Iran-Israel: ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट, फिर भी वायरल हो रहे हमलों के वीडियो, आखिर बाहर कैसे पहुंच रही जानकारी?
Iran-Israel War:
ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से सरकार ने इंटरनेट पर पूरी तरह ताला लगा दिया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दुनिया अब भी वहां की हर हलचल और हमलों के वीडियो देख पा रही है। आखिर इस डिजिटल घेराबंदी के बावजूद ये वीडियो कैसे वायरल हो रहे हैं?

विस्तार
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उपजे तनाव और संभावित जन-विद्रोह को कुचलने के लिए प्रशासन ने पिछले 24 घंटों से पूरे देश में इंटरनेट सेवाओं को ठप कर दिया है। सरकार का मानना है कि संचार के रास्ते बंद करने से प्रदर्शनकारियों की आवाज दब जाएगी, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर लगातार मिसाइल हमलों, बमबारी और सड़कों पर उतरते लोगों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन दृश्यों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। लेकिन सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि जब देश में इंटरनेट पूरी तरह ठप है तो ये वीडियो बाहर कैसे आ कैसे रहे हैं?
स्टारलिंक का गुप्त नेटवर्क बना सहारा
इंटरनेट बंदी के बीच कुछ लोगों ने सैटेलाइट इंटरनेट का सहारा लिया। एलन मस्क की कंपनी SpaceX द्वारा संचालित स्टारलिंक सेवा को लेकर रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कई हजार सैटेलाइट टर्मिनल अवैध तरीके से दुबई और इराक के रास्ते ईरान पहुंचाए गए।
बताया जा रहा है कि इन टर्मिनलों के जरिए देश के अंदर एक सीमित लेकिन सक्रिय ‘सीक्रेट नेटवर्क’ तैयार किया गया, जिसका उपयोग कुछ लोग इंटरनेट एक्सेस के लिए कर रहे हैं। हालांकि यह पूरी तरह वैध नहीं है, फिर भी सूचना साझा करने में यह अहम भूमिका निभा रहा है।
प्रॉक्सी और सेंसरशिप से बचने वाली तकनीक
ईरान में कई एक्टिविस्ट इंटरनेट सेंसरशिप से बचने के लिए खास टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें Snowflake जैसे प्रॉक्सी टूल शामिल हैं। यह तकनीक छोटे-छोटे डिजिटल ब्रिज बनाकर डेटा को सेंसरशिप से बचाते हुए बाहर भेजने में मदद करती है।
इन टूल्स के जरिए यूजर्स प्रतिबंधित नेटवर्क के भीतर से भी कंटेंट अपलोड कर पा रहे हैं। इस प्रक्रिया में डेटा को अलग-अलग रास्तों से ट्रांसफर किया जाता है ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।

फिजिकल डेटा ट्रांसफर
जहां डिजिटल रास्ते बंद हो जाते हैं, वहां जमीन पर पारंपरिक तरीके अपनाए जाते हैं। कई एक्टिविस्ट वीडियो और फोटो को पेन ड्राइव या अन्य स्टोरेज डिवाइस में सेव कर लेते हैं। इसके बाद इन डिवाइसों को देश से बाहर पहुंचाया जाता है या ऐसे स्थानों तक ले जाया जाता है जहां इंटरनेट उपलब्ध हो।
वहां से यह कंटेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जाता है। इस तरीके में समय जरूर लगता है, लेकिन पूरी तरह इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान यह कारगर साबित होता है।
सिस्टम में भीतर से लीकेज भी एक रास्ता
ईरान में इंटरनेट की सीमित पहुंच कुछ खास लोगों तक ही बताई जाती है, जिनमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बड़े कारोबारी और शीर्ष नेता शामिल हैं। ऐसी स्थिति में एक्टिविस्टों ने सिस्टम के अंदर मौजूद खामियों का फायदा उठाने की कोशिश की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ कंटेंट इन्हीं अधिकृत नेटवर्क के जरिए बाहर पहुंचाया गया। यानी जहां पूरी तरह ब्लैकआउट आम जनता के लिए है, वहीं चुनिंदा चैनलों से जानकारी का रिसाव संभव हुआ।
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