे रही है। सभी कंपनियों का एक ही मकसद है जियो को रोकना।
आइडिया-वोडाफोन का महागठबंधन

वहीं एयरटेल के बाद अब आइडिया ने वोडाफोन में विलय की घोषणा कर दी है। इस विलय के बाद कंपनी के पास 38 करोड़ ग्राहक हो गए हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि जियो के बढ़ते ग्राहकों की संख्या को देखते हुए यह विलय हुआ है, क्योंकि सिर्फ 6 महीनों में जियो के ग्राहकों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हो गई हैं। राजनीति वाला महागठबंधन यूपी में मोदी को रोकने में तो फेल हो गया। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जियो को रोकने में एयरटेल-टेलीनॉर और आइडिया-वोडाफोन का महागठबंधन कितना सफल होता है।